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2 महीने पहले टूटकर तालाब में गिरे सिंघाड़े, अब पानी में बेल खोजकर निकाल रहे

तालाब की सतह से निकालना समुद्र में मोती खोजने के समान माना जाता है।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 07:47 AM IST

देवरी. 36 एकड़ में फैले देवरी के सबसे बड़े तालाब से मछुआ समाज के लोग जावई सिंघाड़े निकाल रहे हैं। रोज सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक 7 घंटे में एक व्यक्ति बमुश्किल 100 सिंघाड़े निकाल पाता है। नाव में बैठकर तालाब की सतह में पड़ी बेल को देखना बड़ा ही मुश्किल काम होता है जो सिर्फ मछुआ समाज के लोग ही कर सकते हैं। बताया जाता है कि जावई सिंघाड़े को तालाब की सतह से निकालना समुद्र में मोती खोजने के समान माना जाता है।

बेल के नीचे लगा होता है जावई सिंघाड़ा

मछुआ समाज के लोग नाव में बैठकर पानी में टकटकी लगाते हैं और तालाब की सतह में सिंघाड़े से निकली छोटी सी बेल को देखकर करीब 10 फीट लंबे डंडे में कुंदा बनाकर उस बेल को ऊपर खींचते हैं। बेल के नीचे वह सिंघाड़ा लगा होता है जो दो महीने पहले टूटकर पानी में गिर गया था, जिसे जावई सिंघाड़ा कहा जाता है।