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चार दिन की उम्र में हार्ट सर्जरी, 10 दिन वेंटिलेटर पर रहा, ऐसे छह महीने इलाज के बाद हुआ स्वस्थ

एक दिन बाद मेडिकल रिपोर्ट में सर्जरी सफल होने की पुष्टि होने के बाद ऑपरेशन साइट को बंद किया।

Dainik Bhaskar

Jan 01, 2018, 06:37 AM IST
Healthy after six months of treatment

भोपाल. जन्म के चार दिन बाद दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एम्स) में हार्ट सर्जरी हुई। इसके बाद हार्ट को क्लोज करने के स्थान पर उसे खोलकर रखा। एक दिन बाद मेडिकल रिपोर्ट में सर्जरी सफल होने की पुष्टि होने के बाद ऑपरेशन साइट को बंद किया। सर्जरी के लिए सीने में लगाए गए टांके कटे भी नहीं थे, तभी सेप्सिस हो गया। हालत बिगड़ी तो डॉक्टर्स ने वेंटिलेटर सपोर्ट पर रख दिया।

एक , दो नहीं पूरे 10 दिन तक आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा। संक्रमण कम हुआ तो डाक्टर्स ने अलग से पीडियाट्रिक वार्ड में शिफ्ट किया। एम्स में एक महीने तक चले लंबे इलाज के बाद डॉक्टर्स ने छुट्टी कर दी। इसके बाद अगले छह महीने तक हर सप्ताह एम्स में फालोअप जांच के दौरान तकलीफ सही। लेकिन, अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। यह कहानी है नवीबाग में रहने वाले 11 महीने के देवांश शर्मा की। उसके पिता देवेश बेंगलुरू में एक साॅफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हैं।

यहां सर्जरी से कर दिया था इनकार

देवेश ने बताया कि बीते साल 23 जनवरी को भोपाल के एक निजी अस्पताल में पत्नी वंदना शर्मा ने बेटे को जन्म दिया था। परिवार के लोग नए मेहमान के आने की खुशी आपस में साझा कर रहे थे। तभी बेटे को सांस लेने में हुई तकलीफ ने परेशानी बढ़ा दी । डॉक्टर्स ने मेडिकल जांच में उसे ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेटर अार्टीज (टीजीए इंटर वेंट्रिकुलर सेप्टम) बीमारी होना बताया। इस बीमारी से बच्चे के साफ और गंदे खून की मिक्सिंग नहीं होती। इससे बच्चे के शरीर में गंदे खून की मात्रा लगातार बढ़ रही थी। आनन- फानन में भोपाल के सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल्स के कार्डियक सर्जन्स से संपर्क किया। लेकिन, अस्पतालों में बच्चे की हार्ट सर्जरी के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल्ड डॉक्टर्स नहीं होने के कारण सर्जरी से इनकार कर दिया।

बीएमएचआरसी के पूर्व कार्डियक सर्जन डॉ. हेमंत कुमार पांडे ने बताया कि 1 लाख बच्चों में से एक बच्चे को ट्रांसपोजिशन ऑफ ग्रेटर अार्टीज बीमारी होती है। भोपाल के अस्पतालों में अभी भी इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की हार्ट सर्जरी नहीं होती। इस बीमारी से पीड़ित 95 प्रतिशत बच्चों की बीमारी की पहचान ही नहीं हो पाती।

विदेश मंत्री को ट्वीट कर मांगी थी मदद
भोपाल के कार्डियक सर्जन्स द्वारा ऑपरेशन से मना करने के बाद देवांश के पिता देवेश ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज , मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, महापौर आलोक शर्मा को ट्वीट कर बच्चे के इलाज में मदद मांगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एम्स में बिना वेटिंग इलाज देने की व्यवस्था कराई। मुख्यमंत्री चौहान ने नवजात को दिल्ली पहुंचाने एयर एंबुलेंस भोपाल बुलाई। 27 जनवरी की शाम नवजात को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया।

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