--Advertisement--

सॉफ्टवेयर बताएगा हंसने के दौरान कितने दांत दिखें और कितने नहीं

37वीं आईडीए एमपी स्टेट डेंटल कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञ बोले।

Danik Bhaskar | Dec 17, 2017, 07:22 AM IST

भोपाल। लोग खुलकर हंस सकें। हंसने के दौरान कितने दांत दिखे और कितने न दिखे। इसके लिए नई तकनीक आ गई है। अब सॉफ्टवेयर के माध्यम से इलाज के पहले देखकर सर्जरी से बदलाव करा सकते हैं। भोपाल में दंत रोग विशेषज्ञों के यहां पर हर दिन स्माइल मेंे बदलाव को लेकर 10 से 12 लोग पहुंच रहे हैं। डिजिटल तकनीक से होने लगी स्माइल डिजाइनिंग से यह संभव हो गया है।

- शनिवार को आईडीए के नेशनल प्रेसिडेंट चुने गए डॉ. दीपक मखीजानी ने कही। वे शनिवार को 37वीं आईडीए एमपी स्टेट डेंटल कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि डिजिटल टेक्नोलॉजी ने अब डेंटिस्ट्री में भी कदम रखा गया है। इसकी मदद से अब डॉक्टर्स लोगों की स्माइल को बेहतर बना सकते हैं।

- लगभग 30 साल बाद यह दूसरा मौका है जब कोई मप्र का व्यक्ति आईडीए का नेशनल प्रेसिडेंट चुना गया है। इससे पहले 1988 में डॉ. वीपी जलीली मप्र से आईडीए के नेशनल प्रेसिडेंट चुने गए थे। कॉन्फ्रेंस में देशभर से 150 डेंटल स्टूडेंट्स, 150 डेलीगेस्ट और 200 एक्सपर्ट डॉक्टर्स शामिल हुए। इंडियन काउंसिल ऑफ डेंटल रिसर्च के प्रेसिडेंट पद्मश्री डॉ. महेश वर्मा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

अपना रहे हैं डेंटिस्ट्री से जुड़े नए तरीके
- इंडियन डेंटल एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. विश्वास पुराणिक ने बताया कि हमारे देश में डेंटिस्ट्री से जुड़े नए-नए आधुनिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। अब हम दांत को इम्प्लांट करने की तकनीक अपना रहे हैं। लेकिन, अभी भी तकनीक के मामले में भारत 90 प्रतिशत से अधिक विदेशों पर निर्भर है।

- डेंटिस्ट्री से जुड़े सभी इक्वीपमेंट्स विदेशों में ही बनते हैं। हाल ही मुंबई में देश की पहली लैब (एपीजे अब्दुल कलाम एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर) शुरू हुई है। उम्मीद है कि अब हम इक्विपमेंट खुद ही तैयार कर पाएंगे।