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भोजपुर उत्सव में परफॉर्म करने आए कैलाश खेर, बोले- नर्मदा पर लिखना चाहते हैं गाना

भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा।

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 01:04 AM IST
भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा। भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा।

भोपाल. भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा। वही दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ शिव की महिमा को भरतनाट्यम, छाऊ और कुचिपुड़ी नृत्यों के संगम से बनाई नृत्य नाटिका में पेश किया। भोजपुर मंदिर पर शिव दरबार में रात 9.50 बजे कैलाश खेर ने "कौन है वो कहां से आया है... ' गीत से मंच पर दस्तक दी। कैलाश का बखूबी साथ निभाया कैलासा बैंड ने। कैलाश ने ऑडियंस से रूबरू होते हुए कहा...

- आप सबको नमस्ते, भोले के भक्तों को नमन। भोले बाबा का दिन भोले के भक्तों के साथ हम भी आएं है हाजिरी लगाने। जय भोले।

- चलें फिर... कैलाश ने बैंड मेंबर परेश और नरेश को इशारा किया और शुरू हुआ गीत "मैं तो तेरे प्यार में दीवाना हो गया'।

- इसके बाद "आवो जी', "तौबा तौबा रे तेरी सूरत', "पिया के रंग रंगदीनी ओढ़नी' "कैसे बताएं क्यों तुझको चाहें...' सुनाया। बैक टू बैक गीतों पर ऑडियंस भी थिरकने लगे।

इसके बाद "तेरी दीवानी',
"उतरे मुझमें आदि योगी' फिर "चक दे फट्‌टे' गीत से कार्यक्रम को विराम दिया।

सुर संहार और 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन
- दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ कुचिपुड़ी, छाऊ और भरतनाट्यम के मिश्रण में त्रिपुरा सुर संहार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, आनंद तांडव पेश किया। कलाकारों का तालमेल और नृत्य की तेजी ने दर्शकों को भी रोमांचित किया। रिकॉर्डेड संगीत पर शिव, दानव, मार्कण्डेय की कहानी और शिव-विष्णु अवतार दिखाए।

जीवनदायिनी नर्मदा पर कुछ ऐसा लिखने की दिली ख्वाहिश, जो जीवन का गीत बन जाए

- भोजपुर उत्सव में परफाॅर्म करने आए गायक, कंपोजर, गीतकार कैलाश खेर ने दैनिक भास्कर ऑफिस में जिंदगी के अनुभव और अपने संगीत के सफर को सिटी भास्कर से साझा किया।

- उन्होंने कहा, जीवन का कोई उद्देश्य होना चाहिए, मिशन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सफल माना जाता है।

- मप्र सरकार अगर कहेगी तो नर्मदा पर कुछ ऐसा लिख देंगे, जो लोगों के लिए जीवन गीत बन जाएगा।

- उन्होंने कहा, आनंद मंत्रालय में रोजाना आनंद की वृष्टि होना चाहिए, संगीत के समारोह होना चाहिए। दुनिया भर से स्टूडेंट यूनियन और एसोसिएशन को यहां आमंत्रित किया जाना चाहिए।

- हालांकि हमारे यहां सब काम नाम के लिए होते हैं। नाम के लिए किया गया काम हमेशा निरर्थक होता

- संगीत के बारे में उन्होंने कहा, यह मनोरंजन ही नहीं, बल्कि हीलिंग का भी स्रोत है। संगीत का भी एक मंत्रालय होना चाहिए।

- गहरे डिप्रेशन या परेशानी में उलझा व्यक्ति भी एक गीत सुन ले तो मन प्रसन्न हो जाता है। संगीत का मतलब फिल्मी संगीत नहीं है।

- फिल्मी संगीत पूरे संगीत का मात्र 2 प्रतिशत ही है, लेकिन यह 98 प्रतिशत संगीत लोगों की पहुंच से दूर है। इसे सुनने के लिए लोगों को डिजीटल मीडिया से जुड़ना पड़ेगा।

दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ कुचिपुड़ी, छाऊ और भरतनाट्यम के मिश्रण में त्रिपुरा सुर संहार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, आनंद तांडव पेश किया। दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ कुचिपुड़ी, छाऊ और भरतनाट्यम के मिश्रण में त्रिपुरा सुर संहार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, आनंद तांडव पेश किया।
कलाकारों का तालमेल और नृत्य की तेजी ने दर्शकों को भी रोमांचित किया। रिकॉर्डेड संगीत पर शिव, दानव, मार्कण्डेय की कहानी और शिव-विष्णु अवतार दिखाए। कलाकारों का तालमेल और नृत्य की तेजी ने दर्शकों को भी रोमांचित किया। रिकॉर्डेड संगीत पर शिव, दानव, मार्कण्डेय की कहानी और शिव-विष्णु अवतार दिखाए।
जीवन का कोई उद्देश्य होना चाहिए, मिशन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सफल माना जाता है। जीवन का कोई उद्देश्य होना चाहिए, मिशन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सफल माना जाता है।
मप्र सरकार अगर कहेगी तो नर्मदा पर कुछ ऐसा लिख देंगे, जो लोगों के लिए जीवन गीत बन जाएगा। मप्र सरकार अगर कहेगी तो नर्मदा पर कुछ ऐसा लिख देंगे, जो लोगों के लिए जीवन गीत बन जाएगा।
Kailash Kher at the Bhojpur festival, said write song on narmada
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भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा।भोजपुर महोत्सव के पहले दिन बुधवार को कैलासा बैंड और कैलाश खेर की जादुई आवाज़ ने भक्ति और मस्ती के सुरों को बिखेरा।
दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ कुचिपुड़ी, छाऊ और भरतनाट्यम के मिश्रण में त्रिपुरा सुर संहार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, आनंद तांडव पेश किया।दिल्ली की नृत्य गुरु वनश्री राव ने शिष्यों के साथ कुचिपुड़ी, छाऊ और भरतनाट्यम के मिश्रण में त्रिपुरा सुर संहार, 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, आनंद तांडव पेश किया।
कलाकारों का तालमेल और नृत्य की तेजी ने दर्शकों को भी रोमांचित किया। रिकॉर्डेड संगीत पर शिव, दानव, मार्कण्डेय की कहानी और शिव-विष्णु अवतार दिखाए।कलाकारों का तालमेल और नृत्य की तेजी ने दर्शकों को भी रोमांचित किया। रिकॉर्डेड संगीत पर शिव, दानव, मार्कण्डेय की कहानी और शिव-विष्णु अवतार दिखाए।
जीवन का कोई उद्देश्य होना चाहिए, मिशन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सफल माना जाता है।जीवन का कोई उद्देश्य होना चाहिए, मिशन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सफल माना जाता है।
मप्र सरकार अगर कहेगी तो नर्मदा पर कुछ ऐसा लिख देंगे, जो लोगों के लिए जीवन गीत बन जाएगा।मप्र सरकार अगर कहेगी तो नर्मदा पर कुछ ऐसा लिख देंगे, जो लोगों के लिए जीवन गीत बन जाएगा।
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