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जांच के नाम पर फर्जी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट, अब ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी

फर्जी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मामले में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। कम से कम जांच की रफ्तार को देखकर तो यही लग

Dainik Bhaskar

Dec 29, 2017, 06:51 AM IST
False Compliment Certificate on the name of inquiry

भोपाल. फर्जी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट मामले में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। कम से कम जांच की रफ्तार को देखकर तो यही लगता है। मामला उजागर हुए एक महीना होने जा रहा है, लेकिन अभी तक तक दो जोन की जांच ही हो पाई है। उस पर भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अभी तय होना है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि बाकी 17 जोनों में जारी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की जांच में तो महीनों लग जाएंगे।

- पांच दिसंबर की परिषद बैठक में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बिल्डिंग परमिशन शाखा ने बिल्डरों के साथ सांठगांठ करके उन्हें गलत तरीके से सर्टिफिकेट जारी किए। बिल्डरों ने रेरा में पंजीयन कराने से बचने के लिए मोटी रकम देकर ये सर्टिफिकेट लिए। मामला उजागर होने पर महापौर आलोक शर्मा ने निगम आयुक्त प्रियंका दास को जांच के आदेश दिए थे।

- आयुक्त ने दो पार्षदों सहित निगम के एई की दो जांच कमेटी बनाईं। इन कमेटियों ने जोन 18 और 19 की जांच करके मंगलवार को रिपोर्ट आयुक्त को सौंप दी है। लेकिन, जिम्मेदार शेष जोनों में जारी हुए सर्टिफिकेट की जांच नहीं करा रहे हैं। जब तक दो जोन की जांच रिपोर्ट का परीक्षण हो तब तक कमेटी से अन्य जोन की भी जांच कराई जा सकती है, लेकिन इसको लेकर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

सिर्फ हुजूर विधानसभा के मामलों की हुई जांच
- जांच की शुरुआत जोन 18 और 19 से की गई। इन दोनों जोन में कुल 38 सर्टिफिकेट जारी हुए थे। ये दोनों ही जोन हुजूर विधानसभा के हैं। इसके अलावा सबसे ज्यादा सर्टिफिकेट जोन 13 में 39, 14 में 12 15 में 25 और 16 में 10 जारी हुए थे। ये सभी जोन गोविंदपुरा विधानसभा में आते हैं। लेकिन, निगम ने अभी तक इन जोनों की जांच शुरू नहीं की है।

अपर आयुक्त तक की होती है जिम्मेदारी
- एसई साइट का निरीक्षण कर रिपोर्ट एई को देता है। एई रिपोर्ट ड्राफ्टमैन को देता है। रिपोर्ट ओके हैं तो एई इसे सिटी प्लानर को भेजता है। सिटी प्लानर इसे प्रभारी अपर आयुक्त को भेजता है। अपर आयुक्त नोटशीट पर स्वीकृति देते हैं ।

सर्टिफिकेट जारी करने वाले अब भी बिल्डिंग परमिशन शाखा में कार्यरत
- जिन इंजीनियरों ने ये सर्टिफिकेट जारी किए उनमें से दो असिस्टेंट इंजीनियर लालजी सिंह चौहान और बीपीएस कुशवाह अब तक बिल्डिंग परमिशन में जमे हैं। जबकि महापौर ने सभी को हटाकर जांच कराने को कहा था। जिस अवधि में ये सर्टिफिकेट जारी हुए तब जोन 13, 14, 18 और 19 में सब इंजीनियर बीपीएस त्रिपाठी और एई लालजी व अनिल साहनी थे।

- जोन 15 और 16 में सब इंजीनियर जीएल चौधरी, एई बीपीएस कुशवाह, लालजी सिंह चौहान, अनिल साहनी, संजय तिवारी और बीपीएस कुशवाह थे। इन जोनों के सिटी प्लानर की जिम्मेदारी जीएस सलूजा की थी। जबकि प्रभारी अपर आयुक्त मलिका निगम नागर थीं। इसके साथ ही पांच सर्टिफिकेट चीफ सिटी प्लानर शुभाशीष बैनर्जी ने जारी किए हैं। 20 सर्टिफिकेट अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी के कार्यकाल में भी जारी हुए हैं।

- कमेटी ने स्पष्ट जांच रिपोर्ट दी है। अनियमितताएं मिली हैं। एमआईसी के माध्यम से परिषद के पटल से कार्रवाई तय होगी। परिषद से जोन 18 आैर 19 की जांच की बात कही गई थी। इसलिए उन्हीं की जांच कराई गई है।
प्रियंका दास, आयुक्त नगर निगम

- दो जोनों की जांच में फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। ऐसे में परिषद का बहाना करके बैठना ठीक नहीं। आयुक्त चाहें तो शेष जोनों में जारी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की विभागीय जांच करवा सकती हैं।
गिरीश शर्मा, पार्षद एवं जांच कमेटी मेंबर

कहां कितने जारी हुए सर्टिफिकेट विधानसभा कम्प्लीशन सर्टिफिकेट

- गोविंदपुरा 86
- हुजूर 39
- नरेला 02
- मध्य 01
- दक्षिण-पश्चिम 01
- उत्तर 01
किस जोन की क्या स्थिति
जोन सर्टिफिकेट की संख्या
13 39
14 12
15 25
16 10
18 10
19 28
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