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साधु को मृत बता अकाउंट से निकाले रुपए, जिंदा साबित करने काट रहा चक्कर

मानसिक रोगी बेटे से साइन कराकर फेक डेथ सर्टिफिकेट बनवाकर अकाउंट से 5.50 लाख रुपए निकाले।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 01:56 AM IST
नर्मदा परिक्रमा कर के लौटा तो पता चली थी सच्चाई। नर्मदा परिक्रमा कर के लौटा तो पता चली थी सच्चाई।

गुना (भोपाल). शहर में चौकाने वाला मामला सामने आया । एक साधु ने बर्बाद हो चुके अपने परिवार की सोशल सेफ्टी को लेकर पुलिस से कम्प्लेंट की है ताकि, असली आरोपियों पर कार्रवाई हो सके। दरअसल एक शख्स आठ साल पहलेे जमीन बेचकर नर्मदा परिक्रमा पर चला गया था। जब लौटा तो आरोपियों ने उसे मृत बताकर उसके अकाउंट से लाखों रुपए निकाल लिए। साधु का कहना है इस मामले में उसी के बेटे को आरोपी बना लिया जबकि असली गुनाहगार खुले बाहर घूम रहे हैं। क्या है मामला...

दरअसल, शहर के म्याना इलाके के टकनेरा रहने वाले राम सिंह यादव ने बताया कि उसकी पत्नी की मौत के बाद गांव में बने खेत को 7 जुलाई 2009 में 7.35 लाख में इंद्रभान सिंह यादव की पत्नी गुड़िया बाई को बेच दी थी।

- इंद्रभान सिंह ने ही 5.50 लाख रुपए बैंक में जमा कर दिए। इसके बाद साधु नर्मदा परिक्रमा पर चला गया। जब वह 2012 में वापस लौटा तो बैंक अकाउंट से रकम गायब थी। उसका राजस्थान में डेथ सर्टिफिकेट बनवाकर बैंक से रकम निकाली गई। जब इस मामले में कंप्लेंट की गई तो साल 2015 में सिटी कोतवाली में उसके बेटे रामकुमार यादव और राजस्थान के छबड़ा के रहने वाले सरपंच कन्हैयालाल मीना, सचिव राजेंद्र मीना और बद्री मीना पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हो गया।

- डेथ सर्टिफिकेट बनवाने में पंचायत के कुछ लोगों का रोल था। लेकिन इसके साजिश रचने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई ।

साधू बोला मैं तो अभी भी जिंदा हूं...

- मैं तो जिंदा था, आज से 8 साल पहले 7.35 लाख में जमीन बेचकर नर्मदा परिक्रमा पर चला गया था। 5.50 लाख गढ़ा बैंक में जमा करा दिए थे लेकिन जब लौटा तो पता चला कि मुझे मरा हुआ घोषित कर दिया और पैसा निकाल लिए।

- वारदात के 6 साल बाद एफआईआर दर्ज हुई, उसमें भी मेरे पुत्र को आरोपी बना दिया । जिन्होंने साजिश की थी, वह अब भी खुले में घूम रहे हैं। एक साधु ने बर्बाद हो चुके अपने परिवार की सोशल सेफ्टी को लेकर पुलिस को शिकायत की है, ताकि असली आरोपियों पर कार्रवाई हो सके।

गांव में घर पर भी दबंग ने कब्जा किया
- साधु का कहना है कि उसे गांव में रहने तक को जगह नहीं बची है। दबंग रघुवीर यादव ने उसके मकान पर कब्जा कर लिया है। बेटे की पत्नी भी चली गई है। उसकी बेटियां भी दूसरे के यहां रह रही हैं। साधु भी दूसरे गांव में रहने को मजबूर है।

बैंक और पैसे निकालने में मदद करने वाले अब भी बचे हैं
- फरियादी राम सिंह का कहना है कि उसका पुत्र अनपढ़ था। वह मानसिक हालत ठीक नहीं थी। उसका एफिडेविट लगवाकर पैसा निकाला और उसे ही आरोपी बनाया गया।

- पुलिस को कम्प्लेंट कहा है कि इंद्रभान और बलेश ने ही पूरी साजिश रची और पैसे निकाले थे। लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं गढ़ा बैंक मैनेजर ने भी कोई जांच-पड़ताल किए बिना पैसे कैसे निकाल दिए। इस मामले में भी जांच कर कार्रवाई की मांग उठाई।

साधु ने अपनी जमीन बेच दी थी। साधु ने अपनी जमीन बेच दी थी।