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लिव-इन में रह चुकी महिला पार्टनर पर न कर सकेगी ज्यादती का केस, जमानती होगा अपराध

अब पार्टनर के खिलाफ ज्यादती (धारा 376) के तहत केस दर्ज नहीं करवा सकेंगी।

विशाल त्रिपाठी | Last Modified - Jan 16, 2018, 04:41 AM IST

  • लिव-इन में रह चुकी महिला पार्टनर पर न कर सकेगी ज्यादती का केस, जमानती होगा अपराध

    भोपाल .लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुकी महिला अब पार्टनर के खिलाफ ज्यादती (धारा 376) के तहत केस दर्ज नहीं करवा सकेंगी। मप्र क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 में ऐसे मामले दर्ज करने के लिए आईपीसी की नई धारा बनाई गई है। इस तरह के मामले अब शादी का झांसा देकर अवैध संबंध बनाने की श्रेणी में रखे जाएंगे। आईपीसी की धारा 493 ‘क’ के तहत दर्ज इस अपराध की सजा तीन साल तक होगी। अब ये धारा जमानती होगी और इसे संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। अब तक धारा 493 के तहत अपराध दर्ज करने के अधिकार पुलिस के पास नहीं थे। महिला की ओर से अदालत में दायर परिवाद के आधार पर ही इस धारा के तहत अपराध दर्ज किए जाते थे।

    पीछा किया तो सात साल की सजा, एक लाख रुपए जुर्माना

    - किसी महिला के कपड़े फाड़ने या उस पर आपराधिक बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 ‘ख’ के तहत केस दर्ज किया जाएगा। दोष सिद्ध होने पर न्यूनतम तीन साल और अधिकतम सात साल की सजा होगी। दूसरी बार भी ऐसे ही अपराध में 7 से 10 वर्ष तक की सजा और एक लाख का जुर्माना भी होगा।
    - महिला का पीछा करने वालों के खिलाफ 354 ‘घ’ का केस दर्ज होगा। दूसरी बार दोष सिद्ध होने पर तीन से सात साल की सजा और एक लाख रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके लिए मजिस्ट्रेट के अधिकार बढ़ाए गए हैं। अब तक उन्हें ऐसे मामलों में दस हजार रुपए तक जुर्माने के अधिकार थे।

    बढ़ता था अपराध का आंकड़ा...

    - लिव इन के मामलों में भी धारा 376 के तहत केस दर्ज होने के कारण पुलिस के आंकड़े काफी बढ़ जाते थे। यही वजह है कि कई वर्षों से महिलाओं के खिलाफ ज्यादती के मामले में मप्र पहले स्थान पर रहता था।

    - अब ऐसे मामलों में धारा 493 ‘क’ के तहत केस दर्ज होगा। इससे न केवल पुलिस के आंकड़े भी सुधर जाएंगे। बल्कि लिव इन में रह रही महिला के पार्टनर की सामाजिक छवि भी ज्यादा खराब नहीं होगी। अदालत से बरी होने के बाद भी उसे बलात्कारी की ही संज्ञा दी जाती रही है।

    राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार
    - मप्र क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 के तहत आईपीसी की 6 और सीआरपीसी की 5 धाराओं पर काम किया गया। डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला, एडीजी अरुणा मोहन राव और जिला अभियोजन अधिकारी (सीआईडी) शैलेंद्र सिरोठिया व अन्य अफसरों ने अप्रैल 2017 में इस पर काम शुरू किया था।

    - अक्टूबर 2017 में प्रस्तावित संशोधन विधि विभाग को सौंप दिया गया। विधि विभाग द्वारा हुए आखिरी संशोधन के बाद इसे विधानसभा में पारित कर दिया गया। फिलहाल मप्र क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट-2017 को राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार है।

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Web Title: Women Who Who Live In Not Allowed For Excessive Case
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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