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ड्यूटी के दौरान रोड एक्सीडेंट में हुई थी मौत, बैचमेट्स ने फैमिली की ऐसे की हेल्प

बैचमेट एकजुट हुए और छह दिनों के अंदर मुकेश की फैमिली को 5.50 लाख रुपए कलेक्ट कर दिए।

Danik Bhaskar | Jan 08, 2018, 02:25 AM IST
2007 बैच के सब इंस्पेक्टर मुकेश और उनकी वाइफ ऋतु। 2007 बैच के सब इंस्पेक्टर मुकेश और उनकी वाइफ ऋतु।

भोपाल . कहते हैं जेबें तो भर ही जाएंगी असल कमाई तो तब है जब परेशानी में लोग आपके साथ खड़े हों। कुछ ऐसा ही कर गए हैं जिला डिंडोरी के करंजिया पुलिस स्टेशन पोस्टेड टीआई मुकेश पंद्रे। एक जनवरी को ड्यूटी के दौरान रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई। इसके बाद बैचमेट एकजुट हुए और छह दिनों के अंदर उनकी फैमिली को 5.50 लाख रुपए कलेक्ट कर दिए। 2007 में सब इंस्पेक्टर के तौर पर हुई थी पोस्टिंग

- साल 2007 बैच के सब इंस्पेक्टर मुकेश एक क्रिमनल की तलाश में मंडला गए थे। लौटते समय उन्होंने अपनी बाइक सड़क किनारे खड़ी कर और उतरकर जैकेट की चेन लगाने लगे। तभी पीछे से आए पिकअप गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी। इस हादसे में स्पॉट पर ही मौत हो गई। घर में उनकी वाइफ ऋतु और सात साल का बेटा है।

- वे मंडला जिले के रहने वाले थे। उनके पिता भी इन दिनों मंडला में कॉन्स्टेबल हैं। मुकेश के मौत के बाद वे गवर्नमेंट से हेल्प और ऋतु को अनुकंपा में पोस्टिंग कराने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

- इस हादसे की खबर जब मुकेश के बैचमेट्स को मिली तो उन्होंने फैमिली की फाइनेंशियल हेल्प करना शुरू कर दी। वाट्सएप ग्रुप पर चले मैसेज पर धीरे धीरे 156 लोगों ने मुकेश की वाइफ ऋतु के बैंक अकाउंट में डिपोजिट कर दिए।

- इस मुहिम को शुरु करने वाले शाहपुर टीआई राजेंद्र ध्रुवे ने बताया कि बैच का मेंबर जहां भी पदस्थ है, वहां से मदद कर रहा है। अब तक 5.50 लाख रुपए जुटाए जा चुके हैं।
- बैच के कप्तान रहे टीआई अन्नपूर्णा, इंदौर बीएल मंडलोई ने बताया कि मुकेश के फैमिली के लिए जनता के कुछ मेंबर आगे भी आए हैं।

- अब बैचमेट्स मिलकर एक कोऑपरेटिव काउंसिल का भी गठन कर रहे हैं। इसमें हर बैचमेट के अकाउंट से एक हजार रुपए महीना काउंसिल के एकाउंट में ट्रांसफर होंगे। ये रुपए बैचमेट्स और उनकी फैमिली की हेल्प पर खर्च की जाएगी।

यह अहसास हुआ कि पति ने रिश्ते बहुत कमाए थे...

- मुकेश की वाइफ ऋतु के मुताबिक, मेरे भइया भी इसी बैच के सब इंस्पेक्टर हैं। पुलिस फैमिली से जुड़े होने के कारण अंदाजा है कि पुलिस की ड्यूटी कितनी टफ रहती है। शायद ये पहला मौका है, जब अपने किसी पुलिसकर्मी के लिए बैचमेट्स मिलकर इस तरह से भी हेल्प कर रहे हैं। इन रुपए से मेरे पति की कमी तो कभी पूरी नहीं हो सकती, ये जरूर यकीन हो गया है कि मुकेश ने रिश्ते बहुत कमाए थे।

अपने ऑफिस कर्मियों के साथ इंसपेक्टर मुखेश । अपने ऑफिस कर्मियों के साथ इंसपेक्टर मुखेश ।
मुकेश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। मुकेश की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी।
अपनी माता के साथ सब इंस्पेक्टर मुकेश। अपनी माता के साथ सब इंस्पेक्टर मुकेश।
अपने पिता के साथ मुकेश। अपने पिता के साथ मुकेश।
मुकेश पिंद्रे। मुकेश पिंद्रे।