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12 गांव में 4 पीढ़ियों की 110 से ज्यादा महिलाओं को कहते डायन, अब बेटियों ने कही ये बात

जापुर-राजगढ़ जिले के 12 गांवों की 110 से ज्यादा महिलाओं को डायन घोषित कर उनको कलंकित करने का मामला सामने आया है।

Danik Bhaskar | Dec 10, 2017, 06:46 AM IST

शाजापुर(भोपाल)। शाजापुर-राजगढ़ जिले के 12 गांवों की 110 से ज्यादा महिलाओं को डायन घोषित कर उनको कलंकित करने का मामला सामने आया है। इन महिलाओं से जन्मी बेटियों को भी डायन ही मान लिया गया। चार पीढ़ियों से डायन होने का कलंक झेल रही महिलाओं की कुछ बेटियां शिक्षित हुईं और उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई है।

- शनिवार को एसपी शैलेंद्रसिंह चौहान से मुलाकात कर युवतियों ने अपनी माताओं पर लगे कलंक को मिटाने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या करने की चेतावनी दे डाली, ताकि उनकी बेटी को समाज में डायन का कलंक झेलना पड़े। सभी महिलाएं एक ही समाज (पाटीदार खड़क समाज) की हैं।

- नर्सिंग मेडिकल की तृतीय वर्ष की छात्रा गायत्री पाटीदार बताती हैं कि परिवार में जन्मी बेटियों को डायन के नाम पर समाज में महिलाओं का दर्जा भी छीना जा रहा है। हाथों से छुआ खाना भी फेंक दिया जाता है। हमें डायन बताने वाले ही हमारे भाइयों से विवाह के लिए अपनी बेटियों के प्रस्ताव भेजते हैं। ताने और मानसिक प्रताड़ना के चलते गांव की महिलाओं में हीन भावना पैदा होने लगी। यदि उन पर लगा कलंक प्रशासन नहीं मिटा सकता तो बेटियों की हत्या करने की अनुमति दी जाए।


कलंक से निजात के लिए लड़ाई लड़ना जरूरी
- ग्राम कढ़वाला से ग्राम भ्याना में ब्याही कमला ने बताया उनकी मां शैतानबाई और नानी कस्तूरबा को भी इसी अपमान से गुजरना पड़ा। इनके पूर्वजों ने ऐसा ही अपमान सहा। मेरा जीवन तो निकल गया, बेटियों को इस कलंक से निजात दिलाने लड़ाई लड़ना जरूरी है।

- 21 वर्षीय रचना पाटीदार बताती हैं कि मैंने मां को भी इसी अपमान में जीते देखा। इसके पहले नानी के बारे में भी ग्रामीण महिलाएं ऐसे ही आरोप लगाती आईं।

नामजद शिकायत
ज्ञापन में युवतियों ने लक्ष्मीनारायण पाटीदार, शिवनारायण, देवकरण, नर्मदा प्रसाद, दुर्गाप्रसाद, लीलाबाई, कौशल्या बाई, चंद्राबाई, पार्वती बाई, कुसुम बाई आदि पर डायन कहने, इस कुप्रथा को फैलाने का आरोप लगाते हुए एसपी से शिकायत की।