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मर्जर का मर्ज: 3 साल से सिर्फ बातें, अब नए एक्ट का बहाना

राजधानी में मर्जर के मामले और सिंधी विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक देने के मामले में नई बात सामने आई है।

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2017, 05:23 AM IST
three years, now the excuse of new act

भोपाल . राजधानी में मर्जर के मामले और सिंधी विस्थापितों को जमीन का मालिकाना हक देने के मामले में नई बात सामने आई है। नया एक्ट बना रही सरकार ने तीन साल पहले शीतकालीन सत्र के दौरान 15 दिसंबर 2015 को विधानसभा में वादा किया था कि जल्द ही ये मामले निपटाए जाएंगे। सरकार ने उस समय भू राजस्व संहिता बिल कुछ संशोधनों के साथ पारित भी कराया था। तब तत्कालीन राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, विधायक रामेश्वर शर्मा व विश्वास सारंग समेत कांग्रेस विधायकों ने भी मार्मिक दलीलें रखी थीं कि 60-60 साल से लोग मकान बनाकर रह रहे हैं, लेकिन उन्हें जमीन का हक नहीं मिला। जिन लोगों ने 1947 में विभाजन का दर्द भोगा वे आज आवास को लेकर भी यही महसूस कर रहे हैं।

- इन दलीलों के बाद तब सदन में सरकार की ओर से कहा गया था कि वर्षों से विस्थापित लोगों को मालिकाना हक देने के लिए ही बिल में संशोधन ला रहे हैं। लेकिन तीन साल होने के बाद अब फिर जमीन के मालिकाना हक के लिए सरकार नए नियमों को लाने की बात कर रही है। लगातार हो रही लेट-लतीफी को लेकर सिंधी सेंट्रल पंचायत ने मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाया है।

करीब तीन लाख लोगों से जुड़ा मामला

बढ़ता ही गया मर्ज...
- अक्टूबर 2007 में तत्कालीन कलेक्टर के आदेश से बंद हुई बिल्डिंग परमिशन, बैंक ने लोन देना भी बंद किया।
- जनवरी 2008 में नवाब परिवार के सदस्यों को नोटिस जारी।
- 05 अगस्त 2011 को मर्जर की जमीन पर काबिज हजारों लोगों को प्रशासन ने दिया नोटिस।
- 21 अगस्त 2011 को घर बचाओ संघर्ष समिति की बैठक, कानूनी लड़ाई का मसौदा तैयार।
- 28 अगस्त 2011 को सीएम ने बैरागढ़ पहुंचकर कहा-मर्जर से राहत देंगे।
- 13 जनवरी 2017 को मुख्यमंत्री ने मर्जर मामले में अफसरों की बैठक लेकर राहत का ब्लू प्रिंट बनाने के आदेश दिए।

2001 और 2007 के आदेश निरस्त हों तो सुलझ सकता है मामला, फर्जी मामलों की जांच हो सकेगी
- इस बीच राजस्व विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो तीन साल पहले पारित हुए बिल के साथ पुराने कानूनों से ही राज्य सरकार तमाम मामले निपटाना चाहे तो यह हो सकता है। बशर्ते कलेक्टर भोपाल के 21 अगस्त 2001 तथा 7 नवंबर 2007 के आदेश को निरस्त कर दिया जाए।

- इनमें पुराने कब्जों को अतिक्रमण बताकर भारी भरकम जुर्माने का जिक्र है। ये आदेश रद्द होते हैं तो फर्जी मामलों की जांच भी आसानी से हो सकेगी। भोपाल संभाग का 1974 और न्यायालय दशम अपर जिला न्यायाधीश एसएन शर्मा का वर्ष 2001 का फैसला मर्जर प्रभावितों के पक्ष में है।

- सूत्रों का यह भी कहना है कि जिन लोगों ने नजूल से विधिवत एनओसी लेने के बाद नगर निगम से नियमानुसार बिल्डिंग परमिशन ली है और मकान बनाए हैं। साथ ही नियमित रूप से अपने-अपने मकानों को प्रॉपर्टी टैक्स भर रहे हैं, उन्हें राहत मिल जाएगी। सिंधी विस्थापितों के मामले में पूर्व के आदेशों से सिर्फ विस्थापित शब्द हटा दिए जाए तो मामले हल हो जाएंगे।

15 दिसंबर 2015 को बिल के संबंध में जनप्रतिनिधियों ने सदन में यह दी थी दलीलें

- वार्ड 1 से 6 तक, ईदगाह समेत मंत्री उमाशंकर गुप्ता के क्षेत्र में भी यह लोग रहते हैं। सतना में भी कुछ होंगे। ये लोग 60-60 सालों से विभाजन का दर्द सह रहे हैं। अब मकान का है। इनके साथ न्याय होना चाहिए। अचानक एक आदेश आता है और मर्जर नाम का एक कानून और एक्ट बन जाता है। भू राजस्व संहिता बिल में संशोधन के बाद उन्हें न्याय मिलेगा।- रामेश्वर शर्मा

- आज का दिन मप्र के इतिहास के लिए गौरव का दिन है। पूर्व पाकिस्तान से आए लोगों को नए बिल से मालिकाना हक मिलेगा। लेकिन कलेक्टर ने 2001 के आदेश से स्थिति गड़बड़ा गई। नए संशोधन से बैरागढ़-ईदगाह के लोगों को स्थाई पट्टा मिल जाएगा। भले वो जमीन का व्यावसायिक व शैक्षणिक उपयोग करें, उन्हें भी राहत मिलेगी। इटारसी-होशंगाबाद के लोगों को भी लाभ मिलेगा।- विश्वास सारंग

- हम संभागीय आयुक्त को अधिकार दे रहे हैं ताकि छोटे मामले निपट जाएं। जो विस्थापित हैं तो उनके लिए भी बिल में प्रावधान है। हम ये सुधार इसलिए कर रहे हैं कि गलत लोग या माफिया इसका लाभ न ले पाएं। इसलिए सर्वसम्मति से यह बिल पारित किया जाए। - रामपाल सिंह

सिंधी सेंट्रल पंचायत का तर्क...

- सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष व विस के पूर्व प्रमुख सचिव भगवान देव इसरानी ने कहा कि सीएम को पूरे मसले से अवगत कराने का प्रयास किया जा रहा है। जब मामले सुलझ जाएं तो एक्ट से विस्थापित शब्द हटा दिए जाए। पंचायत ने नवंबर में ही मुख्यमंत्री को दो पत्र लिखे हैं।

जल्द करेंगे निपटारा...

- राजस्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री खुद इन मामलों को जल्द निपटाना चाहते हैं। सिंधी पंचायत के पत्र की जानकारी नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट है कि मर्जर और सिंधी विस्थापितों के अलग-अलग मामले के लिए प्रावधान किए जा रहे हैं। विशेष अभियान चलाकर काम करेंगे। कानूनी राय ली जा रही है।

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