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नुकसान उन उम्मीदवारों का जो परीक्षा नहीं दे पाए, लेकिन पेनाल्टी से फायदा पीईबी को

ऑनलाइन परीक्षाएं होने या न होने से नुकसान किसी का भी हो फायदा तो प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) को ही होना है।

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 06:00 AM IST
disadvantages of those candidates who did not take the exam

भोपाल. ऑनलाइन परीक्षाएं होने या न होने से नुकसान किसी का भी हो फायदा तो प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पीईबी) को ही होना है। तकनीकी खामी, कोई गड़बड़ी या लापरवाही से यदि ऑनलाइन परीक्षा रद्द होती है, तो प्रति छात्र के हिसाब से पीईबी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से प्रति छात्र 5 हजार रुपए के हिसाब से जुर्माना वसूलती है, लेकिन परीक्षा से वंचित होने के कारण परेशान होने वाले परीक्षार्थी को न तो इसका कोई हर्जाना दिया जाता है, न ही इस बात की कोई गारंटी कि उसे दोबारा परीक्षा में मौका मिल ही जाएगा।

- पीईबी की ऑनलाइन परीक्षा की अनुबंध शर्तों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि किसी तकनीकी खराबी या गड़बड़ी होने पर संबंधित कंपनी पर जुर्माना किया जाएगा, लेकिन परीक्षार्थियों को होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे हो सकेगी, इसके संबंध में कोई नीति या नियम स्पष्ट नहीं हैं।

- वहीं पीईबी के परीक्षा नियंत्रक एकेएस भदौरिया का कहना है कि किसी परीक्षा के दौरान टेक्निकल एरर, सर्वर जाम के कारण परीक्षा नहीं हो पाने पर सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पर पेनाल्टी लगाने का प्रावधान है।

- यह पेनाल्टी प्रोटोकॉल कमेटी तय करती है और पीईबी के पास यह जुर्माना राशि जमा करानी होती है, लेकिन परीक्षा से वंचित होने वाले या परीक्षा रद्द होने से परेशान होने वाले उम्मीदवारों को कंपनशिएट करने का कोई प्रावधान नहीं है।

तकनीकी खामी के कारण 62 हजार छात्र नहीं दे पाए परीक्षा
- पटवारी भर्ती परीक्षा के पहले दिन 9 दिसंबर को टीसीएस कंपनी के सर्वर में गडबड़ी के कारण 8 हजार उम्मीदवार परीक्षा नहीं दे पाए। इनकी परीक्षा स्थगित कर दी गई। अब इन्हें नए सिरे से परीक्षा केंद्र अलॉट कर एग्जाम डेट दी गई है।

- इसी तरह सितंबर माह में आरक्षक भर्ती परीक्षा में भी 54 हजार से अधिक उम्मीदवार यूएसटी ग्लोबल कंपनी का सर्वर अचानक जाम हो जाने के कारण परीक्षा नहीं दे सके थे। कुछ को दोबारा परीक्षा का मौका दिया गया था।

पीईबी को फायदा

- मैन्युअल की अपेक्षा ऑनलाइन परीक्षा का खर्च 50% से भी कम होता है। ऐसे में परीक्षार्थियों से जो शुल्क लिया जाता है, उसमें सीधे-सीधे तौर पर 50% पैसों की बचत हो जाती है। परीक्षा स्थगित होने या कोई गडबड़ी होने पर सारी जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की होती है, परीक्षा रद्द होने पर जुर्माना भी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी पर लगाया जाता है, लेकिन इस सारी व्यवस्था में बेरोजगार परीक्षार्थी नुकसान उठा रहे हैं।

कोर्ट से ले सकते हैं रेमेडी
- ऑनलाइन एग्जाम में टेक्निकल एरर पर पीईबी जो पेनाल्टी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से लेता है, वह अपनी रेपुटेशन को होने वाले नुकसान के लिए ले रहा है। टेक्निकल एरर से होने वाले नुकसान के लिए उम्मीदवार कोर्ट में रेमेडी क्लेम कर सकता है और इसके लिए लायबिलिटी पीईबी की होगी, न कि कंपनी की। इसलिए पीईबी को आगे से इस तरह की रेमेडी के लिए स्पष्ट नियम बनाना चाहिए।
- दीपेश जोशी, लीगल एक्सपर्ट

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