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मप्र में कुपोषण से रोज 92 बच्चों की मौत; नहीं आया सरकार का श्वेत पत्र

प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 तक 57 हजार बच्चों की मौत के बाद भी सरकार का जवाब कार्यवाही जारी है।

संजय दुबे | Last Modified - Mar 08, 2018, 10:07 AM IST

मप्र में कुपोषण से रोज 92 बच्चों की मौत; नहीं आया सरकार का श्वेत पत्र

भोपाल.प्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है। 2016 में यह आंकड़ा प्रतिदिन 74 बच्चों का था। ताजा आंकड़े जनवरी 2018 के हैं। यह जानकारी विधानसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने एक प्रश्न के जवाब में दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 14 सितंबर 2016 को प्रदेश में कुपोषण की स्थिति जानने के लिए श्वेत पत्र तैयार करने के लिए कमेटी गठित करने की घोषणा की थी। लेकिन इस समिति ने अब तक जांच के बिंदुओं का निर्धारण तक नहीं किया। सरकार का एक ही जवाब- कार्यवाही जारी है।

कैसे बढ़ता गया मासूमों की मौत का आंकड़ा

1 जनवरी 2016 से एक जनवरी 2017- 396 दिन
5 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 28948 रही, जबकि 6 से 12 वर्ष के 462 बच्चों की मौत हुई। कुल 29,410 बच्चों की मृत्यु हुई। 396 दिन में औसतन प्रतिदिन 74 बच्चों की मौत हुई।

अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 -यानी 183 दिन
1 वर्ष के 13843 बच्चों की मृत्यु हुई। वहीं 1 से 5 वर्ष के 3055 बच्चों की मौत हुई। इस तरह कुल 16898 बच्चों की मृत्यु हुई। 183 दिन में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई।

अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018- 123 दिन

0 से 1 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 9124 थी। वहीं, 1 से 5 वर्ष के 2215 बच्चों की मौत हो गई। कुल 11339 बच्चों की मृत्यु हुई। यानी 123 दिन में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई।

...और कुपोषण भी नहीं घटा

- 1 जनवरी 2017: 70,60,320 बच्चों में से 56,13,327 बच्चे सामान्य वजन के थे। 12 लाख 84 हजार 36 कम वजन और 1 लाख 62 हजार 957 बच्चे अतिकुपोषित थे। कुल 14 लाख 46 हजार 993 बच्चे कुपोषित थे।

- फरवरी 2017: 71,35036 में से 14 लाख 17 हजार 867 कुपोषित।

- दिसंबर 2017: 69,84, 872 बच्चों का वजन लिया गया। यानी 2 लाख कम का वजन लिया गया। इसके बाद भी 14 लाख के ऊपर कुपोषित मिले।

साल में 3300 करोड़ रु.खर्च
कुपोषण पर सरकार बीते दो सालों में ही 3300 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। यह राशि 2016-17 और 2017-18 में आईसीडीएस, पोषण आहार और अटल बिहारी वाजपेयी आरोग्य एवं पोषण योजना पर खर्च की गई। इसके बाद भी कुपोषण से होने वाली मौतों में कमी नहीं आ पा रही। 10 सालों में सिर्फ बच्चों का कुपोषण मिटाने के लिए पोषक तत्व युक्त भोजन टॉनिक्स और न्यूट्रीशियन की खरीदी पर 4800 करोड़ खर्च हुए। इसमें साल दर साल टॉनिक की खरीदी में मनमाफिक खर्च किया गया। इसमें जो टॉनिक 2007-08 में प्रति यूनिट 16,124 रुपए था वह 2008-09 में 22457 रुपए प्रति यूनिट खरीदा गया। 2015-16 में इसकी कीमत प्रति यूनिट 40559 रुपए हो गई। न्यूट्रीशियन 2009-10 में 34243 रुपए प्रति यूनिट था जो वर्ष 2015-16 में 40859 रुपए प्रति यूनिट हो गया।

मप्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के मुताबिक, अतिकुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है या घट रही है इस बारे में महिला एवं बाल विकास विभाग काम करता है। जो कम वजन और अति कम वजन के बच्चे अस्पताल आते हैं, उनका इलाज किया जाता है।'

महिला एवं बाल विकास विभाग की चीफ सेक्रेटरी जेएन कंसोटिया का कहना है कि श्वेत पत्र क्यों जारी नहीं हुआ, इस बारे में कुछ भी जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं।

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Web Title: mpr mein kuposn se roj 92 bachcho ki maut; nahi aayaa srkar ka shvet ptr
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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