भोपाल

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ऐसा स्कूल, जहां नंबर और क्लास बंक के डर के बिना दी जाती है EDUCATION

भोपाल की संस्था आरुषि ने ली ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल पहुंचाने की जिम्मेदारी।

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:18 PM IST
आरुषि संस्था में बच्चों को अलग तरह से दी जा रही है तालीम। आरुषि संस्था में बच्चों को अलग तरह से दी जा रही है तालीम।

भोपाल। इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को नंबर की कोई चिंता नहीं होती और न ही क्लास बंक करने का कोई डर। बस फ्री होकर उन्हें पढ़ाई करनी है, खेलना, कूदना है। ऐसा स्कूल भोपाल में आरुषि संस्था ने 'तालीम' नाम से शुरू किया है। यहां पर ड्राप आउट बच्चों को लाया जा रहा है। और उन्हें फ्री एजुकेशन दी जा रही है।

- ये ऐसे बच्चे हैं, जो आर्थिक तंगी के कारण कई बार स्कूल से दूर हो जाते हैं। ऐसे बच्चों की एक बड़ी संख्या है, जो स्कूल जाना तो चाहती है, लेकिन विवश है स्कूल जाने के समय में काम पर जाना पड़ेगा। क्योंकि उन्हें मजदूरी करनी पड़ी

-पढ़ाई बीच में छोड़ देने वाले ऐसे ही बच्चों के लिए भोपाल की संस्था ‘आरुषि’ ने शहर से महज 13 किमी दूर एक अनोखा स्कूल ‘तालीम’ शुरू किया है। इस स्कूल में बच्चों को डेमोक्रेटिक स्कूल कॉन्सेप्ट के तहत चीजों को सीखने की छूट दी गई है।

गुलजार ने दिया नाम... तालीम

-आरुषि के वॉलेंटियर अनिल मुदगल ने बताया, यह एक ऐसा स्कूल है, जहां बच्चों को उनकी समझ के अनुसार चीजें सीखने की आजादी है।

-स्वतंत्रता है शिक्षा को अपने हिसाब से बिना क्लास और नंबरों के भय के ग्रहण करने की। इस स्कूल के कॉन्सेप्ट और बच्चों के स्टडी मटेरियल पर काम करते हुए, जब हमने इसकी चर्चा गीतकार गुलजार से की, तो उन्होंने ही इस स्कूल को तालीम नाम दिया।

-उन्होंने बताया कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से एग्जाम भी दिलवाएंगे, ताकि वे दोबारा पढ़ाई शुरू कर सकें।

-वहीं इन बच्चों को संस्था की ओर से ऐसे कोर्स व ट्रेनिंग भी दी जाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार को सपोर्ट कर पाएं।
टाटा इंस्टीट्यूट के वालंटियर
-इस स्कूल में अब करीब 70 बच्चे आने लगे हैं। इन बच्चों को मजेदार ढंग से पढ़ाने के लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस के दो स्टूडेंट्स अपनी वॉलेंटियर सर्विस दे रहे हैं।

-पिछले दिनों आरुषि के बच्चों से मिलने पहुंचे सिनेमेटोग्राफर जीशान ने इन ड्रॉप आउट बच्चों के साथ समय बिताया और इनके खूबसूरत फोटोग्राफ्स भी क्लिक किए।

ऐसे होती है पढ़ाई...
- प्रार्थना की जगह ढोल-ढमाकों से होती है शुरुआत
- अलग-अलग विषयों की कहानी, किस्सों और गीतों से होती है पढ़ाई।
- क्लास नहीं अपने इंट्रेस्टिंग सब्जेक्ट के हिसाब पढ़ते हैं बच्चे।


क्या है आरुषि संस्था...
-भोपाल में संचालित होने वाली आरुषि संस्था दिव्यांग बच्चों के रिहैबिलिटेशन के लिए काम करती है। इस संस्था से लंबे से कई सेलीब्रिटी वालंटियर के तौर पर जुड़े रहे हैं। इनमें प्रमुख रूप से गीतकार, फिल्म निर्देशक गुलजार, फिल्म डायरेक्टर विशाल भारद्वाज, सिंगर रेखा भारद्वाज, एक्टर यशपाल शर्मा और बॉलीवुड सिनेमेटोग्राफर जीशान आदि शामिल हैं।

यहां पर बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलकूद व पढ़ाई का मौका मिलता है। यहां पर बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलकूद व पढ़ाई का मौका मिलता है।
यहां पर ड्राप आउट बच्चों को लाकर उन्हें एजुकेट किया जा रहा है। यहां पर ड्राप आउट बच्चों को लाकर उन्हें एजुकेट किया जा रहा है।
बच्चों को खुला वातावरण देने की कोशिश है। बच्चों को खुला वातावरण देने की कोशिश है।
बच्चे आरुषि में पढ़ाई के साथ ही खेलकूद का पूरा लुत्फ उठाते हैं। बच्चे आरुषि में पढ़ाई के साथ ही खेलकूद का पूरा लुत्फ उठाते हैं।
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आरुषि संस्था में बच्चों को अलग तरह से दी जा रही है तालीम।आरुषि संस्था में बच्चों को अलग तरह से दी जा रही है तालीम।
यहां पर बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलकूद व पढ़ाई का मौका मिलता है।यहां पर बच्चों को एक-दूसरे के साथ मिलकर खेलकूद व पढ़ाई का मौका मिलता है।
यहां पर ड्राप आउट बच्चों को लाकर उन्हें एजुकेट किया जा रहा है।यहां पर ड्राप आउट बच्चों को लाकर उन्हें एजुकेट किया जा रहा है।
बच्चों को खुला वातावरण देने की कोशिश है।बच्चों को खुला वातावरण देने की कोशिश है।
बच्चे आरुषि में पढ़ाई के साथ ही खेलकूद का पूरा लुत्फ उठाते हैं।बच्चे आरुषि में पढ़ाई के साथ ही खेलकूद का पूरा लुत्फ उठाते हैं।
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