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अब इंडिया का हर घर खेलेगा भास्कर तंबोला, 488 साल पुराना खेल है

करीब पांच सदी पुराने इस खेल को भास्कर नई ऊंचाई पर पहुंचाने जा रहा है। भास्कर तंबोला देश के घर-घर में खेला जा सकेगा।

Danik Bhaskar | Jan 16, 2018, 05:32 AM IST

भोपाल. करीब पांच सदी पुराने इस खेल को भास्कर नई ऊंचाई पर पहुंचाने जा रहा है। भास्कर तंबोला देश के घर-घर में खेला जा सकेगा। दुनिया में यह अब तक का सबसे अनूठा तंबोला होगा, जिसमें इतने सारे लोग एक साथ खेल रहे होंगे। यह करीब तीन-तीन महीने के अंतर पर दो हिस्सों में बंटा होगा। पहला भाग मंगलवार (16 जनवरी) से शुरू हो रहा है। पहले दिन खाली टिकट प्रकाशित किया जा रहा है। अगले दिन टॉप रो के लिए पहला क्लू प्रकाशित होगा। उसके बाद उससे संबंधित नंबर छापे जाएंगे। इसी क्रम में खेल आगे बढ़ता जाएगा।

- टिकट, नंबर और किस्मत के खेल तंबोला का इतिहास 488 साल पुराना है। ‘गेम ऑफ चांस’ के नाम से मशहूर इस खेल की शुरुआत 1530 में इटली में ‘ले लोटो इटालिया’ नाम से हुई थी।

- उस दौर में दुनिया में अपनी तरह का पहला लॉटरी गेम था। ले लोटो शुरुआत में युवाओं और घुमक्कड़ों की ही पसंद बना रहा। धीरे-धीरे घरों में भी यह खेला जाने लगा, क्योंकि इस खेल की मदद से मां-बाप अपने बच्चों को स्पेलिंग, जानवरों-शहरों के नाम और गणित के पहाड़े याद कराया करते थे। 1778 तक यह खेल इटली में ही रहा, लेकिन 18वीं सदी आते-आते ले लोटो फ्रांस, ब्रिटेन और यूरोप के अन्य हिस्सों तक पहुंच गया।
- 1920 में अमेरिका के ह्यूज जे वार्ड ने ले लोटो को एक स्टैंडर्ड और मॉडर्न स्वरूप दिया। इसे रो और कॉलम में बांटा। नंबर की बोली के आधार पर गेम खेलने का कॉन्सेप्ट भी दिया। तब ह्यूज ने ही ले लोटो को ‘तंबोला’ या ‘बिंगो’ नाम दिया।

- उन्होंने तंबोला की रूलबुक भी पब्लिश कराई और इस पर कॉपीराइट कराया। ह्यूज ने ही गेम का ये नियम बनाया कि किसी बोले हुए नंबर को तंबोला खेल रहे सभी खिलाड़ी अपने कार्ड में से काट देंगे। जिस खिलाड़ी के सभी नंबर सबसे पहले कट गए, वह विजेता होगा।

- ह्यूज के बाद 1942 में इरविन लोवे ने भी तंबोला के रूल्स में कुछ अपडेट किए। इसके बाद तंबोला दो कैटेगरी में बांटकर दुनिया भर में खेला जा रहा है। ये 2 कैटेगरी हैं- यूके तंबोला और यूएस तंबोला।

- यूके तंबोला यानी ब्रिटेन के तरीके से खेला जाना वाला आैर यूएस तंबोला यानी अमेरिका के तरीके से खेला जाना वाला तंबोला। दोनों तरीकों में कार्ड, टिकट और दाम के आधार पर अंतर होता है।