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आग के बीच फंसी थी पूरी फैमिली, तब सुपरमैन बनकर आया ये शख्स

अशोकनगर में भीषण आग के बीच पुलिसवाले ने बहादुरी दिखाते हुए एक ही फैमिली के चार लोगों जान बचाई।

Mukesh Mishra | Last Modified - Dec 29, 2017, 04:03 PM IST

भोपाल।एक पुलिसवाले ने सुपरमैन की तरह बहादुरी दिखाते हुए भीषण आग में फंसे एक ही फैमिली के चार लोगों की जिंदगी जान पर खेलकर बचा ली। गुरुवार को देर रात पुलिसवाले के पड़ोसी के घर में भीषण आग लग गई थी। इस परिवार के कुछ सदस्य मामूली रूप से जल गए। आग से सुरक्षित बचे लोग और घटना के चश्मदीद सभी ने पुलिसकर्मी की बहादुरी की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए। आग से संपत्ति को करीब 50 लाख रुपये के नुकसान होने की बात कही जा रही है।

-गुरुवार की देर रात करीब दो बजे मनोज प्रजापति के तीन मंजिला मकान में आग लग गई। आग मकान के भूतल में सिलेंडर से लगी थी, जो धीरे-धीरे ऊपर की दोनों मंजिल तक पहुंच गई। पहली दो मंजिल में रहने वाले किरायेदार आग से बचकर निकलने में कामयाब रहे। लेकिन इमारत की तीसरी मंजिल में रहनेवाले प्रजापति परिवार के चार सदस्य आग में फंस गए जिनमें मनोज के पिता, उनकी पत्नी और दो बच्चे शामिल थे।

ऐसे जान पर खेल गया पुलिस वाला
- करीब 11 एजेंसियों का काम करने वाले मनोज प्रजापति का एफसीआई के पीछे मकान है। जिस रात अाग लगी, मनोज इंदौर गए थे तो उनके मकान में दो किराएदारों के अलावा तीसरी मंजिल पर पत्नी ज्योति, पिता इमरतलाल प्रजापति सहित पुत्र मयंक 9 साल और 6 साल की बेटी थी। मनोज के पिता ने बताया कि करीब ढाई बजे तक उनकी नींद खुली तो चारों तरफ धुंआ था और ऊपर की तरफ आग की लपटें उठ रही थीं। तत्काल उन्होंने जिस कमरे में बहु और पोते सो रहे थे उनको मकान के पिछली तरफ ले आए।

आग की लपटों के बीच बनाया झूला
- आग की लपटों को देखकर पड़ोस में रहने वाले पुलिसकर्मी अतेन्द्र यादव ने अपने मकान मालिक के यहां से रस्सी का झूला लेकर मकान के पिछली साइड तीसरी मंजिल पर खड़े इमरतलाल को बांधने के लिए कहा। इसकी मदद से परिवार के सदस्यों ने उतरकर अपनी जान बचाई। परिवार को मुश्किलों में घिरा देख उनके पड़ोसी अत्येंद्र यादव मदद को आगे आए। उन्होंने रस्सी की सीढ़ी बनाकर उसे तीसरी मंजिल की खिड़की पर फेंका। खिड़की पर मजबूती से बांधकर परिवार के सदस्यों से एक-एक कर बाहर निकालने को कहा।

- अत्येंद्र यादव रस्सी की सीढ़ी के जरिए खुद तीसरी मंजिल तक चढ़ गए और इमारत से एक बच्चे को बाहर निकाला। इसके बाद मनोज के पिता ने अपना साहस बटोरा और दूसरे बच्चे और बहू को साथ लेकर इमारत से बाहर निकले।

सिलेंडर बंद करके गैलरी में धकेला
-इस आगजनी की घटना के बीच भी ऊपर मौजूद इमरत लाल ने घर में रखे सभी सिलेंडर को बंद कर पीछे गैलरी में धकेल दिया। वहीं जो सिलेंडर गैस में लगा था उसको भी निकाल लिया। नीचे से उठती आग की लपटें धीरे-धीरे ऊपरी माले पर भी पहुंच गई। इस दौरान मकान का पूरा फर्स चटक गया और गेट, खिड़की दरवाजे, बर्तन, कपड़े सब जलकर नष्ट हो गए।

कूदने से हो गया फ्रैक्चर
- बिल्डिंग के नीचे जहां आग की लपटें उठ रही थीं वहीं से निकलने का रास्ता था। ऐसे में पहले माले पर रहने वाले किराएदार आर यादव जो इनकम टैक्स में कार्यरत हैं उन्होंने पहले अपना गद्दा नीचे फेंका, इसके बाद स्वयं उस पर कूद गए। एक मंजिल से कूदने पर उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। वहीं पीछे की तरफ रहने वाले किराएदार ने पहले कूलर लटकाया फिर उसके सहारे नीचे उतरे। इमरत लाल ने अपने पोते को गोद में उठाकर बचाया जिससे उनका चेहरा झुलस गया।

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