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इस स्कूल में पढ़े हैं सलमान खान, इतनी है इस स्कूल की फीस

इस स्कूल ने देश को कई बड़े नेता, सेना के लिए जनरल, उद्योगपति और फिल्म अभिनेता दिए हैं।

Danik Bhaskar | Dec 27, 2017, 01:23 AM IST
ग्वालियर का सिंधिया स्कूल- सलमान अपने भाई के साथ यहां दो साल तक पढे। ग्वालियर का सिंधिया स्कूल- सलमान अपने भाई के साथ यहां दो साल तक पढे।

ग्वालियर. सलमान खान का 27 दिसंबर को अपना 52 वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। उनका बचपन मध्यप्रदेश में बीता है। बता दें कि सलमान ग्वालियर में सिंधिया स्कूल में अपने भाई अरबाज खान के साथ पढ़े हैं। ये स्कूल 1000 साल पुराने फोर्ट में बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस स्कूल की फीस लगभग 7 लाख 70 हजार 800 रूपए सालाना है जिसका निर्माण 1987 में माधवराव सिंधिया ने करवाया था। टीचर का ब्लेजर पहनकर गए थे मूवी देखने...

( चर्चा में क्यों- सलमान खान 27 दिसंबर को अपना 52 वां बर्थ डे सेलीब्रेट कर रहे हैं )

- सलमान खान इस स्कूल में अरबाज खान के साथ 1977 से 1979 तक पढ़े थे। इस दौरान वे दोनों रानोजी हाउस में रहते थे।
- एक बार सलमान खान सिंधिया स्कूल से बिना बताए अरबाज के साथ अपने टीचर का ब्लेजर पहनकर शोले मूवी देखने गए थे।
- दोनों भाई करीब तीन साल सिंधिया स्कूल में रहे, इस दौरान एक भी शिकायत सामने नहीं आई।
- सलमान ने अपने टीचर को कॉल पर बताया था कि वे बीते कई सालों से सलमान सिंधिया स्कूल के छात्रों से मिलने और अपने बचपन की यादें ताजा करने आना चाहते हैं, लेकिन फिल्मी व्यस्तता में मौका नहीं मिल पा रहा है।

कई हस्तियों ने की है सिंधिया स्कूल में स्टडी
- इस स्कूल ने देश को कई बड़े नेता, सेना के लिए जनरल, उद्योगपति और फिल्म अभिनेता दिए हैं।
- रेडियो सीलोन के उद्घोषक अमीन सयानी जिनकी आवाज सुनने के लिए लोग बेताब रहते थे वे भी यहीं पढ़ें हैं। अमीन 1946 बैच के छात्र थे।
- इसी प्रकार इंडियन एयर फोर्स के अर्जन सिंह भी सिंधिया स्कूल में पढ़ चुके हैं। वे एक मात्र ऐसे अधिकारी थे जिनकी पदोन्नति पांच सितारा रैंक तक हुई।
- सूरज बड़जात्या, नितिन मुकेश, अनुराग कश्यप, अली असगर, सुनील भारती मित्तल आदि यहीं से पढ़े हुए हैं।

इस मंत्री ने फांदी थी स्कूल की दीवार
- संभवतः पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं, जो पढ़ाई के दौरान परेशान होकर 300 फीट ऊंचे दुर्ग पर स्थित सिंधिया स्कूल की दीवार फांदकर भागे थे। बाद में उन्हें वापस स्कूल में पहुंचा दिया। बाद में नटवर सिंह ने कहा था कि मैं जिस मुकाम पर पहुंचा, इसी स्कूल की बदौलत हूं।
- इसी प्रकार माधवराव सिंधिया भी इस स्कूल के स्टूडेंट रहे थे। यहां स्कूल में उन्हें रॉयल ट्रीटमेंट नहीं मिला। साधारण स्टूडेंट्स जैसे रहना पड़ता था।
- इसी दौरान कुछ स्टूडेंट्स ने माधवराव की रैगिंग लेते हुए मारपीट तक कर दी। माधवराव ने इसकी शिकायत अपने पिता जीवाजी राव सिंधिया से की।
- उस समय के महाराज जीवाजी राव ने उल्टे माधवराव को नसीहत दे दी कि इस मामले में वे कुछ हस्तक्षेप नहीं करेंगे। यह उनकी समस्या है और खुद ही निपटना होगा।
- इसके बाद बाद माधवराव ने स्कूल की समस्याओं का खुद ही सामना किया और इसी ने उन्हें काम करने की ताकत दी। इसका जिक्र उनकी बायोग्राफी A Lifeमें भी है।

स्कूल का मेन गेट। स्कूल का मेन गेट।
रानोजी हाउस। रानोजी हाउस।
सिंधिया स्कूल कई एकड़ में फैला हुआ है। सिंधिया स्कूल कई एकड़ में फैला हुआ है।
शाम को अस्ताचल में एक साथ एकत्र होते हैं स्टूडेंट्स शाम को अस्ताचल में एक साथ एकत्र होते हैं स्टूडेंट्स
टीचर और स्टूडेंट्स एक साथ मैस में लंच व डिनर करते हैं। टीचर और स्टूडेंट्स एक साथ मैस में लंच व डिनर करते हैं।