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वर्ल्ड बैंक की शर्त बनी अड़ंगा, अटक सकती है 750 करोड़ की ग्रांट

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य की 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी है।

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 06:30 AM IST
World Bank stays banned, can get stuck

भोपाल. भोपाल, इंदौर और जबलपुर स्मार्ट सिटी को वर्ल्ड बैंक की चैलेंज स्कीम के तहत 750 करोड़ रुपए का अनुदान केवल इसलिए अटक सकता है, क्योंकि तीनों शहर वर्ल्ड बैंक की सिर्फ एक शर्त पूरी नहीं कर पा रहे हैं। शर्त है- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अंशदान के उपयोग की। दरअसल, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में केंद्र और राज्य की 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी है।

- केंद्र ने पिछले वित्तीय वर्ष में अपने हिस्से की राशि रिलीज कर दी थी, लेकिन पिछले एक साल से सरकार अपने हिस्से के अंशदान की राशि 300 करोड़ देने में आनाकानी कर रही है। फिलहाल राज्य से यह राशि मिलने की उम्मीद कम ही लग रही है।

- क्योंकि द्वितीय अनुपूरक बजट में सरकार ने स्मार्ट सिटी के लिए राशि का प्रावधान नहीं किया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में 25 नवंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में अनुपूरक बजट में नगरीय विकास एवं आवास विभाग को सिर्फ हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम के लिए राशि को मंजूरी दी गई तो इसी दिन शाम को विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने वित्त विभाग को तीनों शहरों के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए राशि देने के लिए नोटशीट भेजी थी। लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ।
- वर्ल्ड बैंक ने स्मार्ट सिटी को आर्थिक मदद देने के लिए परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव प्रोग्राम के तहत चैलेंज स्कीम लागू की है। स्कीम में 12 स्मार्ट सिटी को 3 हजार करोड़ रुपए अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। यानी एक स्मार्ट सिटी को 250 करोड़ रुपए मिलेंगे।

- वर्ल्ड बैंक ने इसके लिए कुछ शर्तें लागू की हैं। मप्र में भोपाल, इंदौर और जबलपुर स्मार्ट सिटी सिर्फ एक शर्त को छोड़कर लगभग सभी शर्तें पूरी कर रहा है। शर्त यह है कि प्रोजेक्ट के लिए केंद्र और राज्य सरकार के अंशदान की पूरी राशि का उपयोग शुरु कर दिया गया हो।

- केंद्र सरकार ने तो अपने हिस्से की राशि रिलीज है, लेकिन राज्य सरकार ने अंशदान नहीं दिया है। केंद्र ने इंदौर को मार्च 16 और भोपाल व जबलपुर को अप्रैल 16 में राशि जारी कर दी थी।

प्रस्ताव भेजने की डेडलाइन 15 दिसंबर
- स्कीम में हिस्सा लेने के लिए तीनों शहरों के प्रस्ताव 15 दिसंबर तक केंद्र सरकार के माध्यम से वर्ल्ड बैंक के समक्ष पहुंच जाना चाहिए। लेकिन अभी तक राज्य के हिस्से की राशि नहीं मिलने के कारण प्रस्ताव अटके हैं।

खाते में जमा राशि खर्च करो, तब देंगे अंशदान

- पिछले छह माह से नगरीय विकास विभाग स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार के हिस्से की राशि की मांग रहा है।

- पता चला है कि वित्त विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी ने यह तर्क देकर राशि रिलीज करने से इंकार कर दिया था कि केंद्र से मिली राशि को पहले खर्च करो, इसके बाद ही राज्य के हिस्से की राशि दी जाएगी। इतना ही नहीं, केंद्र से मिली राशि खर्च करने की अनुमति वित्त विभाग से लेना पड़ रही है।

ये हैं मुख्य शर्तें
- स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के लिए एसपीवी (स्पेशल परपस व्हीकल) का गठन।
- केंद्र और राज्य सरकार का पूरा अंशदान एसपीवी को ट्रांसफर होना चाहिए।
- कंपनी एक्ट के तहत आडिट कमेटी का गठन।
- सिटी लेबल पर एडवाइजरी फोरम की कम से कम एक बैठक अनिवार्य।

दो साल में सिर्फ 100 करोड़ खर्च शहर केंद्र से मिली राशि खर्च
भोपाल 153 30
इंदौर 183 50
जबलपुर 194 20
(राशि : करोड़ रुपए में)
जरूरत के हिसाब से खर्च कर सकते हैं राशि
स्कीम के मुताबिक अनुदान की राशि को खर्च करने का कोई बंधन वर्ल्ड बैंक ने नहीं लगाया है। इस राशि का उपयोग स्मार्ट सिटी कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकेगी। इसमें केंद्र अथवा राज्य सरकार का प्रत्यक्ष तौर पर कोई हस्तक्षेप भी नहीं होगा।
वित्त विभाग से किया है अनुरोध
- वर्ल्ड बैंक की स्कीम अच्छी है। इसमें मप्र के तीन शहर भोपाल, इंदौर व जबलपुर प्रतिभागी बन रहे हैं। हमने राज्य सरकार से मिलने वाली राशि रिलीज करने के लिए वित्त विभाग से अनुरोध किया है।
मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास विभाग
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