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‘रोशनी एक जिंदगी’ फिल्म में झलकी किसान की पीड़ा, इमोशनल हुई ऑडियंस

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की तीसरी शाम बुंदेलखंडी फॉक डांस, बरेदी डांस, अखाड़ा और राई के नाम रही।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 08:10 AM IST
इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल प्रस्तुति देते आर्टिस्ट। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल प्रस्तुति देते आर्टिस्ट।

खजुराहो (मध्यप्रदेश). पर्यटन नगरी खजुराहो में चल रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की तीसरी शाम बुंदेलखंडी फॉक डांस, बरेदी डांस, अखाड़ा और राई के नाम रही। विशाल रंगमंच पर लोकल कलाकारों ने जैसे ही ढोलक की थाप और नगड़िया की टंकार पर सामूहिक रूप से लोकडांस राई पेश किया। ऑडियंस से खचाखच पांडाल तालियों से गूंज उठा। लोकल कलाकारों ने फॉक डांस अखाड़ा का मनोहारी प्रदर्शन किया। इसके साथ ही फॉक डांस बरेदी पर श्रीराधा-कृष्ण ने गोपी ग्वालों के साथ डांस करके सबके मन मोह लिए। इसके बाद मुंबई के थिंक इंटरटेनमेंट ग्रुप के कलाकारों ने एक से बढ़ कर एक एकल व सामूहिक डांस पेश कर सबको दातों तले उंगली दबाने को विवश कर दिया। पर्दे पर किसान की पीड़ा देख रोने लगे दर्शक...

- फिल्म फेस्टिवल के दौरान मेला ग्राउंड पर बनाई गई टपरा टाॅकीज में किसानों की समस्याओं पर आधारित फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

- तीसरे दिन किसानों की समस्या पर आधारित फिल्म रोशनी एक जिंदगी का प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म में किसान के संघर्ष के साथ प्रशासन व शासन से मिलने वाली उपेक्षा को बड़े ही मार्मिक अंदाज में दर्शाया गया।

- फिल्म में किसानों की पीड़ा देख यहां आए सैकड़ों ऑडियंस एवं किसानों की आंखें छलछला उठीं। कई लोग अति भावुक हो उठे। टपरा टॉकीज के बाहर कृषि विभाग की प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।

- दोपहर में इस टपरा टॉकीज का फिल्म अभिनेता गुलशन पांडेय ने उदघाटन किया। इसके अलावा गांधी चौराहा पर टपरा टॉकीज में महिलाओं पर आधारित, शिव सागर तालाब की टाकीज पर भारतीय जवानों, डांस फैस्टीवल ग्राउंड पर क्षेत्रीय फिल्मों एवं पायल वाटिका की टपरा टॉकीज पर बॉलीवुड की फिल्मों का प्रदर्शन किया गया।

बुंदेलखंड के स्थलों, महापुरूषों पर फिल्म बनाएं, मैं पैसा लगाऊंगा: त्यागी

- इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने लखनऊ से आए बिजनेसमैन मयंक त्यागी ने मंगलवार को फिल्म मेकर्स के कंवर्सेशन के दौरान बेकाकी से कहा कि बुंदेलखंड के ऐतिहासिक स्थलों, महापुरूषों पर फिल्में बनाइए, मैं इस्पोंसर बनूंगा। दरअसल कंवर्सेशन के दौरान तमाम बड़े फिल्मकारों के बीच जब यह बात रखी गई कि बुंदेलखंड पर फिल्मों का निर्माण हो, तो सभी चुप रहे। तभी युवा बिजनेसमैन मयंक त्यागी ने कहा कि हमें मुंबई वालों पर नहीं, अपने ऊपर निर्भर होना पडेगा। तभी हम बुंदेलखंड के एेतिहासिक किरदारों को फिल्मा सकते हैं।

- हमारी फ़िल्म मुंबई में बैठ कर नहीं बल्कि खजुराहो, झांसी, पन्ना ललितपुर में ओरिजनल लोकेसन पर बनाना होंगी। बुंदेलखंड में सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर अच्छी खासी संख्या में हैं। यहां आज भी कई एेतिहासिक किले हैं, रमणीक स्थल हैं, जहां शूटिंग की जा सकती है।

- अगर कोई महाराज छत्रसाल, आल्हा ऊदल, झांसी की रानी अथवा चंदेल राजाओं पर फ़िल्म निर्माण करना चाहता है तो वह पूरा इस्पांेसर करने को तैयार हैं। लेकिन मेरी पहली शर्त यही रहेगी कि फिल्म की शूटिंग बुंदेलखंड में आकर करना होगी, मुंबई में नहीं। श्री त्यागी ने कहा कि उन्होंने कहा फिल्में इस्पोंसर करने की बात खजुराहो आए देश के बडे फ़िल्म प्रोड्यूसर रमेश सिप्पी, शेखर कपूर, मन मोहन शेट्‌टी, गोविंद निहलानी से भी की है और उन्हें यहां फिल्म निर्माण के लिए आमंत्रित भी किया है।