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पैसों की बचत में पीछे हुए गांव के लोग, दो साल पहले शहर से आगे थे

प्रदेश के ग्रामीण बचत करने की बजाए शहरी लोगों की तुलना में ज्यादा कर्ज ले रहे हैं।

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2018, 06:46 AM IST
villagers behind money saved were ahead city years

भोपाल. प्रदेश के ग्रामीण बचत करने की बजाए शहरी लोगों की तुलना में ज्यादा कर्ज ले रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि सरकारी सब्सिडी के लिए जनधन खाते खोलने वाले ग्रामीणों की औसत बचत जून-17 से लेकर दिसंबर-17 तक औसतन 7 रुपए घटी है। इसकी तुलना में महानगरीय क्षेत्रों में बचत खातों में धन बढ़ रहा है। आरबीआई के आंकड़ों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में बचत दर सिर्फ 1.5 फीसदी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 6 फीसदी से भी ज्यादा है।


अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि दो साल पहले तक ग्रामीण क्षेत्रों की बचत दर शहरों से ज्यादा थी। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 2012 से 2015 तक ग्रामीण क्षेत्रों में बचत 32% बढ़ी, जबकि शहरी क्षेत्रों में बचत की दर सिर्फ 30% ही बढ़ी थी, लेकिन अासान कर्ज की उपलब्धता से यह स्थिति तेजी से बदली है। हैरानी की बात यह है कि पिछले दो साल में बैंकों ने हाउसिंग और एजुकेशन लोन 723 करोड़ रुपए के मुकाबले कृषि लोन 31 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा दिया, लेकिन बार-बार फसलें खराब होने से किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता लगातार घट रही है।

शहरी क्षेत्रों की बचत

6 माह में शहरी क्षेत्रों के 1.5 करोड़ खातों मंें 8763 करोड़ आए। बढ़ोतरी रही 6% से ज्यादा। ट्रेंड इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर का है।

समयावधि जमा राशि
31 दिसं-16 1,43,958
31मार्च-17 1,45,583
30 जून-17 1,48,749
30 सितं-17 1,52,721
ग्रामीण क्षेत्रों की बचत
6 माह में ग्रामीण क्षेत्रों के 2.9 करोड़ खातों में 571 करोड़ ही आए। बढ़ोतरी रही 1.55 फीसदी। यह पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का ट्रेंड है।
समयावधि जमा राशि
31 दिसं-16 36,834
31मार्च-17 36,792
30 जून-17 36,341
30 सितं-17 37,405

5 साल में डिपॉजिट रेट सबसे कम

दिसंबर-17 में डिपॉजिट में टर्म डिपाजिट (55%) का हिस्सा सबसे ज्यादा है। इसके बाद सेविंग डिपॉजिट (39%) और सामान्य डिपाजिट (11%) का स्थान आता है।

वर्ष जमा बढ़ोतरी
दिसं-12 201,006 ---
दिसं-13 241,281 20%
दिसं-14 273,359 13%
दिसं-15 314,212 14%
दिसं-16 337,995 7.56%
दिसं-17 351,186 3.90%
दो साल में... कृषि क्षेत्र में कर्ज 51% बढ़ा
- बैंकों ने पिछले दो साल में कृषि क्षेत्र को दिए जाने वाले कर्ज 51% तक बढ़ाए। दिसं-15 में बैंकों द्वारा कृषि क्षेत्र काे दिया जाने वाला कर्ज 60,977 करोड़ रुपए था, जो दिसं-17 में बढ़कर 92,338 करोड़ हो गया। इस अवधि में बैंकों ने 31,361 करोड़ के नए कर्ज कृषि क्षेत्र में दिए। इन दो सालों में बैंकों ने कुल 64,693 करोड़ रुपए का कर्ज बांटा। यानी बैंकों ने 48% कर्ज केवल कृषि क्षेत्र में दिया। इस दौरान एजुकेशन लोन को दिए जाने वाले कर्ज में 395 करोड़ रुपए और होम लोन में 328 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली।
कर्ज इस तरह बढ़े
दिसं-12 124329 ---
दिसं-13 156496 25%
दिसं-14 178389 13%
दिसं-15 196167 9.96%
दिसं-16 221922 13.12%
दिसं-17 260860 17.54%
ग्रामीण लोन दूसरी जगह डायवर्ट कर रहे हैं, इसलिए उन पर कर्ज बढ़ रहा है
- संचार माध्यमों के फैलाव से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की जीवनशैली के बीच अंतर खत्म हो रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास इस जीवनशैली को अपनाने के लिए संसाधन बेहद कम हैं। इसी के चलते वे बैंक से मिले कर्ज की दूसरी जगह डायवर्ट कर रहे हैं। इससे उन पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। यह आने वाले दिनों में ग्रामीण-मध्यमवर्ग के बीच ज्यादा संघर्ष की स्थिति निर्मित करेगा।
- राजेंद्र कोठारी, अर्थशास्त्री
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