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​स्कूल नहीं गए, माता-पिता का मुंह नहीं देखा, पेंटिंग से क्लीन इंडिया का मैसेज दे रहे ये बच्चे

पुराने डाइट भवन की जर्जर दीवारों पर बनाई जा रहीं सुंदर व प्रेरणादायी पेंटिंग्स।

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 04:57 AM IST
these kids giving the message of clean India from painting

राजगढ़ (भोपाल). पुराने डाइट भवन की जर्जर दीवारों पर बनाई जा रहीं सुंदर व प्रेरणादायी पेंटिंग्स। जिसकी नजर पड़ती है वो कुछ देर रुककर तारीफ करना नहीं भूलता। इन चित्रों को उकेरने वाले और कोई नहीं इसी सरकारी जर्जर इमारत में चलने वाले बॉयज हॉस्टल के बच्चे हैं। खास बात यह है कि इन बच्चों में कई ऐसे हैं जिनमें से कई ने अपने माता-पिता का मुंह नहीं देखा। कुछ तो छह महीने पहले तक मजदूरी कर गुजारा करते थे।

- ऐसे 73 बच्चों को यहां रेस्क्यू कर यहां लाया गया है। हॉस्टल में पढ़ाई व खेलकूद की सुविधा के साथ अनुशासन भी ऐसा है कि ये बच्चे किसी बड़े स्कूल के बच्चों से कमतर नजर नहीं आते।

- खास बात ये है कि छह महीने की ट्रेनिंग के बाद कलेक्टर कर्मवीर शर्मा और सीईओ जिला पंचायत प्रवीण सिंह सोमवार को खुद इनके अभिभावक बनेंगे और उन्हें पहली से पांचवी तक की कक्षा में प्रवेश दिलाएंगे।

कोई मजदूरी करता था तो किसी की पढ़ाई का जिम्मा पड़ोसियों ने उठाया
ओम प्रकाश

- लसूड़ली लोधा का रहने वाला है। छठवी में पढ़ता है। इसके माता-पिता दोनों नहीं हैं। ओम बताता है कि उसने स्कूल क्या होता है पता नहीं था। कभी पढ़ाई कर पाऊंगा यह सोचना भी नहीं था। पड़ोसियों ने उसकी पढ़ाई का जिम्मा उठाया। आज वह खुश है।


विशाल

- उदनखेड़ी के विशाल की मां नहीं है। पिता मजदूरी के लिए पचोर में रहते थे। उसने भी स्कूल नहीं देखा।


महेश और मोहनपुरा

- पेंटिंग्स में रंग भरने वाले टिटोड़ी गांव के ये होनकार अनाथ है। छह महीना पहले तक मजदूरी करते थे। अब इच्छा है कि यह चित्रकारी में नाम कमाएं।

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these kids giving the message of clean India from painting
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