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दुनिया में मशहूर हो रहे यहां के अमरूद, फ्रांस, जापान समेत 25 देशों में डिमांड

ये है ईंटखेड़ी स्थित फल अनुसंधान केंद्र का 12 एकड़ में लगा बगीचा। यहां के अमरूद दुनिया भर में मशहूर हो रहे हैं।

अनूप दुबोलिया | Last Modified - Dec 04, 2017, 05:33 AM IST

  • दुनिया में मशहूर हो रहे यहां के अमरूद, फ्रांस, जापान समेत 25 देशों में डिमांड

    भोपाल.ये है ईंटखेड़ी स्थित फल अनुसंधान केंद्र का 12 एकड़ में लगा बगीचा। यहां के अमरूद दुनिया भर में मशहूर हो रहे हैं। जापान, फ्रांस सऊदी अरब, मस्कट, बेल्जियम, बांग्लादेश पाकिस्तान समेत करीब 25 देशों के लोगों ने अक्टूबर में ही ऑर्डर बुक कर दिए थे। इस बार यह पूरा बगीचा सबसे ज्यादा 12 लाख रुपए में नीलाम हुआ है। फल अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि बगीचे में अमरूद के 2 हजार से ज्यादा पेड़ हैं। चार से लेकर सात-आठ साल तक के पेड़ हैं। अनुसंधान केंद्र के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. एमएस परिहार ने बताया कि केंद्र में हाल ही में 1.3 करोड़ रुपए लागत की फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की गई है। यहां अमरूद की जैम, जैली आदि बनाई जाती है।

    अमरूद के 2 हजार से ज्यादा पेड़, डिमांड में 50 फीसदी का इजाफा

    ये वैरायटी हैं प्रमुख...

    - इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ 49, चित्तीदार, सुप्रीम हाइब्रिड 555, रीवा- 72, ग्वालियर- 27, सुरेखा, सरदार।

    - इनमें से कुछ वैरायटी के एक अमरूद का वजन 400 से 500 ग्राम तक है।

    ऐसे तय होते हैं वैरायटी के नाम
    - डॉ. परिहार ने बताया कि नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट एंड जेनेटिक रिसोर्सेस( एनवीपीजीआर) की वैरायटी रिलीज कमेटी और राज्य स्तर पर कृषि उत्पादन आयुक्त यानी एपीसी की कमेटी द्वारा किस्म के नाम तय होते हैं।

    - इसके अलावा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद( आईसीएआर) द्वारा भी वैरायटी का नाम मंजूर किया जाता है। जो वैज्ञानिक इन पर काम करते हैं, वे क्षेत्रवार कमेटी को नाम प्रस्तावित करते हैं। पांच साल पहले तक बांग्लादेश, पाकिस्तान, सऊदी अरब सहित कुछ देशों में इसकी मांग थी। इसके बाद यूरोप समेत एशिया के अन्य देशों में भी इसकी डिमांड बढ़ी। पिछले पांच साल में ही इसमें 50 फीसदी का इजाफा हुआ।

    पेक्टिन की अधिकता से ज्यादा पाचक
    - यहां की मिट्टी ऐसी है जिससे अमरूद में पेक्टिन की अधिकता होती है। इसकी वजह से यह ज्यादा स्वादिष्ट और पाचक होता है। इनमें पौष्टिक तत्व आयरन, फाॅस्फोरस और फाइबर अपेक्षाकृत ज्यादा होता है।

    - इसलिए यह विदेशों में ज्यादा लोकप्रिय है, जबकि विदेशी अमरूद वीएनआर स्वादहीन होता है। अमरूद में विटामिन सी अधिक होता है। फेंफड़ों की बीमारी, स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करता है।

    पांच साल में कितनी पैदावार

    57, 000 किलो
    वर्ष 2013
    65,000 किलो
    वर्ष 2014
    72,000 किलो
    वर्ष 2015
    78,000 किलो
    वर्ष 2106
    01 लाख किलाे
    वर्ष 2017
    {आंकड़ंे ईटखेड़ी फल अनुसंधान केंद्र के मुताबिक। (किलो में अनुमानित)
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