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2005 के बाद सरकारी सेवा में कर्मचारी, अब अंशदायी पेंशन से निकाल सकेंगे पैसा

कर्मचारी व अधिकारी अब अपनी अंशदायी पेंशन से जरूरत पड़ने पर पैसा एडवांस निकाल सकेंगे।

Danik Bhaskar | Jan 10, 2018, 05:45 AM IST

भोपाल . मप्र में एक जनवरी 2005 या इसके बाद शासकीय सेवा में भर्ती हुए कर्मचारी व अधिकारी अब अपनी अंशदायी पेंशन से जरूरत पड़ने पर पैसा एडवांस निकाल सकेंगे। अभी तक राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत यह व्यवस्था नहीं थी। कैबिनेट के इस फैसले के बाद मप्र के करीब डेढ़ लाख से अधिक अधिकारी व कर्मचारियों को लाभ होगा। वे लंबे समय से इसका मांग कर रहे थे।

- राज्य शासन के अधीन सिविल सेवा एवं सिविल पदों के तहत नियुक्ति लेने वाले शासकीय सेवकों पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियम 44 के प्रावधान लागू हैं।

- इसके अधीन मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति उपादान (ग्रेच्युटी) भी मंजूर होगा। इसी तरह भारत सरकार पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण की अधिसूचना 11 मई 2015 के प्रावधानों में दी गईं परिस्थितियों, शर्तों और सीमा में संचित पेंशन धन राशि से एडवांस निकालने की सुविधा तथा सेवानिवृत्ति के 3 माह पूर्व अंशदान की कटौती बंद कर दी जाएगी।

- कैबिनेट ने एक अन्य फैसले में प्रदेश के 50 से 60 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को भी राहत दी है। अभी आकस्मिक मौत या दुर्घटना पर उन्हें 26 हजार रुपए मिलते थे, राज्य सरकार ने इसे बढ़ाकर दो लाख रुपए कर दिया है।

- प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया को बताया कि यह दो लाख रुपए अन्य तमाम योजनाओं से मिलने वाली राहत से अलग होंगे। इसके लिए अगले तीन साल तक 12 करोड़ 45 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है।

कैबिनेट के अहम फैसले

- बुरहानपुर, अनूपपुर, अशोकनगर, आगर-मालवा जिला मुख्यालयों में मलेरिया अधिकारी के नवीन कार्यालयों तथा उनमें 84 पदों की मंजूरी। { पर्यटन क्षेत्र में प्रचार-प्रसार के लिए तीन वर्षों में 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंंगे।

- ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण को कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर बनाने के लिए वित्तीय वर्ष चार करोड़ दिए जाएंगे। { खेल अकादमियों के लिए तीन साल में 236 करोड़ 56 लाख 92 हजार रुपए खर्च होंगे।
- स्टेडियम एवं खेल अधोसंरचना विकास के लिए 163 करोड़ 1 लाख 75 हजार रुपए मिलेंगे। {कपास पर मंडी टैक्स में दी जा रही 1% की छूट एक साल और जारी रहेगी। कैबिनेट ने इसे जनवरी 2018 से एक साल के लिए बढ़ाया है।

मेडिकल कॉलेज में सीधी भर्ती होगी, योग्यता खुद तय करके किए जा सकेंगे आवेदन

- मप्र के छह शासकीय मेडिकल कॉलेज और 7 नए प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर समेत अन्य शैक्षणिक पदों के लिए सीधी भर्ती के नियमों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

- अब जो व्यक्ति अर्हता पूरी करता है तो वह उस पद के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए मप्र लोकसेवा आयोग से रिक्रूटमेंट की जरूरत नहीं होगा। नए नियमों में प्रमोशन, आरक्षण के साथ सेवा-शर्तें यथावत रहेंगी। मेडिकल कौंसिल के नियम भी लागू रहेंगे। यह जरूर है कि सीधी भर्ती के लिए संभागों में आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी रहेगी।

नए नियमों में ये प्रमुख प्रावधान

- अभी 65 वर्ष तक सेवा के नियम हैं। इसे 70 साल तक संविदा पर बढ़ाया जा सकेगा, बशर्ते संबंधित मेडिकल कॉलेज जरूरी समझे। संविदा में पेंशन की राशि काटने के नियम भी नहीं रहेंगे। यह विकल्प मिलेगा कि कमिश्नर और संविदा पर नियुक्त होने वाला व्यक्ति वेतन को लेकर नेगोशिएशन कर सके।

- मेडिकल कॉलेज में पद पर नियुक्ति के बाद ट्रांसफर नहीं होंगे। कोई व्यक्ति चाहे तो वह 3 से 6 साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर दूसरी जगह जा सकेगा।

- नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टॉफ के लिए अलग से नियम बनेंगे।