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टीसीएस के दबाव में सरकार, जितना काम होगा उतना ही करेंगे भुगतान

टीसीएस लिमिटेड के काम बंद करने के अल्टीमेटम के बाद राज्य सरकार दबाव में आ गई है।

Danik Bhaskar | Dec 21, 2017, 07:48 AM IST

भोपाल . मप्र में लंबे समय से काम कर रही टीसीएस लिमिटेड के काम बंद करने के अल्टीमेटम के बाद राज्य सरकार दबाव में आ गई है। कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया है कि आगे भी कम्प्यूटराइजेशन का काम इसी कंपनी से कराया जाएगा। जहां तक कंप्यूटराइजेशन के प्रोजेक्ट की राशि के भुगतान का सवाल है तो जैसे-जैसे टीसीएस काम करती जाएगी, राशि उसी अनुपात में जारी होगी। एकमुश्त पैसा नहीं दिया जाएगा। टीसीएस पर सात करोड़ रुपए की पेनल्टी को लेकर जरूर तय किया गया है कि यह बरकरार रहेगी। इसे लौटाया नहीं जाएगा।

- टीसीएस ने सरकार को कहा था कि उसे वित्तीय मदद की जाए। साथ ही पेनल्टी समेत प्रोजेक्ट की शेष राशि जरूरत के अनुसार दी जाए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वह मप्र में काम नहीं कर पाएगी। क्योंकि अभी तक सिर्फ 31 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया है। इसी के बाद यह मामला कैबिनेट में गया।

- टीसीएस वेतन, पेंशन, ई-भुगतान, डीबीटी, डाटा सेंटर, डिजास्टर रिकवरी सेंटर और ट्रेजरी के कम्प्यूटराइजेशन का काम मप्र में कर रही है। इसे वर्ष 2010 में उसे यह काम दिया गया था। इसकी लागत 149 करोड़ रुपए रखी गई। एग्रीमेंट के अनुसार 2012-13 तक पूरा करना था, लेकिन कंपनी ऐसा नहीं कर पाई।

- इसके पीछे तर्क दिया गया कि वित्त विभाग सातवें वेतन, जीएसटी समेत अन्य नए प्रयोग कराता रहा, जिसके कारण विलंब हुआ। लिहाजा कंपनी ने हाल ही में मार्च 2017 में डिजास्टर रिकवरी सेंटर शुरू किया है। अभी भी आधा काम बाकी है।

- लिहाजा कैबिनेट ने टीसीएस को 31 दिसंबर 2018 तक का समय और दे दिया है। कैबिनेट बैठक के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री व सरकार के प्रवक्ता गोपाल भार्गव ने कहा कि अब कंपनी जितना काम करेगी, उतना पैसा उसे दिया जाएगा।

ये काम किए हैं अब तक टीसीएस ने
- तीन सब सिस्टम मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली, पेंशन प्रबंधन सूचना प्रणाली और वित्त प्रबंधन सूचना प्रणाली बनाने थे। इसके तहत 16 मॉड्यूल थे। इसमें से सिर्फ 5 पूर्णत: बन पाए हैं। तीन अभी पूरी तरह से फंक्शन में नहीं आए। शेष बाकी हैं। अभी तक बने सिस्टम से पांच लाख अधिकारियों व कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। इसके साथ ही डाटा सेंटर व डिजास्टर रिकवरी सेंटर बन चुके हैं।

मंत्रियों ने स्मार्ट फोन की क्वालिटी पर उठाए सवाल

- स्मार्ट फोन की क्वालिटी को लेकर मंत्रियों ने ही सवाल उठा दिए हैं। तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री दीपक जोशी, सहकारिता राज्यमंत्री विश्वास सारंग और पर्यटन राज्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने कहा कि पिछली बार जो फोन दिए गए, उनकी मेमोरी कम है। डाटा भी आज की जरूरत के हिसाब से नहीं है। इसलिए थोड़ा अच्छी क्वालिटी के स्मार्ट फोन दिए जाएं।

- इतनी ही कीमत पर टेबलेट भी दिए जा सकते हैं। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संबंधित आईटी डिपार्टमेंट से कहा टेबलेट और स्मार्ट फोन को लेकर अध्ययन किया जाए कि क्या बेहतर हो सकता है। क्वालिटी भी ठीक होनी चाहिए।