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जन्म से सुन नहीं पाते थे, इसलिए कभी बोल भी नहीं सके, ऐसे बच्चों को आवाज देगा ये हॉस्पिटल

इंदौर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के साथ कॉकलियर इंप्लांट की भी तैयारी।

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 07:12 AM IST
एमवायएच के ऑपरेशन थियेटर में भ एमवायएच के ऑपरेशन थियेटर में भ

इंदौर. ऐसे बच्चे जिन्हें जन्म से सुनाई नहीं देता था, इस कारण वे बोल भी नहीं पाते थे। अब ऐसे बच्चों को आवाज देने का काम एमवाय अस्पताल करेगा। फिलहाल, चार बच्चों को चिह्नित किया गया है। इन्हें आवाज देने के लिए भोपाल के डॉक्टर एमवायएच के ऑपरेशन थियेटर में कॉकलियर इंप्लांट करेंगे। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी के साथ-साथ एमवायएच में कॉकलियर इंप्लांट की तैयारी भी शुरू हो गई है। संभवत: अप्रैल के आखिर में ऑपरेशन होंगे। इसके लिए अलग से मॉड्यूलर ओटी की भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

पहले दिन होंगे चार बच्चों के इंप्लांट

- एमजीएम मेडिकल काॅलेज के डीन डॉ. शरद थोरा ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद अप्रैल के आखिर तक कॉकलियर इंप्लांट शुरू कर दिया जाएगा। भोपाल के ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. एसपी दुबे को मेंटर बनाया गया है। - गाइड लाइन के मुताबिक, जिस अस्पताल में कॉकलियर इंप्लांट शुरू किए जाते हैं, वहां शुरू के 25 इंप्लांट मेंटर करते हैं। ऑपरेशन में एक घंटे का समय लगता है। पहली बार में चार बच्चों के ऑपरेशन किए जाएंगे। इसके लिए जरूरी माइक्रोस्कोप सहित अन्य उपकरण भी वे साथ लेकर आएंगे। उनको यहां का स्टाफ असिस्ट करेगा।

ऑडियोलॉजिस्ट के लिए एमजीएम जारी करेगा विज्ञापन

एमवायएच में अभी ऑडियोलॉजिस्ट नहीं है, इसलिए अस्पताल प्रशासन ने आउटसोर्स का मन बनाया है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ऑडियोलॉजिस्ट के लिए विज्ञापन जारी करने जा रहा है। उन्हें प्रति केस भुगतान किया जाएगा।

अब तक ये वजह बताते रहे डॉक्टर
2015 से कोशिश की जा रही थी कि बड़े अस्पताल का ईएनटी विभाग भी यह सर्जरी शुरू कर दे। संभागायुक्त संजय दुबे ने जब कॉकलियर इंप्लांट की संभावनाओं पर बात की तो जवाब मिला कि पहले प्रशिक्षण की जरूरत होगी। संभागायुक्त के निर्देश पर तीन माह का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद मॉड्यूलर ओटी की मांग की जाती रही और मामला अटक गया। इस बार बात की तो फिर से ईएनटी विभाग ने माइक्रोस्कोप नहीं होने का बहाना बना दिया।

पहले प्राइवेट अस्पताल पर किए करोड़ों रुपए खर्च
- श्रवण बाधित बच्चों का यदि कम उम्र में कॉकलियर इंप्लांट कर दिया जाए तो वे दोबारा सुन सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए करीब चार चाल पहले राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना के तहत निजी अस्पतालों से अनुबंध किए गए थे।

- इसके एवज में अस्पतालों को प्रति केस पांच लाख 20 हजार रुपए का भुगतान करती थी। 2016 में बजट की कमी के कारण कुछ दिन ऑपरेशन बंद हो गए थे। इंदौर में श्री अरबिंदो इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस से अनुबंध किया गया था। अभी तक इस योजना पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है, लेकिन खुद केे सरकारी अस्पताल में यह सर्जरी शुरू नहीं करवा पा रहे थे।

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