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जिंदगी जीने की वजह बताकर सुसाइड करने से रोक रही है ये लेडी अफसर

बैतूल की जिला पंचायत सीईओ शीला दाहिमा ने खुद की लिखी कविता को आवाज दी और यूट्यूब पर अपलोड किया।

Danik Bhaskar | Mar 07, 2018, 07:07 PM IST
बैतूल की सीईओ व अपर कलेक्टर शीला दाहिमा आत्महत्याओं को रोकने की कोशिश में जुटी हैं। बैतूल की सीईओ व अपर कलेक्टर शीला दाहिमा आत्महत्याओं को रोकने की कोशिश में जुटी हैं।

भोपाल. इतनी सस्ती नहीं है मेरी जिंदगी कि किसी बात पर मैं अपनी दे दूं जान... ये पंक्तियां जिंदगी से हार चुके लोगों के लिए जीने का सहारा बन रही हैं। उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकाल कर उम्मीद का कारण बन रही हैं। लोगों को निराशा से बाहर निकालने की इसी कोशिश में अपर कलेक्टर व बैतूल की जिला पंचायत सीईओ शीला दाहिमा लगी हैं।

-समाज में बढ़ रहीं आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए इस अफसर ने मुहिम चलाई है। वह लोगों को अपनी कविता और आवाज के माध्यम से आत्महत्या नहीं करने की प्रेरणा देती हैं। सीईओ ने अपनी इस कविता का वीडियो यू-ट्यूब पर अपलोड किया है। इसे काफी पसंद भी किया जा रहा है।

-जिला पंचायत सीईओ शीला दाहिमा पहले कई गीतों को अपनी आवाज दे चुकी हैं। लोगों को जल संरक्षण का महत्व बताने के लिए भी उन्होंने गीत लिखा था। इस बार सीईओ ने आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्हें प्रेरित करने के लिए कविता लिखी है। कविता की लाइनों में जिंदगी से हौसलों से लड़ने की प्रेरणा देकर जीवन का महत्व बताया है।

समय से पहले न बुझ जाए जिंदगी का दीया...

-सीईओ शीला दाहिमा ने इस कविता के पहले खुद की आवाज में कहा जिंदगी कई बार बहुत कठिन होती है, बहुत परीक्षाएं लेती है। ऐसा लगने लगता है कि क्या करना है इस जिंदगी का। क्यों जिएं, कोई राह नजर नहीं आती, कुछ सूझता नहीं। चारों ओर निराशा- निराशा ही होती है और सबसे आसान लगता है मर जाना। लेकिन क्या सचमुच कोई ओर रास्ता नहीं होता, कोई उम्मीद नहीं होती है। क्या कोई कठिनाई हमारी आशाओं को खत्म कर सकती है। क्या सच में मरने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है। होता है जीने का विकल्प। जीना खुद के लिए और औरों के लिए ताकि बुझ न जाए किसी का जिंदगी का दीया...।

प्रेरक कविता

-आत्महत्या करने वालों को प्रेरित करेगी जिपं सीईओ की कविता, वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर किया अपलोड यू-ट्यूब पर दो दिनों में 700 लोगों ने देखा है। सीईओ दाहिमा द्वारा लिखी कविता को स्वयं की आवाज में रिकार्ड कर वीडियो बनाया है। इस वीडियो को उन्होंने यू-ट्यूब पर अपलोड किया है। इस कविता को लोग बहुत पसंद कर रहे हैं। यू-ट्यूब पर दो दिनों में इस वीडियो को सात सौ से अधिक लोग देख चुके हैं।

ये है उनकी कविता...
जिंदा रहना है मुझे खुद और औरों के लिए, इतनी सस्ती नहीं जिंदगी कि किसी बात पर दे दूं अपनी जान.....

इतनी सस्ती नहीं है मेरी जिंदगी की किसी बात पर मैं अपनी जान ही दे दूं।
माना की मुश्किलें मेरे हौसलों पर भारी पड़ती हैं, पर मैंने तोड़ा नहीं है अपने हौसलों को।
मेरे जैसे कमजोर पड़ते हौसले वालों को भी तो मुझे हौसला देना होगा।

मेरी जान सिर्फ मेरे लिए नहीं है, इससे कई और जानें भी तो जुड़ी हैं...।
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वह गीत लिखती हैं और उसे खुद की आवाज से सजाकर यूट्यूब पर शेयर करती हैं। वह गीत लिखती हैं और उसे खुद की आवाज से सजाकर यूट्यूब पर शेयर करती हैं।
उनकी चिंता है कि लोगों को सुसाइड करने से रोका जाए। उनकी चिंता है कि लोगों को सुसाइड करने से रोका जाए।
वह लिखती हैं और सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं। वह लिखती हैं और सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं।
बैतूल की सीईओ हैं शीला दाहिमा। बैतूल की सीईओ हैं शीला दाहिमा।
गीत लिखती हैं और फिर उसे आवाज देती हैं। गीत लिखती हैं और फिर उसे आवाज देती हैं।
उनका खुद का यूट्यूब चैनल है। उनका खुद का यूट्यूब चैनल है।