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आदेश के बाद भी कंपनियों से पोषाहार लेना यानी सरकार इन्हें लाभ देना चाहती है- हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

कंपनियों के जरिए से पोषण आहार सप्लाई की पुरानी व्यवस्था बंद न होने पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी।

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 06:08 AM IST
जरूरतमंद बच्चों के भोजन से जुड़ा है पोषण आहार मामला।   - सिम्बॉलिक जरूरतमंद बच्चों के भोजन से जुड़ा है पोषण आहार मामला। - सिम्बॉलिक

भोपाल. कंपनियों के जरिए पोषण आहार सप्लाई बंद न करने के मामले में सरकार हाईकोर्ट में घिर गई है। 9 मार्च को इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की डिवीजन बेंच ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा- "आदेश के बावजूद निजी कंपनियों से पोषण आहार लेना यह साबित करता है कि सरकार उन्हें लाभ पहुंचाना चाहती है।" कंपनियों को एक भी दिन के लिए सप्लाई की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। पोषण आहार की आपूर्ति के सैकड़ों उपाय हैं। पड़ोसी राज्यों से सप्लाई ले सकते हैं। शाॅर्ट टर्म टेंडर कर सकते हैं। बाजार से भी खरीद सकते हैं।

कहा- अदालत गलत काम में सहभागी नहीं हो सकती

चीफ सेक्रेटरी और प्रिसिंपल सेक्रेटरी के जवाब को भी कोर्ट ने अवमानना माना है। कहा कि हाईकोर्ट ने 13 सितंबर 2017 को साफ आदेश दिया था कि पुरानी व्यवस्था निरस्त कर 30 दिन के भीतर नई व्यवस्था की प्रक्रिया शुरू करें। इसके बावजूद सरकार बहाने बनाकर पुरानी व्यवस्था से पोषाहार वितरण कराती रही। इस बारे में सरकार ने निजी कंपनियों से सप्लाई बहाल करने के लिए कोई आवेदन भी नहीं दिया और कोर्ट को अंधेरे में रखा। कोर्ट ऐसे किसी भी गलत काम में सहभागी नहीं हो सकती। यह तो हमारे ही आदेश का उल्लंघन होगा।

17 साल से पब्लिक यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज पीयूसीएल सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा

पोषण आहार को लेकर 17 साल से पब्लिक यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज पीयूसीएल सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहा है। सितंबर 2017 के फैसले के पहले मध्यप्रदेश के केस में वह इंटरविनर बना। हाईकोर्ट में पीयूसीएल की ओर से वकील प्रत्यूष मिश्रा ने प्रदेश में पोषण आहार सप्लाई सिस्टम की बारीकियां बताईं।

आगे क्या: हाईकोर्ट में दो पिटिशन, चीफ जस्टिस करेंगे फैसला

पोषण आहार सिस्टम को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दो पिटिशन विचाराधीन हैं। डेढ़ साल से सरकार के दांवपेंच में उलझा यह विवाद अब चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता के पास पहुंच गया है। अब वे 14 मार्च को फैसला लेंगे कि इस केस की सुनवाई किस अदालत में, कौन जज करेंगे।

जिम्मेदारों पर सख्ती....अफसरों को अवमानना के नोटिस

पोषण आहार की नई व्यवस्था के लिए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जो आदेश दिया था, उसका पालन नहीं करना अफसरों को बहुत भारी पड़ सकता है। हाईकोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया, एमपी एग्रो समेत अन्य को अवमानना के व्यक्तिगत नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। 2 अप्रैल तक अफसरों को जवाब देना है कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।

क्या अफसरों ने कोर्ट को भी गलत जानकारी दी? एक ने कहा- पुरानी व्यवस्था बंद, दूसरे ने कहा- चालू

- पोषाहार मामले में कोर्ट के आदेशानुसार जब सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की तो कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव जयनारायण कंसोटिया को तलब किया। उस दौरान कंसोटिया ने कोर्ट को बताया कि 1 नवंबर 2017 से निजी कंपनियों की सप्लाई बंद कर दी है।

- इस बीच 22 नवंबर को डिप्टी एडवोकेट जनरल से पूछा कि अभी तक टेंडर जारी क्यों नहीं हुए। 2 फरवरी को हुई सुनवाई में ऑफिस इंचार्ज एनपी डेहरिया ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में वही लोग (निजी कंपनी) पोषाहार की सप्लाई कर रहे हैं, जो 13 सितंबर 2017 के पहले कर रहे थे। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पीएस कंसोटिया ने उस समय कोर्ट को गलत जानकारी दी थी?

- उधर, इस मामले में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस, प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया और सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा से इस संबंध में बात करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने अपना पक्ष नहीं रखा।

भास्कर ने 2016 में उठाया था मुद्दा। भास्कर ने 2016 में उठाया था मुद्दा।
मध्यप्रदेश की जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी। मध्यप्रदेश की जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी।