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यू ट्यूब और डॉक्टर्स से फोन पर सलाह लेकर सीखे जानवरों के ऑपरेशन, यह यंगस्टर्स की टीम करती है इलाज

मिसाल- अब तक 700 से भी ज्यादा जानवरों का इलाज कर चुकी है पशु सेवा समिति, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचते हैं पशु सेवक

Danik Bhaskar | Jan 01, 2018, 07:11 AM IST

सागर. शहर में पिछले सात साल से यंगस्टर्स की एक टीम केवल जानवरों को बचाने बल्कि जरूरत पड़़ने पर उनका इलाज तक कर रही है। कहीं भी जानवर के घायल पड़े होने की सूचना मिलते ही ये पशु सेवक मौके पर पहुंचकर उसका जीवन बचाने में जुट जाते हैं।

हैरानी की बात तो यह है कि इस टीम में कोई भी सदस्य जानवरों का डॉक्टर नहीं है, लेकिन इलाज के मामले में ये युवा किसी पशुचिकित्सक से कम नहीं है। युवाओं ने चिकित्सा का यह काम इंटरनेट और डॉक्टरों की सलाह लेकर सीखा है और अब ये पशुओं की खतरनाक बीमारियों तक का इलाज करने लगे हैं। पशु सेवा समिति के वासु चौबे ने बताया कि उन्हें जानवरों से बहुत लगाव है और वे उनकी तकलीफें को देख नहीं पाते। करीब दस साल पहले उन्हें सड़क पर एक गाय घायल पड़ी मिली, उन्होंने डॉक्टर्स की मदद मांगी, लेकिन कोई नहीं आया। ऐसे में उन्होंने विदेश में बैठे अपने एक डॉक्टर मित्र की फोन पर मदद लेकर गाय का इलाज किया और उसका जीवन बचाया। इसके बाद उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से भी जानवरों को प्राथमिक इलाज देने की शिक्षा ली। 2011 में उन्होंने अपने दोस्त सिद्धार्थ शंकर शुक्ला, पारंग शुक्ला, प्रद्युम्न भारद्वाज, नितिन साहू और अंशुल तिवारी के साथ मिलकर पशु सेवा समिति बनाई और हर घायल जानवर का इलाज करना शुरू कर दिया। अब तक यह टीम करीब 700 घायल जानवरों का इलाज कर उनकी जिंदगी बचा चुकी है।

जरूरत पड़ने पर भोपाल से भी मांगते हैं दवाएं
पारंगशुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम पिछले सात साल से पशुओं की सेवा में लगी हुई है। जिसके चलते उन्हें विदिशा तक से घायल जानवरों का इलाज करने के लिए फोन आते हैं। यह सेवा बिल्कुल निशुल्क होती है। कई बार कुछ दवाएं सागर में नहीं मिलती है तो ऐसे में यह टीम भोपाल तक से दवाएं मांगाकर इलाज करने में पीछे नहीं हटती। अब तक टीम द्वारा जानवरों की हड्डी जो़ड़ने, टांके लगाना, ड्रेसिंग, अंग सड़ने और डिस्टोकिया जैसे सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। जानवरों को बचाने में आने वाला खर्च पूरी टीम मिलकर उठाती है। इस काम में टीम को वरिष्ठ सलाहकार के रुप में विटनरी डॉक्टर्स डॉ यूएस पांडे, डॉ आरएस गौतम के साथ शहर के मुन्ना शुक्ला, गुंजन शुक्ला, वीरेंद्र मालथौन, बाबू चौरसिया, शैलेंद्र शाह आदि वरिष्ठ जनों की भी सलाह मदद मिलती है। टीम में अभी कुल 25 सदस्य हैं जो दिन-रात पशु सेवा के कामों के लिए तत्पर रहे हैं।

ये हैं इनके बचाए कुछ केस
पांचमाह पहले कलेक्टर बंगले के सामने एक गाय घायल पड़ी थी। सूचना मिलने पर जब टीम मौके पर पहुंची तो देखा कि गाय का पैर फ्रेक्चर है। जिसके बाद टीम ने गाय के पैर का प्लास्टर कर उसका इलाज किया।

20 दिन पहले परकोटा पर गाय के पेट में किसी ने रेडियम कटर मारा था। घटना की जानकारी मिलते ही पशु सेवकों की यह टीम मौके पर पहुंची तो गाय की आंत बाहर निकल आई थी और वह जीवन के लिए संघर्ष कर रही थी। इसके बाद सदस्यों डॉक्टर्स से फोन पर सलाह लेकर उसका सफल ऑपरेशन किया और गाय की जीवन बचा लिया।

लावारिस कुत्ते का सिर पीछे की ओर सड़ चुका था। टीम के सदस्यों ने यह देखा तो उन्होंने तुरंत कुत्ते का इलाज शुरू किया। इस दौरान करीब एक हफ्ते तक कुत्ते की मलहम पट्टी की और उसकी जान बचाई।