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गर्मी में झोपड़ी और आंगन में पढ़ रहे मासूम बच्चे, यहां न स्कूल हैं न आंगनबाड़ी

विकास का दावा करने वाले प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आंखों से पर्दा उठाती भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट....

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 04:28 AM IST
झोपड़ी में पढ़ते हुए बच्चे। झोपड़ी में पढ़ते हुए बच्चे।

होशंगाबाद. मध्यप्रदेश में एक गांव ऐसा है जहां पर न तो कोई स्कूल है और न कोई आंगनबाड़ी, बस एक झोपड़ी में बच्चे पढ़ने जाते हैं और वहीं शिक्षा ग्रहण करते हैं। बता दें कि इस गांव को विस्थापित किया गया था। विकास का दावा करने वाले प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की आंखों से पर्दा उठाती भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट....

- विस्थापित गांवों के विद्यार्थी लकड़ी, पॉलीथिन और घास-फूस की झरपट्टी के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं।
- जिला ओडीएफ घोषित हो गया, लेकिन केसला ब्लॉक के दो गांव में न स्कूल भवन है न शौचालय।
- मानगांव और साकई 2017 में विस्थापित हुए थे ।
- 9 महीने बाद भी तपती गर्मी में दो स्कूलों के 68 विद्यार्थी झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर हैं।
- गांवों की आंगनबाड़ियों के भी ऐसे ही कुछ हाल हैं।

टपरे में है भविष्य

- ओडीएफ जिले के विस्थापित गांवों की हकीकत ऐसी है कि यहां 9 महीने बाद भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं और यहां शौचालय के लिए बोरियां लगा दी हैं।

गर्मी में बच्चे नीचे बैठकर पढ़ते हैं। गर्मी में बच्चे नीचे बैठकर पढ़ते हैं।
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झोपड़ी में पढ़ते हुए बच्चे।झोपड़ी में पढ़ते हुए बच्चे।
गर्मी में बच्चे नीचे बैठकर पढ़ते हैं।गर्मी में बच्चे नीचे बैठकर पढ़ते हैं।
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