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वैट घटाने के बाद भी पेट्रोल और डीजल महंगा, अब 50 पैसे और बढ़ा रही सरकार

जनवरी में दाम इतने बढ़ गए कि पेट्रोल-डीजल दो रुपए महंगा हो गया।

Danik Bhaskar | Jan 19, 2018, 06:18 AM IST

भोपाल. राज्य सरकार ने दो माह पहले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वैट घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दी थी, लेकिन जनवरी में दाम इतने बढ़ गए कि पेट्रोल-डीजल दो रुपए महंगा हो गया। अब सरकार सेस लगाकर और 50-50 पैसे बढ़ाने जा रही है। इसके लिए अध्यादेश गुरुवार को अधिसूचित कर दिया है। एक-दो दिन में नियमों का प्रकाशन कर पेट्रोल-डीजल बढ़ी हुई दर लागू कर दी जाएगी।

- सरकार भले ही यह दावा कर रही है कि वैट घटाकर लोगों को दो माह से राहत दे रही है, लेकिन हकीकत यह है कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल 3.48 रुपए और डीजल 5.76 रुपए महंगा मिल रहा है।

- सेस लगने के बाद इसमें और बढ़ोतरी हो जाएगी। केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य सरकार ने 13 अक्टूबर 2017 को पेट्रोल पर 3 और डीजल पर 5 प्रतिशत वैट घटाया था।

- इससे उपभोक्ताओं को पेट्रोल 1.69 और डीजल 3.98 रुपए सस्ता मिल रहा था। उस दौरान पेट्रोल 73.08 रुपए और डीजल 59.34 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था जो अब (18 जनवरी को) बढ़कर क्रमश: 76.56 रुपए और 65.10 रुपए हो गया।

10 दिन में ही पेट्रोल 1.07 रुपए. और डीजल 1. 86 रुपए. महंगा
- राजधानी में जनवरी के पहले पखवाड़े में डीजल और पेट्रोल पदार्थों की कीमतें तेजी से बढ़ी है। डीजल 10 दिन में 1 रुपए 86 पैसे महंगा हो गया तो पेट्रोल के दाम भी 1.07 पैसे बढ़ गए। इस दौरान औसतन 19 पैसे प्रतिदिन की दर से दाम बढ़े।

सरकार का दावा : दो माह में हुआ 155 करोड़ रुपए का नुकसान

- केंद्र सरकार के निर्देश पर शिवराज सरकार ने पेट्रोल से तीन और डीजल से पांच प्रतिशत वैट घटाया था।

- सरकार का दावा है कि इससे राज्य को दो माह (नंवबर व दिसंबर 2017) में ही 155 करोड़ का नुकसान हुआ था।

- आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में 43 करोड़ का सरकार को नुकसान हुआ, जो दिसंबर में बढ़ कर 112 करोड़ हो गया।

बजट सत्र में एक्ट के रूप में पेश होगा

- फरवरी में संभावित बजट सत्र में इसे एक्ट के रूप में पेश किया जा सकता है। विभाग के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2016-17 के वित्तीय वर्ष में पेट्रोल और डीजल पर वैट व अतिरिक्त कर से मप्र सरकार को 8903 करोड़ रुपए राजस्व मिला था।चालू वित्तीय वर्ष में अभी तक 6 हजार 562 करोड़ रुपए ही खजाने में आए हैं। सरकार को सड़कों के लिए चुनावी साल में पैसों की जरूरत है।