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कचरे की गाड़ियों में लगाए जीपीएस, पर निगम अफसरों ने अपनी 250 गाड़ियों में नहीं लगवाए

निगम की करीब 250 गाड़ियों में अधिकारियों समेत तमाम प्रभारी चलते हैं।

bhaskar news | Last Modified - Jan 01, 2018, 05:30 AM IST

  • कचरे की गाड़ियों में लगाए जीपीएस, पर निगम अफसरों ने अपनी 250 गाड़ियों में नहीं लगवाए
    कुल 850 वाहन, कोटा सिर्फ अफसरों के लिए

    भोपाल.नगर निगम के अधिकारियों को निगरानी से परहेज है। कम से कम गाड़ियों में जीपीएस लगाने के मामले पर नजर डालें ताे यही जान पड़ता है। डीजल चोरी रोकने के लिए निगम अपनी गाड़ियों में जीपीएस लगा रहा है। मैदानी अमले की तमाम कचरा गाड़ियों समेत अन्य वाहनों में जीपीएस लगाने का काम पूरा हो चुका है। लेकिन, अधिकारियों की गाड़ियों में जीपीएस नहीं लग रहे हैं। जबकि, निगम की करीब 250 गाड़ियों में अधिकारियों समेत तमाम प्रभारी चलते हैं।


    दरअसल, बीते साल सितंबर में तत्कालीन निगम आयुक्त छवि भारद्वाज ने भारी तादाद में डीजल चोरी पकड़ी थी। उन्होंने निगम की तमाम गाड़ियों में जीपीएस लगान के निर्देश दिए थे। गाड़ियों में जीपीएस लगाने का काम सितंबर में ही शुरू किया गया था। इंक्यूबेट सॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से अब तक 543 वाहनों में जीपीएस लगाए जा चुके हैं। उक्त कंपनी के अधिकारियों की मानें तो जीपीएस लगाने का काम पूरा हाे चुका है। जब उनसे पूछा गया कि अधिकारियों की गाड़ियों में जीपीएस लग गए तो उनका साफ कहना था कि अभी उनकी गाड़ियों में जीपीएस लगाने संबंधी निर्देश नहीं दिए गए हैं।

    कोटा तय करके झाड़ रहे पल्ला
    डीजल घोटाला उजागर हुआ तब अपर आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों और प्रभारियों की गाड़ियों में भी डीजल की खपत को लेकर सवाल उठाए गए थे। ऐसे में अलग-अलग गाड़ियों के लिए निगम ने कोटा फिक्स कर दिया है। महीने में प्रत्येक गाड़ी के लिए डीजल देने की सीमा तय करके इसकी जानकारी डीजल टैंक प्रभारी को दी गई है। इससे अधिक डीजल अगर किसी अधिकारी और प्रभारी को अपनी गाड़ी में चाहिए तो उसे इसके लिए आयुक्त से अनुमति लेना होगी।

    रिकॉर्ड में मिला था अंतर
    छापामार कार्रवाई के बाद हुई जांच अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी अौर एमपी सिंह सहित कुछ एई और अन्य अधिकारियों की गाड़ियों में हर महीने बेपनाह डीजल खर्च होना पाया गया था। चतुर्वेदी की गाड़ी के इंडेंट पर किसी और गाड़ी में डीजल डाला जा रहा था। सिंह की गाड़ी में डुप्लीकेट इंडेंट मिले थे। इसके बाद दो ड्राइवरों को बर्खास्त कर दिया गया था।

    किसी ने निर्देश नहीं दिए
    करीब 550 गाड़ियाें में जीपीएस लगाने थे। 543 में लग चुके हैं, जो गाड़ियां अंडर मेंटेनेंस हैं वो ही बची हैं। अधिकारियों की गाड़ियों में जीपीएस लगाने के संबंध में किसी ने निर्देश ही नहीं दिए हैं।
    वीर सिंह अहिरवार, प्रोजेक्ट मैनेजर

    कचरा शिफ्टिंग के लिए बदलना होगा रूट

    आखिरकार आदमपुर छावनी में बनी नई खंती में कचरे की डंपिंग शुरू हो गई है। साल के आखिरी दिन यहां पांच डंपर कचरा डंप किया गया। इस कचरे को पुशर मशीन और जेसीबी की सहायता से अरेंज करने के बाद प्लास्टिक शीट से ढंक दिया जाएगा।
    आदमपुर छावनी में कचरे की डंपिंग की तैयारियां 28 दिसंबर को पूरी हो गई थी, लेकिन रात हो जाने से कचरा नहीं पहुंचाया जा सका था। अगले दिन ओडीएफ जांच की टीम आने से शुक्रवार और शनिवार को निगम अमला और अफसर व्यस्त हो गए। रविवार को भेल क्षेत्र के पांच डंपरों का कचरा यहां डंप किया गया। सिटी इंजीनियर ओपी भारद्वाज ने बताया कि अभी टेस्टिंग कर रहे हैं। सोमवार को यहां पुशर मशीनों से कचरे को ढांकने का काम होगा। अपर आयुक्त एमपी सिंह ने बताया कि अब आदमपुर छावनी में कचरे की डंपिंग शुरू करेंगे। इसके लिए हमें अपनी गाड़ियों के रूट बदलना होंगे।

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Web Title: Corporators Do Not Apply In Their 250 Trains
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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