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Valentine Special: प्यार को पाने के लिए सीखी साइन लेंग्वेज, ऐसी हैं ये लव स्टोरी

वेलेंटाइंस-डे यानी एक ऐसा दिन, जिसका हर उस व्यक्ति को इंतजार होता है जो किसी से प्रेम करता है।

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 11:43 PM IST

भोपाल. वेलेंटाइंस-डे यानी एक ऐसा दिन, जिसका हर उस व्यक्ति को इंतजार होता है जो किसी से प्रेम करता है। यह प्रेम किसी खास से, माता-पिता से या किसी फ्रेंड से भी हो सकता। प्यार ही है जो जीवन में खुशियां लाता है और ऊर्जा का कम्युनिकेट भी करता है। यही वजह है कि वेलेंटाइन्स डे को लेकर हर कोई स्पेेशल प्रिपरेशन करता है। इसके लिए मार्केट में भी आकर्षक गिफ्ट्स की वैरायटी है, जो किसी को दिए जा सकते हैं। इस वेलेंटाइंस-डे पर DainikBhaskar.com ऐसी लव स्टोरीज के बारे में बता रहा है जो एक जो प्रेम से शुरू हुईं और शादी में बदल गई। अपने प्यार को पाने के लिए सीखी साइन लेंग्वेज...


- बैंक में पोस्टेड प्रज्ञा सोनी कहती हैं, नेशनल डेफ यूथ काॅन्फ्रेंस में प्रीतिश से मुलाकात हुई। प्रीतिश उस समय तक साइन लेंग्वेज ज्यादा नहीं जानते थे।

- उन्होंने शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन प्रीतिश को सांकेतिक भाषा का ज्ञान न होना मुझे अधूरेपन का अहसास दिला रहा था, मैंने उस समय शादी का प्रस्ताव टाल दिया।

- इसके बाद प्रीतिश ने सांकेतिक भाषा सीखी और नवंबर 2017 में हमारी शादी हो गई।

- प्रीतिश इंदौर में लोकल फंड सुपरविजन डिपार्टमेंट में सब ऑडिटर के पोस्ट पर हैं और मैं भोपाल में पदस्थ हूं।

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डॉक्टर क्लीनिक में, घर में रही घूंघट वाली बहू बन के। डॉक्टर क्लीनिक में, घर में रही घूंघट वाली बहू बन के।

डॉक्टर क्लीनिक में, घर में रही घूंघट वाली बहू बन के...

 

 

- विमन डेंटल काउंसिल की वाइस चेयरपर्सन डॉ. प्रतिमा वाजपेयी की शादी को 24 साल हो चुके हैं। बीडीएस करते हुए उनकी मुलाकात डॉ. संजीव वाजपेयी से हुई। डॉ. प्रतिमा कहती हैं, पहले एक्सप्रेशंस से अपना प्यार जाहिर किया जाता था। 

- जब मैं वैक्स मॉडल से दांतों का स्ट्रक्चर तैयार करती थी तो डॉक्टर साहब मेरा बाउल छुपा देते थे। मुझे दोस्त बताते कि उन्होंने बाउल छुपाया है, तब  मैं मांगने जाती और वो मुस्कुराकर दे देते। 

- एक दिन इंदौर में दोस्त से मैसेज भिजवाया कि वे मेरे साथ अपना भविष्य देखते हैं। प्यार का इजहार बस इतनी सी बात से हुआ। मैं गुजराती थी और वो ब्राह्मण, उनका परिवार परंपराओं को मानने वाला। 

- मुझे कहा गया कि साड़ी पहनना, घूंघट लेना और खाना बनाना सीख लूं। मुंबई में क्लिनिक से आने के बाद साड़ी ड्रेपिंग और कुकिंग करना सीखा। अपने प्यार के लिए डॉक्टर होते हुए भी घर में घूंघट करके रही।

हमारी तो हर मुलाकात वेलेंटाइंस-डे की तरह। हमारी तो हर मुलाकात वेलेंटाइंस-डे की तरह।

हमारी तो हर मुलाकात वेलेंटाइंस-डे की तरह 
- जन्म से डीफ एंड डम्प आस्था गुप्ता और सुनील का शादी के बाद यह पहला वेलेंटाइन्स डे है।

- आस्था ने बताया, मैं और सुनील दोनों आशा निकेतन में साथ पढ़ते थे और बहुत अच्छे दोस्त थे।

- हमारी गहरी दोस्ती को देख हमारे रिश्ते से हमारे मम्मी-पापा को प्यार हो गया और हमसे पहले उन्हें यह अहसास हुआ कि हम-दूसरे के कम्पेनियन हो सकते हैं।

- 2003 से शुरू हुई हमारी दोस्ती 2017 दिसंबर में प्यार का रिश्ता बन गई।

- पेशे से फैशन डिजाइनर और पेंटिंग आर्टिस्ट आस्था के पति दिल्ली की एक कंपनी में सीनियर एनालिस्ट हैं।

- आस्था कहती हैं, हम अलग-अलग शहरों में रहते हुए हमारे प्यार को व्हाट्सएप पर तरोताजा रखते हैं और हर वक्त कनेक्टेड रहते हैं।

- वीकेंड और ऑफिस में मिलने वाली छटि्टयां हमारे लिए इतनी स्पेशल होती हैं कि हर मुलाकात को हम वेलेंटाइन्स डे कह सकते हैं।