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गांव की बेटियों ने पाई मल्टीनेशनल कंपनियाें में नौकरियां, बेचती थीं अगरबत्ती

पथरिया के किंद्राहो में समूह से जुड़कर बेटियों ने पाई मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी।

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 07:22 AM IST

दमोह. पथरिया के किंद्राहो में रहने वाली 20 बेटियों ने अहमदाबाद की मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी पाई है। यह वे बेटियों हैं जिन्होंने 8 वीं और 10 वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और कोई काम न होने की वजह से घर में बीड़ी बनाती थी, या फिर मजदूरी करती थीं। इनके जीवन में बदलाव लाने में मुख्य भूमिका निभाई है। मप्र डे ग्रामीण अजीविका मिशन ने। मिशन से गांव के समूह की 35 महिलाओं को पहले प्रशिक्षण दिया गया, इसके बाद उनकी बेटियों की काउंसलिंग करके उन्हें सागर में स्किल डबलपमेंट की ट्रेनिंग दिलाई गई।

ट्रेनिंग के बाद 20 बेटियों का अहमदाबाद की मल्टीनेशनल कंपनी ने जॉब फेयर में चयन किया और उन्होंने नौकरी पर बुला लिया। पिछले 6 माह से यह बेटियों अहमदाबाद में रहकर नौकरी कर रही हैं। उन्हें हर माह 15 हजार रुपए मिल रहे हैं। समूह की गेंदाबाई ने बताया कि उनकी बेटी प्रीति रैकवार 10 फेल होने के बाद घर में रहती थी। उसके पास कोई काम नहीं था। इसी तरह की स्थिति समूह की महिला सदस्य अशोक रानी की बेटी अरुणा राठौर की थी। उसने भी पढ़ाई छोड़ दी थी और घर में ही रहकर बीड़ी बनाने या फिर छोटा मोटा काम करती रहती थी। इसी तरह गांव की 20 बेटियां को समूह ने प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया और उन्हें सागर तीन माह का प्रशिक्षण दिलाने भेजा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें अहमदाबाद में नौकरी मिल गई। समूह की एक अन्य युवती अनुराधा ठाकुर ने प्रशिक्षण लेने के बाद दो माह अहमदाबाद में नौकरी की, उसके बाद उसे तुरंत इंदौर की एक कंपनी ने आॅफर किया, जिस पर उसने वहां से नौकरी छोड़कर इंदौर की कंपनी ज्वाइन कर ली।

महिलाएं अगरबत्ती बनाकर आसपास बेचने भेजती हैं
समूह की शशि ठाकुर ने बताया कि मिशन से जुड़ने के बाद गांव की तस्वीर बदल रही है। यहां पर ग्रामीण महिलाएं मिलकर अगरबत्ती बनाने का काम करती हैं। आसपास गांव में सप्लाई करने के लिए भी भेजी है। यहां पर तीन अगरबत्ती बनाने के प्लांट भी लग गए हैं। जिससे लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं जाती है। पथरिया के बीएम दिग्विजय सिंह और सहायक जिला प्रबंधक दिग्विजय पटेल ने बताया कि ब्लाक से 109युवतियों को स्किल डबलपमेंट की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। जिसमें से 92 ने नौकरी ज्वाइन कर ली है। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं के जीवन में स्वयं तो बदलाव आया ही है, साथ में उनके परिवार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।