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एक्सपर्ट के पहुंचने से पहले ही निकाले जीपीएस-गवर्नर, ड्राइवर पर डाल दी जिम्मेदारी

जिम्मेदारी से बचने के लिए स्थानीय परिवहन अधिकारियों ने घटना के तत्काल बाद बस से जीपीएस और स्पीड गवर्नर निकाल लिए।

अनिल गुप्ता | Last Modified - Jan 08, 2018, 04:30 AM IST

  • एक्सपर्ट के पहुंचने से पहले ही निकाले जीपीएस-गवर्नर, ड्राइवर पर डाल दी जिम्मेदारी

    भोपाल .बस हादसे की जिम्मेदारी से बचने के लिए स्थानीय परिवहन अधिकारियों ने घटना के तत्काल बाद बस से जीपीएस और स्पीड गवर्नर निकाल लिए। इस बात का खुलासा निजी क्षेत्र की तकनीकी तौर पर एक्सपर्ट टीम की रिपोर्ट से हुआ है। टीम ने यह भी कहा है कि मौके पर ड्राइवर द्वारा ब्रेक लगाए जाने के भी कोई सबूत नहीं मिले हैं। हालांकि क्राइम एक्सपर्ट का कहना है कि इस टीम की कोई वैधता नहीं है और इसकी जांच फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री से होनी चाहिए थी।

    - बताया जा रहा है कि इंदौर आरटीओ को जैसे ही घटना की जानकारी मिली और परिवहन अधिकारियों पर सवाल उठने लगे तो अफसरों ने निजी क्षेत्र के छह टेक्निकल एक्सपर्ट को लेकर 6 जनवरी को एक कमेटी बना दी, जिसे तत्काल रिपोर्ट देने के लिए कहा गया।

    - कमेटी ने भी 24 घंटे के भीतर ही घटनास्थल का दौरा करके एक रिपोर्ट तैयार कर दी, जिसमें विभाग और अफसरों को क्लीनचिट दे दी गई। होना यह चाहिए था कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बाद जांच का काम क्राइम एक्सपर्ट को सौंपा जाता। ये लोग टेक्निकल टीम के साथ मिलकर दुर्घटना के कारणों की जांच करते।

    परिवहन विभाग के अधिकारियों को बचाने के लिए हुआ सारा खेल
    - हैरानी की बात यह भी है कि स्कूल बस में किसी भी तरह की छेड़छाड़ से पहले फॉरेंसिक टीम से पड़ताल नहीं कराई गई? क्राइम एक्सपर्ट का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई परिवहन विभाग के अधिकारियों को बचाने के लिए की गई है। इसमें सारा दोष ड्राइवर पर डाल दिया गया है।

    ‘भास्कर’ के पास इस टेक्निकल टीम की दो पेज की रिपोर्ट हैं जो सादे कागज पर है। जिसमें कहा गया है कि-
    - इग्निशन की बरामद नहीं हुई।
    - 45 फीसदी हिस्सा क्षतिग्रस्त है।
    - स्टेयरिंग व्हील, स्टेयरिंग कॉलम, स्टेयरिंग योक, स्टेयरिंग गियर बॉक्स ठीक मिले।
    - स्कूल बस के ज्यादा क्षतिग्रस्त होने के बाद कमेटी अंदर नहीं घुस पाई।
    - स्टेयरिंग सिस्टम के फेल होने के लक्षण नहीं मिले।
    - डैमेज और असर से साफ है कि स्कूल बस की स्पीड बहुत अधिक थी।
    - ऐसी संभावना है कि गाड़ी चलाते समय ड्राइवर का स्टेयरिंग पर कंट्रोल नहीं रहा। व विचलित हो गया। इसी कारण ब्रेक नहीं लगा पाया। ध्यान नहीं रख पाया।
    - किसी दूसरी गाड़ी का बचाने की कोशिश दिखती है।
    - पहले और दूसरे टायर के निशान डिवाइडर पर 8 से 10 मीटर के बीच मिले।
    - 20 मीटर तक स्कूल बस के निशान मिले।
    - इस कमेटी में मैन ट्रक्स इंडिया के दो और वोल्वो-आयशर की संयुक्त कंपनी वीसी कमर्शियल व्हीकल लिमिटेड के चार प्रतिनिधि शामिल रहे।

    - इसमें मैन ट्रक्स इंडिया के जेएस सूरी व ऋषिकेश निमगांवकर, वीसी कॉमर्शियल व्हीकल लिमिटेड के संदीप कुमार, राजेंद्र कुमार, एच ज्वैलकर व दीपक ए शामिल हैं।

    एक्सपर्ट के मुताबिक इस रिपोर्ट में कई विरोधाभास हैं।
    - बस की स्पीड का जिक्र नहीं है।
    - ब्रेक फेल होने के कोई निशान नहीं मिले, क्योंकि बस का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त है।
    - स्पीड गवर्नर किसी के बारे में बताया जा रहा है कि यह बोगस कंपनी का था।
    - बस नीचे से यू टर्न लेकर फ्लाईओवर पर आई है और 15 साल पुरानी है तो उसकी स्पीड 70-80 किमी प्रतिघंटे कैसे पहुंच गई।
    सबूतों से छेड़छाड़
    एक्सपर्ट का कहना है कि स्कूल बस हादसा पूरी तरह से कानूनी व पुलिस जांच के दायरे में आ गया है। पुलिस की गैरमौजूदगी में कोई जांच करता है और जीपीएस व स्पीड गवर्नर आदि निकाल लिए जाते हैं तो यह सबूतों से छेड़छाड़ है।

    एफएसएल, मैनिट या आईआईटी की टीम से करना थी जांच
    - आरटीओ ने प्राइवेट कमेटी कैसे बना दी। इसकी जगह तो उसे एफएसएल टीम, इंदौर के पुलिस मुखिया और मैनिट या आईआईटी के प्रतिनिधि को साथ लेकर जांच टीम बनती, जिसकी कानूनी वैधता भी रहती। निजी एक्सपर्ट का घटनास्थल पर जाना और बस की जांच करना गलत है।’ - एससी अग्रवाल, पूर्व पुलिस
    महानिदेशक व ट्रैफिक एक्सपर्ट, मप्र

    एमपी सिंह भोपाल अटैच किए गए

    - हरमीत के परिजन ने मुख्यमंत्री को भास्कर की खबर दिखाते हुए आरटीओ डॉ. एमपी सिंह की शिकायत की।

    - सीएम बोले- उनका व्यवहार ठीक नहीं था, हटा दिया है। शनिवार को सिंह ने हंसते हुए कहा था- हादसा हो गया है तो हमारी कहां गलती।

    - सिंह को भोपाल कैंप ऑफिस अटैच किया गया है। सिंह ने सफाई देते हुए कहा- हादसे से मैं भी दु:खी हूं। मैं हंस नहीं रहा था, मेरा फेस ही स्माइली है।


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