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होली की छुटटी से दो दिन पहले ही ड्यूटी पर पहुंचे थे शहीद जितेंद्र, अब कभी नहीं लौटेंगे

भिंड के शहीद जिंतेंद्र ने अपने बडे़ भाई से कहा था, बच्चों का ख्याल रखना, अब आपके भरोसे रहेंगे।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Mar 14, 2018, 05:02 PM IST

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    शहीद जिंतेद्र सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ उनके गांव में किया जाएगा।

    भोपाल/भिंड. शहर के चतुर्वेदी नगर में रहने वाले सीआरपीएफ के कांस्टेबल जितेंद्र सिंह पुत्र रामवीर सिंह कुशवाह छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में शहीद हो गए। वे दो दिन पहले ही छुट्टी मनाकर ड्यूटी पर पहुंचे थे। वह होली का त्योहार मनाने के लिए 25 दिन की छुट्टी पर आए थे। जितेंद्र ने वर्ष 2005 में 13 साल पहले सीआरपीएफ की नौकरी ज्वाॅइन की थी। आठ साल पहले उनकी शादी सोनम के साथ हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं, जिसमें दो बेटी एक बेटा है।

    -बुधवार को गांव में शहीद के आने के इंतजार में परिवार वालों का बुरा हाल है। वह बिलख रहे हैं। शहीद जिंतेंद्र सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए घर के बाहर गांवभर के लोग एकत्र हो गए हैं। सबकी आंखें नम हैं।

    -घर से नक्सलियों के गढ़ छत्तीसगढ़ के सुकमा जाते वक्त सीआरपीएफ जवान जितेंद्र सिंह ने बड़े भाई शिक्षक सुरेंद्र सिंह से कहा था कि दादा बच्चों का ख्याल रखना। अब ये आपके भरोसे हैँ। जितेंद्र 25 दिन की छुट्टी बिताकर 2 दिन पहले रविवार को ही नक्सलियों से लोहा लेने ड्यूटी पर वापस गए थे।

    -बड़े भाई या घर में किसी ने नहीं सोचा था कि अब वे जितेंद्र को नहीं देख पाएंगे। शहादत की खबर घर आई तो सभी का रो-रोकर बुरा हाल है। बूढ़ी मां बेटे को याद कर बार-बार उससे मिलने की रट लगा रही हैं।

    शहादत से पहले की पत्नी से बात
    -मंगलवार को नक्सली हमले में शहादत देने से पहले भी जितेंद्र सिंह ने घर में फोन लगाकर पत्नी सोनम सिंह से बात की। जितेंद्र ने पत्नी से बातचीत में बच्चों, मां-पिता और घर में सभी का ख्याल रखने की बात

    कही। फोन पर पति से हुई बातों को याद कर सोनम सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है।

    भाई को मिली शहादत की खबर

    -शहर के चतुर्वेदी नगर ब्रह्मपुरी निवासी जितेंद्र सिंह (35) पुत्र रामवीर सिंह 2005 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए। देश सेवा का जज्बा उन्हें इस नौकरी में लेकर गया। हाल में वे छत्तीगढ़ सुकमा के किस्टाराम में 212

    कोबरा बटालियन में पदस्थ थे। मंगलवार को सुबह जितेंद्र सिंह अपने साथियों के साथ किस्टाराम से पलोडी गश्त पर थे। नक्सलियों ने 40 किलो आईईडी से ब्लास्ट किया, जिसमें भिंड के सपूत जितेंद्र सिंह आठ साथियों के साथ शहीद हो गए।

    शहीद होने की खबर पर सुन्न हो गया बड़ा भाई

    -सीआरपीएफ के अफसरों ने शहादत की सूचना के लिए दोपहर में 3:30 बजे जितेंद्र सिंह की पत्नी सोनम सिंह के मोबाइल पर फोन किया। बड़े भाई ने ही फोन रिसीव किया। छोटे भाई की शहादत की खबर सुन उनका दिमाग सुन्न् हो गया।

    घर के बाहर भीड़ देख हुआ मां को अहसास

    -जितेंद्र की शहादत की खबर को शाम तक वे घर में छिपाए रहे, लेकिन जब लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा होने लगी तो मां सुमन देवी को बेचैनी हुई। इसके बाद एक-दूसरे के जरिए यह बात उन तक पहुंची। मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वे बहू सोनम सिंह को देखकर बिलख-बिलखकर रो रही थी।

    एक परिवार उज्जैन में
    -शहीद जितेेंद्र सिंह के परिवार में पत्नी सोनम सिंह, बड़ी बेटी रुचि (4), सैजल (3), आशुतोष (2) हैं। ट्रेजरी में क्लर्क की नौकरी से रिटायर पिता रामवीर सिंह, मां, बड़े भाई शिक्षक सुरेंद्र सिंह, मझले भाई उज्जैन में

    शिक्षक महेंद्र सिंह कुशवाह और उनका परिवार है।

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    नक्सल हमले में शहीद हुए जवानों को ले जाते साथी जवान।
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    आज होगा शहीद जितेंद्र का अंतिम संस्कार।
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Web Title: Martyr Jitendra, Who Had Arrived On Duty Only Two Days Before Holi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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