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हाईकोर्ट का आदेश , ऐसे नहीं रोकी जा सकती रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन

विभागीय कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन रोकने के आदेश तभी किए जा सकते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 13, 2017, 06:21 AM IST

  • हाईकोर्ट का आदेश , ऐसे नहीं रोकी जा सकती रिटायर्ड कर्मचारी की पेंशन

    भोपाल.किसी भी विभागीय कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद उनकी पेंशन रोकने के आदेश तभी किए जा सकते हैं, जब वह ‘गंभीर कदाचरण’ का पेंशन नियम 1976 के अंतर्गत दोषी पाया गया हो। उस कर्मचारी को इस संबंध में स्पष्टीकरण देने का पूरा मौका दिया गया हो। जबलपुर हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के बाद दिए आदेश में यह कहा। मंगलवार को दिए आदेश में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पेंशन नियम 1976 के अंतर्गत सेवा निवृत्त कर्मचारी ‘गंभीर कदाचरण’ का दोषी तभी होगा जब या तो वह किसी आपराधिक कृत्य में न्यायालय द्वारा दोषी सिद्ध पाया गया हो अथवा वह आफिशियल सीक्रेट्स अधिनियम की किसी धारा के उल्लंघन का दोषी पाया गया हो।

    - हाईकोर्ट की जज कु. वंदना कसरेकर की एकलपीठ ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के पूर्व संयुक्त संचालक वीपी मालवीय (दिवंगत) के मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए।

    - हाईकोर्ट ने भोपाल विकास प्राधिकरण की याचिका को अंतिम रूप से स्वीकार करते हुए नगरीय प्रशासन विभाग, राज्य शासन के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें वीपी मालवीय को मई 2016 में सेवा से बर्खास्त करते हुए , उनकी 50 प्रतिशत पेंशन स्थाई रूप से रोक दी गई थी।

    - उच्च न्यायालय द्वारा 25 पन्नों के आदेश में यह कहा। मालवीय की तरफ से एडवोकेट सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पैरवी की।हाईकोर्ट ने शासन को यह भी आदेश दिए कि मालवीय को संपूर्ण पेंशन 6 प्रतिशत चक्रवर्ती ब्याज के साथ 3 माह के अंदर शासन द्वारा भुगतान किया जाए।

    यह है पूरा मामला

    - स्व. मालवीय के विरुद्ध शासन ने सन् 2000 में एक विभागीय जांच शुरू कराई थी। जिसमें उन पर आरोप यह था कि उन्होंने संयुक्त संचालक रायपुर विकास प्राधिकरण के पद पर रहते हुए 1996 से वर्ष 2000 के बीच में नियमों के विरुद्ध जाकर विकास अनुमतियां निजी आवेदकों को जारी कीं।

    - यह विभागीय जांच पिछले साल तक चली। नगरीय प्रशासन, आवास एवं पर्यावरण विभाग ने मई 2016 में मालवीय को बर्खास्त करते हुए उनकी 50 प्रतिशत पेंशन स्थाई रूप से रोकने के भी आदेश दिए थे। इसे चुनौती देते हुए मालवीय हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी।

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Web Title: The Order Of The High Court, Can Not Be Stopped
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