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6 साल में पाउडर बनवाने पर 36 करोड़ रुपए खर्च, इतने में तो खुद का ही प्लांट लग जाता

भोपाल दुग्ध संघ के सामने दूध की ज्यादा अावक का संकट अभी भी टला नहीं है।

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 04:55 AM IST
In 6 years, the cost of powder was Rs 36 crores

भोपाल. भोपाल दुग्ध संघ के सामने दूध की ज्यादा अावक का संकट अभी भी टला नहीं है। पिछले दो दिन में दूध का पाउडर और मक्खन बनाने के लिए 4 लाख लीटर दूध बाहर भेजा जा चुका है। एक्सपर्ट कहते हैं कि पाउडर प्लांट पर 35 करोड़ रुपए लागत आती है। दुग्ध संघ ने पिछले छह साल में पाउडर बनवाने के लिए जितनी राशि खर्च की उतने में तो खुद का ही प्लांट लगवा सकते थे। आंकड़ों के मुताबिक दुग्ध संघ पिछले छह साल में पाउडर बनवाने पर करीब 36 करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगस्त से 15 फरवरी तक दूध की ज्यादा आवक रहती है। इन 192 दिनों में दूध का पाउडर बनवाना ही पड़ता है।

एेसे समझें 36 करोड़ रुपए का गणित

100 लीटर दूध से 9 किलो पाउडर बनता है। एक किलो पाउडर बनाने के लिए अभी 17.50 रुपए प्रति किलो की दर भुगतान करना पड़ रहा है। इस दर से 2 लाख लीटर दूध का पाउडर बनवाने के लिए 2.34 लाख रुपए रोजाना खर्च करने पड़ रहे हैं। 1 अगस्त से 15 फरवरी तक 199 दिनों तक पाउडर बनवाना पड़ता है। साल भर में 192 दिन रोजाना 18000 किलाे पाउडर बनवाया तो 17.50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से 6 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए साल भर में ही खर्च होंगे। छह साल में यह राशि 36 करोड़ 28 लाख 80 हजार रुपए होती है।

- मैंने शासन को प्रस्ताव भेजा था। भोपाल दुग्ध संघ आसानी से खुद का प्लांट लगवा सकता है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत यह लोन लेकर प्लांट स्थापित किया जा सकता है। इसकी किस्तें भी आसानी से चुकाई जा सकती हैं। पाउडर प्लांट की लाइफ भी 40 साल होती है। इंदौर में पाउडर प्लांट स्थापित हुए 38 साल हो गए ।
एससी मांडगे, पूर्व चेयरमैन, नेशनल डेयरी फेडरेशन

- इंदौर के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रस्ताव शासन को है। वहां का पाउडर प्लांट पुराना हो चुका है। डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के तहत अब 30 टन क्षमता का प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन से भी बातचीत हुई है। यह प्रस्ताव भारत सरकार के पास जाएगा। इससे भोपाल को भी काफी फायदा होगा।
जितेंद्र सिंह राजे, सीईओ भोपाल दुग्ध संघ

अभी यह है स्थिति....
- शनिवार सुबह दुग्ध संघ के पास 8 लाख लीटर दूध इकट्ठा था। इसमें से 5 लाख लीटर सायलो यानी टैंक में, बाकी 3 लाख लीटर दूध प्लांट परिसर में खड़े टैंकरों में था। 10 टैंकरों को देवास, कोटा व ग्वालियर रवाना कर दिया गया। 3.5 लाख लीटर दूध की खपत हुई। 2.5 लाख लीटर दूध बच गया। फिर 4 लाख लीटर दूध आया। अब यहां दूध 6.5 लाख लीटर हो गया।


निजी प्लांट़़स से बनवा रहे हैं पाउडर

- अभी दुग्ध संघ देवास और कोटा में प्राइवेट प्लांट्स से पाउडर बनवा रहा है। प्रदेश में सिर्फ इंदौर और ग्वालियर दुग्ध संघ में ही पाउडर प्लांट हैं। भोपाल दुग्ध संघ प्रदेश में सबसे बड़ा मिल्क यूनियन है। इसके पास खुद का पाउडर प्लांट नहीं है।

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In 6 years, the cost of powder was Rs 36 crores
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