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ये इंजीनियर लड़की बनी साध्वी, 48 दिन तक रही साधु बनकर फिर इसलिए लिया ये फैसला

29 साल की लड़की ने ली दीक्षा, 5 घोड़ों के रथ पर जुलुस निकाला।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 14, 2018, 12:46 AM IST

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    आष्टा की 29 वर्षीय भावना ने ली दीक्षा।

    आष्टा. इंजीनियरिंग की स्टूडेंट ने आम जीवन को त्यागकर वैराग्य पर चलने का फैसला लिया है। आज लड़की का जुलुस 5 घोड़ों की बग्घी पर निकाल गया जिसमें कि शहर के काफी लोग शामिल हुए थे। दैनिक भास्कर से बात करने के दौरान साध्वी बनने जा रही भावना ने बताया कि मैंने 2006 से 2010 तक उज्जैन के शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। कंप्यूटर साइंस ब्रांच में 24 साल की आयु में बीई की डिग्री लेने के बाद आष्टा के प्राइवेट कॉलेज में तीन साल तक असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर नौकरी भी की थी। पढ़ाई के दौरान मेरे अंदर साध्वी बनने की इच्छा जागी थी। फैमिली को ऐसे मनाया...

    - भावना ने बताया कि इच्छा पैदा होने के बाद मैं आष्टा में पद्यमालता श्रीजी के संपर्क में आई और उनसे प्रश्न किया कि क्या मैं आपकी तरह बन सकती हूं। उन्होंने कहा इसके लिए कठिन नियम का पालन जरूरी है।

    - यहीं से मैंने मोक्ष के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इसके बाद मैंने परिवार को भी मनाया तो वह भी मान गए कि हमारी बेटी पक्की है वह कर सकती है।

    - दीक्षा से पहले उपध्यान तप होता है उसमें 48 दिन तक साधु की तरह रहना पड़ता है। इस तप को करने के बाद मुझे लगा कि मैं कर सकती हूं।

    - इसके बाद चार दिवसीय दीक्षा महोत्सव आयोजित किया गया। अब मैं वैराग्य के पथ पर निकल गई हूं।

    वैराग्य के पथ पर निकलीं भावना

    - सांसारिक मार्ग का त्याग कर वैराग्य के पथ पर निकली इंजीनियर भावना धाड़ीवाल के चार दिवसीय दीक्षा महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को वर्षी-दान वरघोड़ा जुलूस निकला।

    - इसमें सभी समाज और राजनीतिक संगठनों के लोग शामिल हुए। जगह-जगह भावना का स्वागत किया गया। स्थिति यह थी कि साढ़े तीन किमी दूरी तय करने में जुलूस को साढ़े पांच घंटे लग गए।

    - इस दौरान हाथी, बग्घी और बैंडबाजों के साथ निकले जुलूस में लोग नृत्य करते हुए चल रहे थे। दीक्षा के बाद अंतिम दिन परिवारजन की आंखें नम थीं। इस तरह का यह पहला मामला है।

    - इंजीनियर भावना का चार दिवसीय दीक्षा महोत्सव मानस भवन में विधि विधान के साथ गच्छाधिपति आचार्य भगवंत दौलत सागर सूरीश्वर मसा, आचार्य भगवंत नंदीवर्धन सागर सूरीश्वरजी, आचार्य भगवंत हर्षवर्धन सागर सहित 40 साधुओं और साध्वी भगवंत आदिठाणा की उपस्थिति में रविवार को शुरू हुआ था।

    ऐसा रहा अब तक का जीवन

    नाम : भावना धाड़ीवाल
    पिता का नाम : वीरेंद्र कुमार धाड़ीवाल
    माता का नाम : कुसुम धाड़ीवाल
    जन्म : 28 जनवरी 1987
    जन्म स्थान : आष्टा
    शैक्षणिक योग्यता : हायर सेकंडरी तक आष्टा में
    उच्च शिक्षा : कंप्यूटर साइंस में बीई, शासकीय महाविद्यालय उज्जैन
    नौकरी : कलावती कॉलेज आष्टा में तीन साल व्याख्याता रहीं।

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    भावना का वरघोड़ा जुलूस निकला।
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    5 घोड़ों के रथ पर सवार थी भावना।
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    भावना को दुल्हन की तरह सजाया गया था।
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    जुलुस में काफी लोग शामिल हुए थे।
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    भावना कंप्यूटर साइंस में बीई हैं।
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    कलावती कॉलेज आष्टा में तीन साल व्याख्याता रहीं थीं भावना।
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Web Title: Engineer Girl Became Sadhvi
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