भोपाल

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एक्सप्रेस हो गई भोपाल-इंदौर पैसेंजर, किराया भी दोगुना, न स्पीड बढ़ाई और न ही हॉल्ट कम किए

रेलवे ने इंदौर-भोपाल पैसेंजर ट्रेन को अपग्रेड कर एक्सप्रेस का दर्जा दे दिया।

Danik Bhaskar

Dec 27, 2017, 05:27 AM IST

भोपाल. रेलवे ने इंदौर-भोपाल पैसेंजर ट्रेन को अपग्रेड कर एक्सप्रेस का दर्जा दे दिया। साथ ही इसका किराया भी लगभग दोगुना कर दिया है, लेकिन न तो ट्रेन की स्पीड बढ़ी और न ही इसके हॉल्ट ही कम किए गए। यानी ट्रेन अब भी एक्सप्रेस का तमगा लिए पैसेंजर की ही चाल चल रही है। हां इतना जरूर हुआ है कि ट्रेन के जो पुराने हॉल्ट थे उनके समय में मामूली कमी कर दी गई है। बावजूद इसके ट्रेन इंदौर से भोपाल के बीच 263 किमी का सफर 5 घंटे 40 मिनट में ही तय कर पा रही है। अगर यह ट्रेन दूसरी एक्सप्रेस ट्रेनों की स्पीड से चले तो एक से डेढ़ घंटे कम समय में भोपाल/इंदौर पहुंच सकती है।

- गौरतलब है कि रेलवे ने 4 अगस्त से इंदौर-भोपाल पैसेंजर को एक्सप्रेस का दर्जा दिया है। ये ट्रेन पहले संख्या 59389/59390 से चलती थी। जो अब एक्सप्रेस हेने के बाद ट्रेन संख्या 19303/19304 से चल रही है, लेकिन ट्रेन के आने-जाने में चार माह बाद भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यह ट्रेन भोपाल से रात को 10.25 बजे रवाना होकर सुबह 4.35 बजे इंदौर पहुंचती है। इसी तरह इंदौर से रात में 11.45 बजे चलकर सुबह 5.20 बजे भोपाल पहुंचती है।

पैसेंजर ट्रेन के पैरामीटर

- पैसेंजर ट्रेनों के हॉल्ट ज्यादा होते हैं। वे हर छोटे स्टेशन पर रुकती हैंै।
- पैसेंजर ट्रेन की स्पीड 100 किमी प्रति घंटे रहती है।
- रेलवे के तकनीकी स्टाफ के लिए पैसेंजर ट्रेन को रोकने की व्यवस्था रहती है।
- पैसेंजर ट्रेन उज्जैन से भोपाल आने में 4.30 घंटे लेती है।

उदासीनता... पहले ही बंद हो चुकी डबल डेकर ट्रेन

- रेलवे ने तीन साल पहले सितंबर 2013 में इंदौर-भोपाल के लिए डबल डेकर चलाई थी। इस ट्रेन को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह था, लेकिन रेलवे ने इसका किराया हबीबगंज स्टेशन तक 395 रुपए और भोपाल जंक्शन तक का 445 प्रति सीट तय किया था।

- यह 3 घंटे की बजाय चार से साढ़े चार घंटे में इंदौर पहुंच रही थी। इससे कम समय और कम किराए में वॉल्वो बसें इंदौर-भोपाल की दूरी तय करती हैं। इन्हीं कारणों से 2014 में डबल डेकर को बंद कर दिया गया।

किराया तो बढ़ा दिया, लेकिन यात्री सुविधा तो बढ़ाई ही नहीं
- रेलवे ने भोपाल-इंदौर ट्रेन को पैसेंजर से एक्सप्रेस करने में केवल कमाई का ध्यान रखा। नाम बदलने से किराया तो बढ़ गया, लेकिन ट्रेन में हॉल्ट पहले जैसे ही हैं। सिर्फ हॉल्ट 5 मिनट से घटाकर 3 से 2 मिनट किए गए हैं। एक्सप्रेस होने से किराया कई गुना बढ़ गया। न ट्रेक बदला और न ही कोई यात्री सुविधा बढ़ाई गई, लेकिन किराए की मार अलग से पड़ गई। एक्सप्रेस ट्रेन के स्टॉपेज कम होना चाहिए।
- निरंजन वाधवानी, सदस्य, रेलवे सलाहकार समिति

जल्द कम होंगे हॉल्ट
इंदौर-भोपाल पैसेंजर को हमने एक्सप्रेस में अपग्रेड किया है। प्रक्रिया चल रही है, बहुत जल्दी एक्सप्रेस जैसी सुविधाएं मिलने लगेंगी। हॉल्ट भी कम होंगे और समय भी कम लगेगा।
जितेंद्र कुमार जयंत, वरिष्ठ पीआरओ, रतलाम रेल मंडल

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