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कर्जा चुकाने के लिए किया था मासूम को किडनैप, ऐसे गिरफ्त में आए आरोपी

अंजुमन का 80 हजार का कर्जा चुकाना था। इसके लिए मैंने फिरौती से यह रकम वसूलने की योजना बनाई।

Danik Bhaskar | Jan 30, 2018, 05:36 AM IST

भोपाल. अंजुमन का 80 हजार का कर्जा चुकाना था। इसके लिए मैंने फिरौती से यह रकम वसूलने की योजना बनाई। अपने गांव के एक साथी के साथ मिलकर बैंक में काम करने वाले पड़ोसी की बेटी को अगवा किया। यह खुलासा नगर की भव्य सिटी काॅलोनी से पिछले माह एक मासूम बच्ची को अगवा करने वाले आरोपी कृपाल सिंह गुर्जर ने किया। सतलापुर पुलिस ने सोमवार को इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से मोबाइल और बाइक जब्त की है। आरोपियों को मंगलवार को कोर्ट में पेश करेंगे।


- सतलापुर थाना टीआई पीयूष चार्ल्स ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि बच्ची को अगवा करने वाला उसका पड़ोसी कृपाल सिंह गुर्जर ही निकला। कृपाल दूध का कारोबार करता है। कर्ज चुकाने के लिए उसने बच्ची का अपहरण कर फिरौती में तीन लाख रुपए मांगने की प्लानिंग की थी।

- उसने बताया कि इस काम के लिए उसने अपने गांव टांडा निवासी पंकज जाटव को शामिल किया था। पंकज ने रिश्तेदार लखन जाटव की मदद ली। 23 दिसंबर की शाम को आरोपियों ने बच्ची का अपहरण कर लिया।

- बच्ची को ले जाने के लिए कृपाल ने बाइक दी और उन्हें बैरसिया के परसोड़ा के जंगल पहुंचाने को कहा। बैरसिया पहुंचने पर वहां नाकाबंदी कर चैकिंग कर रही पुलिस को देख बदमाश घबरा गए और बच्ची को बैरसिया थाने के पास छोड़कर भाग गए।
- गौरतलब है कि 23 दिसंबर 2017 की शाम 7.30 बजे सराकिया के भव्य सिटी काॅलोनी निवासी और महिंद्रा फायनेंस बैंक में काम करने वाले अनिल झागौर की चार साल की बेटी एंजिल उर्फ आराध्या को अज्ञात व्यक्ति घर के सामने से उठाकर ले गया था। पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए सोशल मीडिया के सहारे मासूम अपहृत बच्ची को साढ़े तीन घंटे में ही खोजकर मामले को तो सुलझा लिया था।

ऐसे गिरफ्त में आए आरोपी

- टीआई पीयूष ने बताया कि उन्होंने कॉलोनीवासियों की सूची तैयार की थी। इसमें कृपाल बैरसिया निवासी पाया गया। जानकारी मिली कि घटना दिन कृपाल सिंह घटना के बाद ही तत्काल बाइक से कहीं घूमने चला गया था।

- मुखबिरों से यह भी जानकारी मिली थी कि घटना के दिन कृपाल को कुछ संदिग्धों से चर्चा करते देखा गया था। कृपाल पर निगाह रखी गई तो ज्ञात हुआ कि कृपाल उसके गांव टांडा के ही रहने वाले पंकज और लखन से संपर्क में रहा, इससे उस पर शंका हुई।

- उन्होंने कृपाल से जानकारी पूछी तो पहले वह गुमराह करता रहा। लेकिन बाद में पुलिस की सख्ती पर जुर्म स्वीकार कर लिया। टीआई ने बताया कि कृपाल पर शक होने के बाद इस मामले में साइबर सेल की भी मदद ली गई। उसके मोबाइल ओर उससे बातचीत करने वालों की कॉल डिटेल खंगालने पर पता चला कि कृपाल ही असली गुनाहगार है।