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बैंक अफसर बनने की ख्वाहिश लिए विदा हुआ बेटा, मां ने कहा- 10 लोगों में रहेगा जिंदा

Bhaskar News | Last Modified - Dec 30, 2017, 07:40 AM IST

रोड एक्सीडेंट में 20 साल का शशांक घायल हो गया था जिसके 9 दिन इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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    .19 दिसंबर को रोड एक्सीडेंट में 20 साल का शशांक कोरान्ने घायल हो गया था।

    भोपाल.19 दिसंबर को रोड एक्सीडेंट में 20 साल का शशांक कोरान्ने घायल हो गया था। 9 दिन तक इलाज चला। 27 दिसंबर को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। सही वक्त पर माता-पिता ने बेटे के ऑर्गन डोनेशन का डिसीजन लिया। इसके बाद शशांक का हार्ट, दोनों किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा रिट्रीव की गई। भोपाल में शुक्रवार को पहली बार हार्ट के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर इसे मुंबई भेजा गया। इस परिवार के एक रिलेटिव ने बताया कि अब तक कोरान्ने परिवार 10 से ज्यादा लोगों की लाइफ बचा चुका है ।मां ने बताई ये स्टोरी...

    - शशांक की मां, ममता कोरान्ने ने दैनिक भास्कर को बताया कि, दो बेटे हैं। शशांक बड़ा था। वो बीस साल का था। बीकॉम ऑनर्स में लास्ट ईयर का स्टूडेंट था। पिता राजेश एसबीआई में ब्रांच मैनेजर हैं।

    - शशांक उन्हीं की तरह बैंक अफसर बनना चाहता था। आखिरी पेपर देने जा रहा था तभी हादसा हो गया। डॉक्टरों ने दो दिन पहले उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। हम निराश हो चुके थे।

    - पहले सोचा ईश्वर ने दिया था, उसी ने ले लिया। बाद में ख्याल आया दूसरों में भी तो जिंदा रह सकता है बेटा। हम जानते थे कि ऑर्गन किसी जरूरतमंद की जान बचा सकते हैं।

    - फिर शशांक के पिता और मैंने ऑर्गन डोनेशन का डिसीजन लिया। ट्रांसप्लांट को-ऑर्डिनेटर के मुताबिक, शशांक की आंखें चार लोगों को नई रोशनी देंगी।

    - शुक्रवार को शशांक का हार्ट एयर एंबुलेंस से मुंबई भेजा गया। बंसल अस्पताल में लिवर और एक किडनी का ट्रांसप्लांट हुआ। दूसरी किडनी इंदौर भेजी गई।

    - कार्निया और स्किन भी सुरक्षित हैं, जो किसी जरूरतमंद को लगेंगे। हार्ट, लिवर, त्वचा और किडनियों से छह लोगों को दूसरा जीवन मिलेगा।

    - शशांक की जीवन ज्योति भले ही बुझी हो मगर वह अपनी देह के हिस्सों से 10 जरूरतमंदों में धड़केगा।

    नासिक में 10 से ज्यादा लोगों की जिंदगी बचा चुका है कोरान्ने परिवार

    - नासिक से आए काेरान्ने परिवार के एक संबंधी ने बताया कि 2010-11 में उनके जीजा की किडनी खराब हो गई थी। ट्रांसप्लांट जरूरी था। देशभर में डोनर की तलाश की। लेकिन कोई नहीं मिला।

    - आखिर मां ने उन्हें किडनी दी। हमें तब पता चला कि ऑर्गन की क्या अहमियत है। इसके बाद ट्रांसप्लांट के बारे में खोजबीन की।

    - कोरान्ने परिवार अब तक नासिक में 10 से ज्यादा लोगों की जिंदगी ऑर्गन डोनेशन कराकर बचा चुका है। खुद उन्होंने बॉडी डोनेट करने का फार्म भरा है।

    पहले भोपाल, फिर प्रदेश में खोजा गया मरीज
    - कोरान्ने परिवार के फैसले के बाद भोपाल में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मरीज की तलाश की गई। इसके बाद नोटो के यहां रजिस्टर्ड मरीजों में प्रदेश में किसी जरूरतमंद की तलाश हुई। अंतत: रोटो मुंबई से संपर्क में पता चला कि फोर्टिस मुंबई में एक मरीज को हार्ट की जरूरत है।

    - अंकों के आधार पर उसे सिलेक्ट किया गया। इसके बाद एयरएंबुलेंस से टीम भोपाल पहुंची। शशांक की डेड बॉडी परिजनों को सौंपने के पहले एक सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। पहली बार होगा पुलिस का बैंड अंतिम विदाई के समय बजाया जाएगा।

    रिट्रीव में दिक्कत न हो इसलिए रात दिन टच में थे नोटो से बात की
    - अंगों को रिट्रीव करने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसलिए प्रशासन के अफसर अस्पताल और जीएमसी के टच में थे। नोटो से भी इस बारे में बात की गई। कॉरीडोर के जरिए हार्ट को मुंबई भेजा गया। एंबुलेंस के जरिए किडनी इंदौर भेजी गई।

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    9 दिन तक इलाज चला। 27 दिसंबर को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
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    शहर में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। य़
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    पूरे शहर का ट्रैफिक रोक दिया गया था।
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    शशांक बीकॉम ऑनर्स में लास्ट ईयर का स्टूडेंट था। पिता राजेश एसबीआई में ब्रांच मैनेजर हैं।
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    शंशाक की फैमिली।
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Web Title: Doctors Declared Brain Dead, Family Decide To Donate Organ
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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