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नेताजी की मौत का जो सच कांग्रेस ने वर्षों दबा के रखा अब वह बाहर आना चाहिए

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु और उनके जिंदा रहने को लेकर तीन थ्योरी हैं।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 04:43 AM IST

भोपाल. 1945 में सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु और उनके जिंदा रहने को लेकर तीन थ्योरी हैं। नेताजी से जुड़े सारे दस्तावेज भी अभी तक सामने नहीं आए हैं। यह कहना है नेताजी के प्रपौत्र चंद्रकुमार बोस का। एक व्याख्यान में शामिल होने भोपाल आए बोस से भास्कर की विशेष बातचीत।

नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में मानी गई है। आप क्या मानते हैं?
- नेताजी को लेकर तीन बार जांच हुई। शाहनवाज कमेटी ने केंद्र सरकार के दबाव में दिल्ली में बैठकर लिख दिया कि विमान दुर्घटना में नेताजी मारे गए। जस्टिस खोसला आयोग ने ताईवान तक जांच की, लेकिन हादसे वाले स्थल पर नहीं गया। मुखर्जी आयोग उन सभी स्थानों पर गया। उसने माना कि विमान दुर्घटना में नेताजी की मौत नहीं हुई थी।

क्या नेताजी से जुड़े सारे दस्तावेज सामने आ चुके हैं?
- कांग्रेस सरकार ने इतने साल से सच्चाई सामने नहीं आने दी। मोदी सरकार दस्तावेज सामने लाई है, लेकिन इससे प्रमाण नहीं मिल रहे हैं कि आखिर नेताजी के साथ हुआ क्या था।

नेताजी की मौत के सबूत कब और किसने नष्ट कर दिए?
- ये सब 1972 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में उनके निर्देश पर ही फाइल नष्ट की गई थी। कुछ दस्तावेजों में ऐसे प्रमाण मिले हैं। इसीलिए हम एनडीए से मांग कर रहे हैं कि एसआईटी बनाकर सच सामने लाया जाए। नेताजी से जुड़े रशिया, जापान और इंग्लैंड में जो दस्तावेज हैं, वो भी सार्वजनिक होना चाहिए। केंद्र सरकार ने 64 फाइलों को सार्वजनिक किया। जिनमें बहुत कुछ छुपाया गया, क्योंकि कई तो दस्तावेज पहले ही मिटाए जा चुके थे। ये प्रमाण 1949 में सीआईडी, हावड़ा की फाइल में मिले हैं कि उनकी मृत्यु नहीं हुई थी। सरकार को आईबी की बाकी फाइलों को भी सावर्जनिक करना चाहिए।