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आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आहार सप्लाई करने ऐसी शर्ते, ग्रुप बोले- कोई टेंडर नहीं भर पाएगा

शार्ट टर्म टेंडर में जिस तरह की शर्तें डाली गई हैं, उससे स्व सहायता समूह नाराज हैं।

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 06:56 AM IST
आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आह आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आह

भोपाल. प्रदेश की 96 हजार आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आहार सप्लाई करने के लिए जारी किए गए शार्ट टर्म टेंडर की शर्तों का महिला स्व सहायता समूहों ने विरोध किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वात्सल्य भवन में शनिवार को बुलाई गई प्री-बिड मीटिंग में समूहों के प्रतिनिधियों ने अफसरों से दो टूक कह दिया कि टेंडर में 50 करोड़ के टर्न ओवर की शर्त रख दी है, यह कोई भी समूह पूरी नहीं कर सकता है। ऐसी शर्त रखी जाएंगी तो कौन टेंडर प्रक्रिया में शामिल होगा।

इतनी शर्तें लगा दी गई हैं कि उन्हें पूरा करना मुश्किल
- सूत्रों के मुताबिक, पूरक पोषण आहार सप्लाई के लिए शार्ट टर्म टेंडर में जिस तरह की शर्तें डाली गई हैं, उससे स्व सहायता समूह नाराज हैं। दरअसल, जिन शर्तों पर सरकार यह काम देना चाहती है, वह प्रदेश का एक भी स्व सहायता समूह पूरी नहीं कर सकता है। इसको लेकर मूल टेंडर की शर्तें तैयार करने के लिए बनी कमेटी पहले ही इसका विरोध कर चुकी है।

- शार्ट टर्म टेंडर से पहले बुलाई गई बैठक में पोषण आहार उत्पादक और वितरक शामिल हुए। विभाग के अफसरों ने टेंडर प्रक्रिया में त्रुटि सुधार के मद्देनजर यह बैठक बुलाई थी। जहां समूहों के प्रतिनिधियों ने 97 पेज के टेंडर पर आपत्ति दर्ज कराई।

- उनका कहना था कि इतनी शर्तें लगा दी गई हैं कि उन्हें पूरा करना मुश्किल है। वहीं किसी भी समूह का टर्न ओवर 50 करोड़ नहीं है। इसलिए यह शर्तें बदली जाना चाहिए।

सप्लाई के लिए क्या थी सरकार की शर्ते?

- बता दें कि आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आहार सप्लाई के लिए सरकार ने 26 मार्च को शार्ट टर्म टेंडर शर्तें जारी की थी। जिसमें कहा गया है कि यदि कंपनी टेंडर मिलने के बाद 21 दिन तक सप्लाई शुरु नहीं करती है तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। यह टेंडर पांच महीने के लिए किए जाएंगे।

- टेंडर में ऐसी कंपनियां ही भाग ले सकेंगी, जिनकी उत्पादन क्षमता सप्लाई किए जाने वाले पूरक पोषण आहार का तीन गुना होगी।

- शर्तों में साफ कर दिया गया है कि हाईकोर्ट ने एमपी एग्रो सहित जिन तीन कंपनियों को बाहर किया है तथा जो कंपनियां ब्लैक लिस्टेड है, वे टेंडर में भाग नहीं ले पाएंगी।

- टेंडर में स्व सहायता समूहों के फेडरेशन भी हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन इसके लिए 2 साल का अनुभव होना चाहिए।

- टेंडर में देश भर से कोई भी कंपनी शामिल हो सकती है।

- उधर, महिला एवं बाल विकास कमिश्नर संदीप यादव ने कहा कि शार्ट टर्म टेंडर से पहले प्री-बिड मीटिंग बुलाई गई थी। जिसमें स्व सहायता समूहों के प्रतिनिधियों ने कमियां बताई हैं। उनमें बदलाव कर टेंडर का संशोधन जारी किया जाएगा।

विशेषज्ञों ने शर्तों का किया था विरोध

- सरकार ने पोषण आहार सप्लाई करने के लिए बनाई विशेषज्ञों की कमेटी ने भी शर्तों का विरोध किया था। जिसमें कहा गया था कि यह काम उन्हीं स्व सहायता समूहों को दिया जाएगा जो कम से कम दो साल से इस काम को कर रहे हैं। जिनकी पोषण आहार तैयार करने की क्षमता 3 हजार मीट्रिक टन प्रति माह है और फूड सुरक्षा और सेफ्टी एक्ट के दायरे में आते हैं।

- ऐसे स्व सहायता समूह जो सहकारिता अधिनियम, फर्म्स सोसाइटी अधिनियम के अंतर्गत रजिस्टर्ड है। इसके अलावा पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, जो पोषण आहार का उत्पादन करते हैं, वे भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

559.53 करोड़ का है टेंडर

आंगनबाड़ियों में पांच महीने में 559 करोड़ 53 लाख रुपए के पूरक पोषण आहार की सप्लाई की जाएगी। पोषाहार सप्लाई के लिए जारी टेंडर शर्तों के अनुसार सप्लाई में 1 से 6 दिन तक की देरी होने पर कंपनी से 5 प्रतिशत पैनाल्टी वसूली जाएगी। इसके साथ ही 7 से 15 दिन की देरी पर 10 प्रतिशत और 15 से 20 दिन की देरी होने पर 20 प्रतिशत पैनाल्टी लगेगी। यदि कंपनी पोषाहार सप्लाई में 20 से 21 दिन की देरी करती है तो उसका टेंडर ही निरस्त कर दिया जाएगा।