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​आठ महीने बाद भी अधूरे हैं 60% प्रोजेक्ट, फिर कैसे जारी हुए कम्प्लीशन सर्टिफिकेट

गठित समिति ने जोन- 18 और जोन-19 के जिन 38 प्रोजेक्ट की जांच की उनमें से 60 फीसदी ऐसे हैं जो आठ महीने बाद भी अधूरे हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 27, 2017, 05:23 AM IST

  • ​आठ महीने बाद भी अधूरे हैं 60% प्रोजेक्ट, फिर कैसे जारी हुए कम्प्लीशन सर्टिफिकेट

    भोपाल.फर्जी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की जांच के लिए गठित समिति ने जोन- 18 और जोन-19 के जिन 38 प्रोजेक्ट की जांच की उनमें से 60 फीसदी ऐसे हैं जो आठ महीने बाद भी अधूरे हैं। कहीं प्लास्टर का काम चल रहा है, तो कहीं फ्लोरिंग का। कहीं पानी की लाइन या सीवेज का काम चल रहा है। किसी ने भी फायर की एनओसी नहीं ली। यानी यह अब भी ‘रेडी टू पजेशन’ नहीं हैं। नगर निगम द्वारा दिए गए इस कम्प्लीशन सर्टिफिकेट से शासन को भी नुकसान हुआ। क्योंकि 1 मई 2017 से पहले सर्टिफिकेट जारी किए जाने से यह बिल्डर जीएसटी के दायरे से बाहर हो गए। मकानों की बिक्री पर 12 फीसदी जीएसटी लगाया गया है। यह टिप्पणी कम्प्लीशन सर्टिफिकेट की जांच के लिए गठित दोनों समितियों ने अपनी रिपोर्ट निगमायुक्त प्रियंका दास को सौंपी रिपोर्ट में की है।

    कार्यपूर्णता का आशय स्पष्ट होना चाहिए
    - एमआईसी सदस्य कृष्णमोहन सोनी ने लिखा है कि कार्यपूर्णता का आशय स्पष्ट होना चाहिए। जब तक कोई भवन रहने लायक नहीं बन गया तब तक कम्प्लीशन देने का क्या आशय है? रेरा की कम्प्लीशन की परिभाषा क्या है? इस आधार पर ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।

    2 एक ही दिन में थोक में होने पर आपत्ति
    - समिति ने एक ही दिन में थोक में सर्टिफिकेट जारी होने पर भी आपत्ति की है। गिरीश शर्मा ने कहा कि उच्च अधिकारियों की शह पर काम हुआ है, इसलिए किसी सब इंजीनियर या छोटे कर्मचारी पर कार्रवाई करके मामले को रफा- दफा करने की बजाय वरिष्ठ अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

    नियम स्पष्ट नहीं होने से रिश्वत को मिल रहा बढ़ावा
    - समिति के सदस्य कांग्रेस पार्षद गिरीश शर्मा ने रिपोर्ट में लिखा है कि बिल्डिंग परमिशन, कंपाउंडिंग और कम्प्लीशन आदि से संबंधित नियम स्पष्ट नहीं हैं। नियम वर्षों पुराने हैं, तब से अब तक परिस्थितियां बदल गईं हैं। इस वजह से रिश्वत को बढ़ावा मिल रहा है।

    समिति ने की प्रोजेक्ट कम्प्लीशन की जांच
    समिति ने प्रोजेक्ट कम्प्लीशन की जांच की है। कांग्रेस पार्षद गिरीश शर्मा ने परिषद बैठक में यही आरोप लगाया था कि अधूरे प्रोजेक्ट के कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिए। इससे यह बिल्डर रेरा की परिधि से बाहर हो गए और कंपाउंडिंग नहीं होने से नगर निगम को 200 करोड़ रुपए का नुकसान हो गया।

    ग्राउंड पर पहुंचकर 38 प्रोजेक्ट की हकीकत जानी
    समिति ने दोनों जोन के 38 प्रोजेक्ट की मौके पर जांच की। फोटो लिए, तय फार्मेट में जानकारी भर दी। इसमें स्ट्रक्चर के साथ फ्लोरिंग, प्लास्टर, बिजली फिटिंग, सीवर लाइन फिटिंग, फायर एनओसी, लिफ्ट की सुविधा सहित तमाम जानकारियां हैं जिनसे यह पता किया जा सके कि भवन ‘रेडी टू पजेशन’ है या नहीं।

    ग्राउंड पर पहुंचकर 38 प्रोजेक्ट की हकीकत जानी
    समिति ने दोनों जोन के 38 प्रोजेक्ट की मौके पर जांच की। फोटो लिए, तय फार्मेट में जानकारी भर दी। इसमें स्ट्रक्चर के साथ फ्लोरिंग, प्लास्टर, बिजली फिटिंग, सीवर लाइन फिटिंग, फायर एनओसी, लिफ्ट की सुविधा सहित तमाम जानकारियां हैं जिनसे यह पता किया जा सके कि भवन ‘रेडी टू पजेशन’ है या नहीं।

    जिम्मेदारों को हटाए बिना हुई है जांच
    कमेटी की रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। चीफ सिटी प्लानर शुभाशीष बैनर्जी और सहायक यंत्री लालजी सिंह चौहान व बीपीएस कुशवाह को नहीं हटाया गया। बैनर्जी ने जुलाई के महीने में पांच कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किए हैं। चौहान और कुशवाह भी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में शामिल थे।

    सख्त कार्रवाई होगी : निगमायुक्त
    निगम आयुक्त प्रियंका दास ने कहा कि 38 प्रोजेक्ट की जांच की गई है उनमें से 5 में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। अध्ययन के बाद निगम परिषद को अनुशंसा के साथ रिपोर्ट पेश करूंगी। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की अनुशंसा होगी।

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Web Title: How The Ongoing Certificate Of Compliance
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