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स शख्स ने सीखी पान उगाने की टेक्नीक, पॉली हाउस बनाकर लगाए 12 हजार पौधे

29 साल के श्याम सिंह कुशवाहा बीसीए कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल में पहली बार पान की खेती की शुरुआत की है।

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 04:19 AM IST
person learned how to grow a Pan-Grow Technique

भोपाल. 29 साल के श्याम सिंह कुशवाहा बीसीए कर चुके हैं। उन्होंने भोपाल में पहली बार पान की खेती की शुरुआत की है। अभी तक शहर में सिर्फ बनारस और कलकत्ता के पान मिलते थे। लेकिन अब भोपाल में तैयार हुए पान का लुफ्त भी उठा सकेंगे। पान की पहली फसल तैयार हो चुकी है। ये पान बिना किसी कैमिकल के तैयार किया गया है। शहर के किसान परिवार ने काफी कोशिशों के बाद ये सफलता हासिल की है।

- छोला गांव के रहने वाले श्याम बैरसिया रोड पर अपनी जमीन पर पॉली हाउस बनाकर पान की खेती कर रहे हैं। वे लंबे समय से कुछ अलग करने की कोशिश में थे। सब्जी यानि टमाटर, पालक, गोभी की खेती में नुकसान हो रहा था।

- पॉली फॉर्म बांधने आए कलकत्ता के कारीगरों ने कहा कि यहां कलकत्ते के पान की याद आती है। फिर क्या था श्याम के मन में ख्याल आया, क्यों न पान की खेती की जाए। बीसीए कर चुके श्याम इंटरनेट फ्रेंडली तो थे ही, पान की खेती के बारे में जितना हो सकता था पढ़ा।

- कलकत्ता में पान उत्पादकों से संपर्क किया और वहां से तकनीक सीख कर आ गए। उन्होंने चौथाई एकड़ खेत में करीब 12 हजार पान के पौधे लगाकर काम शुरु किया है। उनके मुताबिक कलकत्ता के पान का स्वाद लोग अब भोपाल में चख सकेंगे।

नीदरलैंड में ले चुके हैं ट्रेनिंग

- पिछले साल सरकार द्वारा प्रदेश से 29 लोगों को वर्तमान खेती के अलावा कौन सी खेती की जा सकती है, इसके लिए नीदरलैंड भेजा गया था। शहर से श्याम सिंह के अलावा एक और किसान गए थे।

- वहां पर उन्हें फूलों की खेती के बारे में जानकारी के साथ साथ पान की खेती के बारे में भी बताया। श्याम के पिता रामसिंह कुशवाहा ने बताया कि एक एकड़ में पान की खेती के लिए करीब 5 लाख रुपए का निवेश जरूरी है।

- एक खेत में करीब 50 हजार पौधे लगाए जाते हैं। इसमें करोड़ों की आमदनी हो सकती है, क्योंकि ये पौधे कई साल तक पत्ते देते हैं। साथ ही ये पान पूरी तरह से जैविक हैं, यानि कि इसकी खेती में किसी तरह का कैमिकल मौजूद नहीं है।

प्रयोग अच्छा है, और लोग भी अपनाएं

- एक अधिकारी के मुताबिक, पान की खेती का प्रयोग अच्छा है। विभाग द्वारा इस तरह की खेती के लिए किसानों को ट्रेनिंग भी दिलाई जाती है। पहली बार पान की यह खेती जिले में हो रही है। इस तरह के प्रयोग और भी लोगों को अपनाना चाहिए। इसमेें लागत कम लगती है और मुनाफा ज्यादा होता है।

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