--Advertisement--

कपड़े धोने से मां होती थी बीमार, 14 साल के बेटे ने 1700 में लगा दी ये जुगाड़

8वीं के बच्चे ने जुगाड़ से बनाई साइकिल से चलने वाली वॉशिंग मशीन।

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 06:17 PM IST
School boy makes washing machine at home for mother

भोपाल. 14 साल के दर्शन की मां कपड़े धोने के कारण अकसर बीमार पड़ जाती थीं। कभी जोड़ों में दर्द तो कभी वायरल फीवर। मां की तकलीफ ने दर्शन को इतना दुखी किया कि उसने देसी जुगाड़ लगाकर मां को आराम देने वाला डिवाइस बना डाला। DainikBhaskar.com अपने रीडर्स को इसी अवॉर्ड विनिंग जुगाड़ के बारे में बता रहा है।

साइकिल धोती है कपड़े

- छिंदवाडा जिले के पंधुरना में रहने वाले मोटर मैकेनिक संजय कोले का 14 साल का बेटा दर्शन इन दिनों चर्चा में है। उसने देसी जुगाड़ से कुल 1740 रुपए में वाशिंग मशीन बनाई है।
- इस मशीन को चलाने के लिए बिजली की जरूरत नहीं। बस साइकिल पर पैडल मारिए और कपड़े धुल जाएंगे।

- दर्शन बताते हैं, "हमारी 6 लोगों की फैमिली है। मां ही सभी के कपड़े धोती हैं। अकसर वो कपड़े धोने की वजह से बीमार पड़ जाती थीं। वहीं से मुझे इसे बनाने का आइडिया आया।"

ऐसे बनाई देशी वॉशिंग मशीन

- 14 साल के दर्शन 8वीं के स्टूडेंट हैं। उन्होंने बताया, "मैंने ठान लिया था कि देसी जुगाड़ से वॉशिंग मशीन बनाऊंगा। मशीन कैसे बनेगी और उसके पीछे क्या साइंस लगेगा, यह मेरे दिमाग में क्लीयर था, लेकिन उसका सामान जुटाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे।"
- "मैंने अपनी प्रॉब्लम और आइडिया जब अपने स्कूल टीचर्स के सामने रखा तो उन्हें यह काफी पसंद आया। टीचर्स ने मेरा नाम इंस्पायर अवॉर्ड के नॉमिनेशन्स में भेजा। वहां सिलेक्ट होने के बाद मुझे 5 हजार रुपए इनाम मिले थे।"
- "वॉशिंग मशीन के लिए मैंने एक पुरानी साइकिल, एक ड्रम, दो थाली, एक लोहे की रॉड और एक जाली खरीदी। उसके बाद ड्रम के अंदर इन सभी चीजों को फिट कर दिया। बाद में मैंने इस मशीन को रॉड के जरिए साइकिल से जोड़ दिया।"
- "साइकिल का पैडल चलाने से बिना बिजली के यह मशीन कपड़े की अच्छे से धुलाई करती है। इसे बनाने में डेढ़ महीने का टाइम लगा। टोटल खर्च 1740 रुपए का रहा। अब मेरे घर पर रोज इसी मशीन से कपड़े की धुलाई होती है। इस मशीन को कोई भी चला सकता है।"

मशीन बनाने में लगे ये सामान

पुरानी साइकिल - 350 रुपए
बेयरिंग - 120
प्लेट - 70
जाली - 60
फ़ाइल - 250
वर्कशॉप - 500
ड्रम - 250
कब्जे - 40
रॉड - 100

School boy makes washing machine at home for mother

अतिक्रमण में टूट गई थी दुकान

 

- दर्शन कोले बताते हैं, "मेरा जन्म 13 मई 2004 को पंधुरना गांव में हुआ था। पिता संजय कोले मोटर मैकेनिक और मां वन्दना कोले हाउस वाइफ हैं। पापा एक छोटी सी मोटर रिपेयरिंग की शॉप चलाते थे, लेकिन इसी साल अतिक्रमण दस्ते ने उसे तोड़ दिया। पापा दुकान को दोबारा शुरू करने के लिए कोशिशें कर रहे हैं"
- "दुकान से भी पिताजी की कोई फिक्स इनकम नहीं थी। किसी दिन 300 रुपए तक मिल जाते, तो कभी पापा को खाली हाथ ही लौटना पड़ता  उनके अलावा घर में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं है।"
- "घर में तीन भाई बहन हैं। मैं दूसरे नंबर का हूं। मेरी एक बड़ी बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। एक छोटा भाई है, जो कि दोनों पैरों से दिव्यांग है।"

 

ऐसे आया idea

 

- दर्शन बताते हैं, "मेरे पिता मैकेनिक हैं। गाड़ियों की रिपेयरिंग करने के कारण उनके कपड़े सबसे ज्यादा गंदे होते हैं। मैं रोज मां को हाथ से कपड़े धोते हुए देखता था। कपड़े धुलने के बाद उनके हाथों में तेज दर्द होता था। वह बीमार पड़ जाती थी।"
- "मैंने सोचा कि जुगाड़ से ऐसा कोई डिवाइस बनाया जाए जिससे कपड़े धुलने का काम भी हो और उसे बनाने में ज्यादा पैसे भी खर्च करने की भी जरूरत न हो। मैंने पापा से कहा कि पुराने सामान से वॉशिंग मशीन बनाना चाहता हूं। पहले तो उन्होंने हंस कर टाल दिया। मेरे बार-बार कहने के बाद पिता ने इसके लिए हामी भर दी।"

X
School boy makes washing machine at home for mother
School boy makes washing machine at home for mother
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..