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सीटें गलत तरीके से भरने का मामला, प्राइवेट कॉलेजों से सरकार ने नहीं रिकवर की पेनल्टी

हाईकोर्ट में स्टे वैकेट करने का आवेदन तो कर दिया, लेकिन अभी तक मामला लंबित है।

राजेश शर्मा | Last Modified - Dec 04, 2017, 05:42 AM IST

  • सीटें गलत तरीके से भरने का मामला, प्राइवेट कॉलेजों से सरकार ने नहीं रिकवर की पेनल्टी

    भोपाल.राज्य के छह प्राइवेट मेडिकल काॅलेज पर राज्य प्रवेश एवं शुल्क विनियामक आयोग (एएफआरसी) द्वारा 13.10 करोड़ रुपए जुर्माना लगाए जाने पर कॉलेज संचालकों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है। जबकि मई 2016 में सुप्रीम कोर्ट के डीमेट सिस्टम समाप्त करने के फैसले के साथ ही जुर्माना वसूल करने का रास्ता साफ हो गया था। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने एएफआरसी एक्ट को वैधानिक करार दिया था। इसके आधार पर हाईकोर्ट में स्टे वैकेट करने का आवेदन तो कर दिया, लेकिन अभी तक मामला लंबित है।

    - आयोग की तरफ से सुनवाई कराकर जल्दी फैसला कराए जाने के कोई प्रयास नहीं हुए। जबकि राज्य सरकार के वर्तमान महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव, आयोग की तरफ से केस में पैरवी कर रहे है।

    - आयोग ने इन काॅलेजों पर गलत तरीके से 158 एमबीबीएस सीटें भरने की जांच के बाद यह जुर्माना लगाया गया था।
    - प्राप्त जानकारी के अनुसार छह प्राइवेट मेडिकल कालेजों ने वर्ष 2013-2014 सत्र के दौरान सरकारी कोटे की 158 एमबीबीएस सीटें नियमों के विरुद्ध अवैध रूप से भर दी थीं।

    - इस संबंध में व्हिसल ब्लोअर आनंद राय ने आयोग से शिकायत की थी। इस शिकायत पर मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर इन काॅलेजों पर जुर्माना लगाने का निर्णय आयोग ने लिया था।

    - आरोप था कि इन मेडिकल कॉलेजों के संचालकों ने कॉलेज स्तर की काउंसिलिंग के जरिए इन सीटों को भरा था और इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग को अंधेरे में रखा था।

    - काॅलेजों ने आखिरी चरण की प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) काउंसिलिंग में अपने-अपने कॉलेजों की खाली सीटों की रिपोर्ट राज्य सरकार को नहीं दी थी।

    - इस कारण सरकारी कोटे की खाली सीटों को भरने के लिए राज्य सरकार काउंसिलिंग नहीं करा सकी थी।

    हाईकोर्ट से मिला था स्टे, जुर्माना वसूली पर लगाई थी रोक
    - आयोग के फैसले को काॅलेज संचालकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसमें आधार बनाया गया था कि प्राइवेट मेडिकल कालेजों ने एएफआरसी एक्ट की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई चल रही है। इस पर कोर्ट ने जुर्माना वसूलने पर रोक लगा दी थी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई 2016 को एक अहम फैसले में डीमेट सिस्टम को समाप्त करते हुए एएफआरसी एक्ट की वैधानिकता को बरकरार रखा था।सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से स्टे वैकेंट कराने के लिए अभी तक याचिका दायर नहीं की।

    स्टे हटाने मैंने दायर की याचिका सरकार ने नहीं किए प्रयास
    - आयोग में शिकायत करने वाले डाॅ. आनंद राय का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आधार बनाकर मैने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्टे हटाने की अपील की है।

    - जबकि यह काम राज्य सरकार का है। सरकार की तरफ से स्टे वैकेट कराने के कोई प्रयास नहीं हुए। हमने वर्ष 2013 पीएमटी में 200 सीटों को अवैध तरीके से भरे जाने की शिकायत एसटीएफ में की थी, कोई कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट में इसको लेकर एक अलग याचिका दायर की।
    - जिसकी सुनवाई के दौरान सरकार ने जवाब दिया था कि अवैध सीटें भरने के मामले में छह मेडिकल कालेजों पर जुर्माना लगाया गया है। लेकिन सरकार जुर्माना राशि वसूल नहीं कर रही है। हमने सीबीआई में भी यह शिकायत दर्ज कराई है।

    हाईकोर्ट में आवेदन किया है, सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई
    - राज्य के महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव का कहना है कि कॉलेजों से जुर्माना वसूल करने पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी।

    - जब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया, उसके बाद हमने हाईकोर्ट में आवेदन कर स्टे वैकेट करने की अपील की है। लेकिन सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

    - जब उनसे पूछा गया कि डेढ़ साल से मामला लंबित है, स्टे वैकेट कराने के प्रयास क्यों नहीं हुए? इस पर उनका कहना है कि हाईकोर्ट कब सुनवाई करेगा, यह हमारे हाथ में नहीं है।

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Web Title: Seats Wrongful Filling, Not Interested In Collecting Penalties
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