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कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की धारा 4 माह पहले खत्म, फिर भी प्रॉपर्टी के नए रेट तय करने में जुटे अफसर

पंजीयन विभाग द्वारा बनाई जा रही नई प्रॉपर्टी गाइडलाइन की वैधता पर सवाल उठने लगे हैं।

अजय वर्मा | Last Modified - Mar 14, 2018, 12:19 AM IST

कलेक्टर गाइडलाइन बनाने की धारा 4 माह पहले खत्म, फिर भी प्रॉपर्टी के नए रेट तय करने में जुटे अफसर

भोपाल(मध्यप्रदेश). सरकार ने प्रॉपर्टी के बाजार मूल्य तय करने के लिए बनाई गई स्टाम्प अधिनियम की धारा 47 (क) को बीते साल अक्टूबर में खत्म कर दिया है। साथ ही आवासीय, व्यावसायिक प्लाॅट, फ्लैट, डुप्लेक्स और कृषि भूमि की बिक्री की नई गाइडलाइन बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके चलते पंजीयन विभाग द्वारा बनाई जा रही नई प्रॉपर्टी गाइडलाइन की वैधता पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं वाणिज्यिककर विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव मप्र स्टाम्प अधिनियम संशोधन 2017 में गाइडलाइन बनाने के नियम जल्द जारी करने का दावा कर रहे हैं।

नई गाइडलाइन बनाने का काम आखिरी चरण में

पंजीयन एवं मुद्रांक कार्यालय के अफसरों ने बताया कि भोपाल समेत सभी जिलों में जमीन की कीमतें तय करने नई गाइडलाइन बनाने का काम आखिरी चरण में हैं। भोपाल में उपमूल्यांकन समिति ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली जमीन की नई कीमतों के प्रस्ताव (गाइडलाइन) जिला मूल्यांकन समिति को भेज दिए हैं।

कलेक्टर गाइडलाइन बनवाने काम अवैध तरीके से

पंजीयन विभाग से रिटायर हुए एक अफसर ने बताया कि बिना नियमों के प्रॉपर्टी की गाइडलाइन नहीं बनाई जा सकती। तहसीलदार,पटवारी और सब रजिस्ट्रार से विभाग के अफसर कलेक्टर गाइडलाइन बनवाने काम अवैध तरीके से करा रहे हैं। अफसरों के मुताबिक, अक्सर प्रॉपर्टी की बिक्री नई गाइडलाइन लागू होने के पहले बढ़ती है। कारोबारी भी फरवरी-मार्च में एक अप्रैल से प्रॉपर्टी महंगी होने का डर खरीदारों को दिखाते हैं।

नए नियम नहीं आए तो पुराने रेट पर रजिस्ट्री

23 अक्टूबर 2017 को पंजीयन विभाग ने भारतीय स्टाॅम्प (मप्र संशोधन) अधिनियम 2016 में संशोधन कर स्टाॅम्प अधिनियम की धारा 47 (क) को विलोपित करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इसके बाद तय हुआ कि कलेक्टर गाइडलाइन बनाने के लिए नए नियम जल्द बनेंगे। इसका काम भी शुरू किया गया। लेकिन, नए नियम अब तक जारी नहीं हुए हैं।
आगे क्या- ऐसे में यदि 31 मार्च से पहले सरकार द्वारा गाइडलाइन के लिए बनाए जा रहे नियम लागू नहीं किए गए तो एक अप्रैल से पुरानी ही गाइडलाइन पर रजिस्ट्री करना पड़ेगी।

यह है स्टाॅम्प अधिनियम की धारा 47 (क)
स्टाॅम्प अधिनियम की धारा- 47 (क) के तहत कलेक्टर गाइडलाइन बनाने का काम हर साल किया जाता है। इसके अंतर्गत गाइडलाइन बनाना और पुनरीक्षण नियम 2000 के तहत प्रतिवर्ष उपमूल्यांकन समिति और जिला मूल्यांकन समिति और केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड आईजी पंजीयन एवं मुद्रांक के द्वारा जिलों में संपत्ति के बाजार मूल्य निर्धारित करते हैं।

1975 में पहली बार बने थे गाइडलाइन बनाने के नियम
पंजीयन विभाग में 1975 में पहली बार कलेक्टर गाइडलाइन बनाने के लिए नियम बनाए गए थे। 1984 में पहली बार विभाग ने प्रॉपर्टी गाइडलाइन को बनाकर तैयार किया और इसे लागू कर दिया गया। इसके बाद हाईकोर्ट के दखल के लिए एक केस के सिलसिले में इसे कोर्ट ने खत्म कर दिया। इसके बाद संदर्भ सूची के नाम पर विभाग ने कुछ रूल बनाए और तीन साल तक रजिस्ट्री करते रहे।

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