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840 करोड़ के एम्स में पांच साल बाद भी डॉक्टरों की कमी, अब रिटायर्ड डॉक्टरों की भर्ती की तैयारी

एक्सपर्ट्स का इंतजार- चुने गए 116 में से 36 डॉक्टरों ने नहीं दी ज्वाइनिंग, मांगा दो महीने का समय

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 07:18 AM IST
ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट अॉफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट अॉफ मेडिकल साइंसेस (एम्स)

भोपाल. राजधानी के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट अॉफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) को तैयार करने में केंद्र सरकार के 840 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। अस्पताल शुरू हुए पांच वर्ष बीतने के बावजूद यहां डॉक्टरों के सारे पद नहीं भरे जा सके हैं। भर्ती के लिए एम्स प्रबंधन ने दो बार विज्ञापन निकाले, लेकिन डॉक्टरों की भर्ती केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए चुनौती बनी हुई है।

ऐसे में मंत्रालय ने प्रमुख मेडिकल संस्थानों से रिटायर्ड हुए डॉक्टरों को यहां नियुक्त करने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था के तहत 70 साल तक की उम्र वाले रिटायर्ड डॉक्टरों को रखा जा सकता है। एम्स प्रबंधन ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले साल जोधपुर, भोपाल, पटना, रायपुर, भुवनेश्वर और ऋषिकेश एम्स के लिए 1,300 पदों के लिए विज्ञापन दिया था। इनमें सिर्फ 300 का चयन हुआ और 200 डॉक्टरों ने ज्वाइनिंग दी। भोपाल एम्स के लिए 291 पदों के लिए आवेदन निकाले गए थे। इनके लिए 116 को सिलेक्ट किया गया। इनमें से अभी तक 80 डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया है।

....इधर पेंशन के फैसले का इंतजार
जीएमसी में कार्डियोलॉजी प्रोफेसर डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि जीएमसी में 28 साल की नौकरी हो चुकी है। यहां सेवा शर्तों में पेंशन भी शामिल है। एम्स में आवेदन किया था लेकिन जीएमसी में दी गई सेवाओं पर पेंशन मिलने का फैसला आने का इंतजार कर रहा हूं। हमीदिया में आने वाले गरीब मरीजों को रोजाना इलाज की जरूरत पड़ती है। इसलिए अभी यहां से नौकरी नहीं छोड़ी है।

एम्स में आमद नहीं देने वाले डॉक्टर्स के तर्क

- एम्स में आने के बाद निजी प्रैक्टिस बंद हो जाएगी।
- भोपाल से अच्छे विकल्प अन्य शहरों के निजी अस्पतालों में।
- प्राइवेट में प्रैक्टिस के साथ-साथ पैसा भी ज्यादा है।

एक कारण यह भी... जीएमसी में सुपर स्पेशिएलिटी कोर्स लाना
गांधी मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अरुण भटनागर का सिलेक्शन एम्स में सीधी भर्ती से प्रोफेसर पद पर हुआ है। लेकिन उन्होंने अब तक एम्स में अपनी आमद दर्ज नहीं कराई है। प्रोफेसर भटनागर का तर्क है कि मप्र के एक भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्लास्टिक सर्जरी एंड बर्न डिपार्टमेंट नहीं है। जीएमसी में इस डिपार्टमेंट का गठन व्यक्तिगत कोशिशों से कराया है। इस डिपार्टमेंट में जल्द ही सुपर स्पेशिएलिटी कोर्स शुरू होना है। एम्स ज्वाइन करने पर एमसीआई इस कोर्स के लिए मान्यता देगी या नहीं, इस पर संशय है। इसलिए एम्स में डेपुटेशन पर ज्वाइन करने की कोशिश कर रहा हूं। एम्स से भी ज्वाइनिंग के लिए समय मांगा है।

रिटायर्ड डॉक्टरों की सेवाएं लेंगे
एम्स भोपाल में 116 डॉक्टर्स के अपॉइंटमेंट लेटर जारी किए थे। इनमें से ज्यादातर ने ज्वाइन कर लिया है। शेष डॉक्टर्स ने ज्वाइनिंग के लिए समय मांगा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टर्स कमी दूर करने के लिए रिटायर्ड डॉक्टर रखने के लिए कहा है। डॉ. नितिन एम नागरकर, डायरेक्टर, एम्स

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