भोपाल

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यूएन वुमन संस्था की रिपोर्ट:पब्लिक टाॅयलेट के यूज करने में महिलाओं को लगता है डर

भोपाल के पब्लिक टाॅयलेट (सुलभ शौचालय) का इस्तेमाल करने में महिलाओं को निजता भंग होने का डर रहता है।

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 01:02 AM IST
Women Feel Fear in Using Public toilet

भोपाल. भोपाल के पब्लिक टाॅयलेट (सुलभ शौचालय) का इस्तेमाल करने में महिलाओं को निजता भंग होने का डर रहता है। इसके कारण अधिकांश महिलाएं पब्लिक टाॅयलेट यूज करने में संकोच करती हैं। यहां महिला सफाईकर्मी भी तैनात नहीं है। पुरुष कर्मचारी सफाई करते हैं। यूएन वुमन संस्था की रिपोर्ट में राजधानी के पब्लिक टाॅयलेट की यह हकीकत सामने आई है। संस्था ने देश के चार शहर भोपाल, अजमेर, भुवनेश्वर और आंध्रप्रदेश के अनंतपुर के मुख्य बाजारों का सर्वे किया हैं। भोपाल के न्यू मार्केट और रंगमहल एरिया के पांच पब्लिक टाॅयलेट के 207 यूजर्स से बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें 106 महिलाओं ने अपने अनुभव भी विस्तार से बताए हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के सबसे भीड़भाड़ वाले न्यू मार्केट के अंदर दो पब्लिक टाॅयलेट यूज करने वालीं 58 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि चूंकि पुरुष व महिला टाॅयलेट का एंट्रेंस गेट एक है। जहां पुरुष मौजूद रहते हैं।

- इस कारण उन्हें टाॅयलेट यूज करने में झिझक होती है। यहां सुरक्षाकर्मी भी पुरुष हैं। यह जिम्मेदारी सुपरवाइजर के पास है। जबकि यहां महिलाकर्मी की तैनाती होनी चाहिए। आश्चर्य की बात यह है कि नगर निगम सफाई पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि पब्लिक टायलेट में फीडबैक रजिस्टर तक रखा जाता है।


रिपोर्ट में सुझाव व सिफारिश
- पब्लिक टायलेट में महिला कर्मचारियों की तैनाती होना चाहिए।
- मॉनिटरिंग के अलावा फीडबैक रजिस्टर होना चाहिए।
- एयर फ्रेशनर हर टायलेट में रखे जाएं।
- पब्लिक टायलेट का संचालन महिला समूहों को दिया जा सकता है।

कोट्स
अफसरों के समक्ष किया है प्रेजेंटेशन

- पब्लिक टायलेट की डीटेल रिपोर्ट के साथ नगर निगम और स्वच्छ भारत मिशन में लगे अफसरों के समक्ष प्रेजेंटेशन किया गया है। यह सर्वे भोपाल के अलावा देश के अन्य तीन शहरों में किया जा रहा है। भोपाल की रिपोर्ट तैयार है, लेकिन अन्य शहरों में सर्वे जनवरी माह में पूरा होगा।

- पल्लवी माली, मैनेजर, यूएन वुमन

केंद्र सरकार ने डिजाइन किए हैं
पब्लिक टायलेट केंद्र सरकार ने डिजाइन किए हैं। इसे सुलभ इंटरनेशनल एजेंसी संचालित करती है। यदि यहां महिलाओं को परेशानी हो रही है तो मेंटेनेंस करने वाली एजेंसी से बात की जाएगी।
- एमपी सिंह, अपर आयुक्त स्वास्थ्य नगर निगम

इसलिए होती है झिझक... 58% महिलाओं ने कहा कि पुरुष और महिला टाॅयलेट का एंट्रेंस गेट एक, सफाईकर्मी भी पुरुष हैं

पांच में से चार टाॅयलेट गंदे
- यह रिपोर्ट न्यू मार्केट के दो, रंगमहल चौराहा, काटजू अस्पताल के पास और अपेक्स बैंक के निकट बने एक-एक पब्लिक टाॅयलेट के इस्तेमाल को लेकर तैयार की गई है। इसमें कहा गया है कि इन पांच में से चार टाॅयलेट गंदे रहते हैं। अपेक्स बैंक के पास स्थित टाॅयलेट कुछ हद तक साफ रहता है।

तीन कैटेगरी में बांटा

बुरा...

- न्यूमार्केट में हकीम होटल और क्वालिटी रेस्त्रां के पास व रंगमहल चौराहे पर बने टाॅयलेट।

औसत...

- काटजू हाॅस्पिटल के पास।

अच्छा...

- अपेक्स बैंक के पास।

महिलाओं की ऐसी मजबूरी

- 3 चौथाई कामकाजी महिलाओं ने कहा कि 12 से 15 घंटे घर से बाहर रहने के कारण पब्लिक टाॅयलेट पर निर्भरता ज्यादा है। इसलिए मजबूरी में इस्तेमाल करना पड़ता है।

34%

- महिलाओं ने कहा- टाॅयलेट पहुंच के बाहर होने से या तो नौकरी छोड़ी या फिर नौकरी नहीं की।

85%

- महिलाओं ने कहा-पब्लिक टाॅयलेट हाइजेनिक नहीं हैं, लेकिन इस्तेमाल करना मजबूरी है।

शी लाउंज के टाॅयलेट को बनाएं मॉडल
- रिपोर्ट के मुताबिक दस नंबर मार्केट के शी लाउंज में बने पब्लिक टाॅयलेट में गंदगी नहीं रहती है। महिलाओं की निजता भी भंग नहीं होती है। संस्था ने सिफारिश की है कि शी लाउंज के टाॅयलेट को मॉडल मानते हुए पूरे प्रदेश में ऐसे ही टाॅयलेट का निर्माण होना चाहिए।

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