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लड़की एक माह बालिका गृह में रही, परिजनों को तलाशने की बजाए भेजा महाराष्ट्र

युवती की मौत के मामले में नेहरू नगर बालिका गृह की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 05:59 AM IST

भोपाल . भोपाल स्टेशन के नजदीक जीआरपी ग्राउंड पर 15 फीट ऊंचे पोल पर लटकी मिली युवती की मौत के मामले में नेहरू नगर बालिका गृह की भूमिका एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गत मई में यह लड़की भोपाल में ही चाइल्ड लाइन को मिली थी। उसे बालिकागृह लाया गया था, जहां उसने अपने जैसी करीब सौ लड़कियों के बीच एक महीना गुजारा। लेकिन इस दौरान न तो बाल कल्याण समिति ने उसे परिजनों को तलाशा, न कोई विज्ञापन दिया और न ही सीहोर बाल कल्याण समिति को सूचित किया, जबकि उस लड़की ने अपने सीहोर के होने की बात काउंसलर से कही थी।

- समिति का दावा है कि लड़की पुणे की माहेरा संस्था में जाना चाहती थी, हमने भेज दिया। गौरतलब है कि इसके पहले रेलवे स्टेशन से ही मिली एक गर्भवती नाबालिग को भी बिना केस दर्ज कराए चुपचाप जबलपुर भेजने की तैयारी कर ली थी। मामला उजागर होने के बाद महिला बाल विभाग की भारी किरकरी हुई थी।
- युवती की उम्र को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है। समिति के मुताबिक युवती नाबालिग थी, जिसे अब जीआरपी ने बालिग बताया है। जीआरपी टीआई हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि युवती सीहोर जिले के सिद्घिगंज गांव की है। बुधवार को दोपहर बाद युवती के पिता जीआरपी थाने आए थे।

- उसका अंतिम संस्कार हो चुका था। तस्वीर देखकर उन्होंने बेटी के रूप में शिनाख्त की। पुलिस को उन्होंने बताया कि वो चार साल से गायब थी। पढ़ने में कमजोर थी। हमने उसे खूब तलाशा लेकिन वह नहीं मिली।

- टीआई श्रीवास्तव के मुताबिक पोस्टमार्टम में युवती के पेट में दो माह का गर्भस्थ शिशु का भ्रूण मिला था। इस भ्रूण को डीएनए जांच के लिए सेंट्रल फोरेसिंक लेबोरेटरी सागर भेजा गया है। इसके अलावा उसकी उम्र की सही जानकारी जुटाने उसके पिता से पढ़ाई संबंधी जरूरी दस्तावेज तलब किए हैं। ताकि उम्र को लेकर चल रहे विवाद को खत्म किया जा सके।

- हर साल औसतन 10 लड़कियां होती हैं शिफ्ट : नेहरू नगर स्थित बालिका गृह के अफसरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि हर साल औसतन 10 लड़कियों को 18 साल की उम्र पूरी करने पर पश्चातवर्ती अनुरक्षण गृह (बीजेपी दफ्तर के पीछे स्थित) शिफ्ट कर दिया जाता है।

बाल कल्याण समिति भोपाल का रिकाॅर्ड (मई 2017)

- बच्ची की उम्र 16-17 बताई गई। रेलवे चाइल्ड लाइन ने बाल कल्याण समिति भेजा।

- किशोरी रेलवे चाइल्ड लाइन को 31 मई 2017 को मिली लावारिस मिली।

- किशोरी ने खुद को पुणे का मूल निवासी बताया। सीहोर निवासी होने की बात को झुठलाया

- किशोरी को उसके बयानों के आधार पर जीआरपी की मदद से पुणे के बालिका गृह भेजा

जीआरपी भोपाल की जांच रिपोर्ट के बिंदु (दिसंबर 2017)

- इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकोलीगल में पीएम के लिए जमा किए फाॅर्म में युवती की उम्र 23 साल बताई गई।

- जीआरपी की जांच में युवती 3 जुलाई को रेलवे स्टेशन के नजदीक मिली।

- जीआरपी ने युवती को सीहोर जिले का निवासी बताया। उसके परिजनों से युवती का फोटो देख शिनाख्त की

- 4 माह पहले ही जीआरपी अफसर पुणे स्थित बालिका गृह छोड़आए थे। फिर शिनाख्त में समय क्यों लगा।

पिता से दस्तावेज मांगे हैं
- क्रिकेट पिच में लगे पोल पर लटके मिले युवती के शव की शिनाख्त हो गई है। वह सीहोर जिले की रहने वाली थी। वह कुछ साल पहले घर से भाग गई थी। उसकी सही उम्र पता करने के लिए उसके पिता से बच्ची के स्कूल संबंधी दस्तावेज मांगे गए हैं।
रुचिवर्धन मिश्र, एसपी रेल , भोपाल

खुद को सीहाेर निवासी बताया था
^31 मई 2017 को एक नाबालिग लड़की रेलवे चाइल्ड लाइन को मिली थी। उम्र करीब 16 साल थी। उसने पहले खुद को सीहोर निवासी बताया था। 1 महीने वह बालिका गृह में रही। फिर बताया कि महाराष्ट्र के पुणे में उसका बचपन बीता है। माहेर संस्था में दोबारा भेजा जाए। उसे 3 जुलाई 2017 को पुणे के बालिका गृह भेजा था।
रेखा श्रीधर, सदस्य, बाल कल्याण समिति

एक महीना भोपाल में रही और वापस भेज दिया

बाल कल्याण समिति सूत्रों ने बताया कि मई 2017 में रेलवे चाइल्ड लाइन को मिली किशोरी ने खुद को सीहोर का रहने वाला बताया था। लेकिन, बालिका गृह में काउंसलिंग के दौरान महिला काउंसलर को उसने पुणे का बताया था। उसने पुणे की माहेर संस्था की बालिका गृह में साथ में रहने वाली एक लड़की से झगड़ा होने के कारण भागकर भोपाल आने की जानकारी दी थी। इस पर काउंसलर ने किशोरी से उसके द्वारा सीहोर में मां - पिता होने की दी गई जानकारी के संबंध में पूछा था। बाल कल्याण समिति का दावा है कि यह जानकारी झूठ होने की बात उसने अपने लिखित बयान में दी थी। बयान के साथ ही उसने बाल कल्याण समिति में पुणे की माहेर संस्था में ट्रांसफर के लिए एप्लीकेशन सबमिट की थी।